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ओरमांझी के अंचल मैदान में अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस सादगीपूर्ण तरीके से मनाया गया

  • झारखंड को खुशहाल बनाने में आदिवासी की अहम भूमिकाः रमेश उरांव

  • आदिवासियों के अस्तित्व को बचाए रखने के लिए सरना कोड की मांग

प्रतिनिधि

ओरमांझीः ओरमांझी के अंचल मैदान में अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस के मौके पर

झारखंड प्रदेश आदिवासी सरना पड़हा के बैनर तले अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस

धूमधाम से मनाया गया और संकल्प लिया गया कि आदिवासी धर्म संस्कृति वेशभूषा

आदि पहचान को मिटने नहीं देंगे और आने वाला पीढ़ी को भी इस बारे में जागरूक करना

होगा। इस कार्यक्रम में पड़हा के संरक्षक रमेश उरांव ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र संघ की

महासभा में 1994 को घोषणा हुआ और प्रथम बार अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस मनाया

गया। उस तिथि के बाद प्रत्येक साल 9 अगस्त को विश्व अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस

मनाया जाता है। इसका उद्देश्य की पूरे विश्व में शांति स्थापित कायम करना और

आदिवासियों का धर्म संस्कृति और रूढ़िवादी को अक्षुण्ण बनाए हुए रखने के लिए घोषणा

किया गया था। इसी उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष आदिवासियों का उत्थान के लिए आर्थिक

सामाजिक शैक्षणिक राजनीतिक एवं जल जंगल जमीन की रक्षा के लिए यह दिवस

मनाया जाता है। जो आदिवासियों के लिए गौरवान्वित दिन होता है और सरकार से यह भी

आज के दिन मांग करते हैं कि वर्षों से आदिवासियों का मांग रहा है पूरे भारत देश में की

सरना धर्म का अलग कोड होना चाहिए। झारखंड सरकार से उम्मीद है कि शीघ्र ही हेमंत

सरकार के नेतृत्व में सरना धर्म कोड विधानसभा में पारित करके एवं अनुशंसा करके केंद्र

सरकार को भेजेंगे। आज समाज को एक षड्यंत्र के तहत बांटने का काम किया जा रहा

है. जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

ओरमांझी के अंचल मैदान में भी सरना कोड की मांग उठी

इस कार्यक्रम में पड़हा समाज के अध्यक्ष प्रोफेसर प्रेमनाथ मुंडा भी अपने विचार रखें और

कहे कि हमारे समाज धर्म संस्कृति वेशभूषा की अलग पहचान है और हम लोग भारत देश

के मूल निवासी हैं और आज आदिवासियों को राज सरकार हो या केंद्र सरकार आदिवासी

के नाम पर चलने का काम किया जा रहा है तथा इस कार्यक्रम में और भी वक्ताओं ने

अपने विचार रखे चकला पंचायत के मुखिया श्रीमती बीना देवी दिल रंजन पाहन सोमर

बालक पहान सुरेंद्र उरांव समुंदर पहान काशी नाथ पाहन सुखराम पाहन सुकरा मुंडा

कैलाश बेदिया फेकन पाहन दीपक मुंडा गोपाल बेदिया सुनीता देवी जेठू मुंडा नेवाराम मुंडा

राजकिशोर मुंडा जगमोहन मुंडा लालमोहन बेदिया इत्यादि मुख्य रूप से शामिल थे


 

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