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इलेक्ट्रानिक्स की दुनिया में नये आविष्कार से बदलेगा बहुत कुछ




  • बाल से पतला ट्रांसजिस्टर बना लिया वैज्ञानिकों ने

  • शक्तिशाली ट्रांसजिस्टर आकार में बहुत छोटा

  • इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप की मदद से किया काम

  • एक कार्बन नैनोट्यूब के अंदर किया बदलाव

राष्ट्रीय खबर

रांचीः इलेक्ट्रानिक्स की दुनिया में नये किस्म के ट्रांसजिस्टर से बहुत कुछ बदल सकता है। दरअसल आकार में बहुत ही छोटे इस उपकरण का व्यापारिक उत्पादन जब प्रारंभ होगा तो सारे इलेक्ट्रानिक्स आधारित मशीनों की संरचना भी बदलेगी। इस अधिक क्षमता वाले ट्रांसजिस्टर की वजह से यंत्रों का आकार भी छोटा हो जाएगा।




नैनो ट्यूब की बदौलत तैयार किया गया यह ट्रांसजिस्टर आकार में इंसानी बाल से भी पच्चीस हजार गुणा पतला है, ऐसा दावा वैज्ञानिकों ने किया है। इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप की मदद से इसे तैयार किया गया है। इस काम को पूरा करने में जापान, चीन, रुस और ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिको ने एक साथ मिलकर काम किया है। इस बारे में प्रसिद्ध वैज्ञानिक पत्रिका जर्नल साइंस में एक रिपोर्ट प्रकाशित की गयी है। इसे बनाने के लिए वैज्ञानिकों को खास विधि का इस्तेमाल करना पड़ा है।

इलेक्ट्रानिक्स में यह सफलता पांच साल बाद मिली

क्यूयूटी सेंटर फॉर मैटेरियल साइंस के सह निदेशक प्रोफसर दिमित्री गोलबर्ग ने इस शोध दल का नेतृत्व किया है। उन्होंने इसके परिणाम की जानकारी देते हुए कहा कि यह एक बड़ी उपलब्धि है।इसकी वजह से भविष्य के इलेक्ट्रानिक्स आधारित सारे उपकरणों की संरचना ही बदल जाएगी। साथ ही कंप्यूटर की दुनिया में इसका जबर्दस्त लाभ भी होगा।

आकार में बहुत ही छोटे होने की वजह से पूरी मशीन की संरचना भी छोटी हो जाएगी जबकि उसकी कार्य कुशलता में जबर्दस्त बढ़ोत्तरी होगी। इस एक प्रयोग से यह पता चल गया है कि किसी एक कार्बन नैनोट्यूब के इलेक्ट्रॉनिक आचरण को नियंत्रित किया जा सकता है।




इसी वजह से अब कम आकार की मशीनों के काम करने की क्षमता बढ़ जाएगी। बहुत कम बिजली की मदद से कॉर्बन नैनोट्यूब को जब गर्म किया गया तो उसने पहले कई लेयर बनाये उसके बाद ट्यूब के बाहरी आवरण के सेल अलग अलग हो गये। इसकी वजह से उसमें सिर्फ एक सतह ही रह गया।

नैनोट्यूब में एक कार्बन की सतह की संरचना बदली

इस एक सतह के कॉर्बन की संरचना को बदलना संभव था। इस पूरी प्रक्रिया को इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप से इसलिए करना पड़ा क्योंकि यह आकार में इतना छोटा था कि खुली आंखों से यह नजर भी नहीं आ सकता था। जापान के इंटरनेशनल सेंटर फॉर मैटेरियल नैनोआक्टिक्ट्रोनिक्स के प्रोफसर डॉ दाई मिंग टांग ने कहा कि इस शोध ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अत्यंत छोटे आकार के कॉर्बन नैनोट्यूब की संरचना में बदलाव किये जा सकते हैं।

इस काम को पूरा करने में पांच साल से अधिक समय से डॉ टांग काम कर रहे थे। इलेक्ट्रॉनिक यंत्रों का आकार छोटा होने के बारे में बताया गया है कि वर्तमान में एप्पल का आने वाले आईफोन 15 बिलियन ट्रांसजिस्टरों से बना होगा। ऐसे में अत्यंत सुक्ष्म आकार के ट्रांसजिस्टर होने की वजह से सारे उपकरणों का आकार छोटा होने के बाद भी उनकी गुणवत्ता वर्तमान से बहुत अधिक हो जाएगी।



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