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मंजूरा में पारंपारिक बेजाविंधा प्रतियोगिता का आयोजन




  • कृष्ण किशोर महतो ने लगाया निशाना, जीता धान खेत
  • डॉक्यूमेंट्री फिल्म का लोकार्पण किया गया समारोह में

कसमार: मंजूरा में मकर सक्रांति के अवसर पर पारंपारिक वेजाविंधा प्रतियोगिता में इस वर्ष कृष्ण किशोर महतो ने केले के स्तंभ पर निशाना साधकर विजय प्राप्त की। उसे पुरस्कार के तौर पर एक साल के लिए धान खेत पर खेती करने का अधिकार दिया गया।




इससे पूर्व प्रातः गांव के सभी श्रद्धालु महिला पुरूष गांव के महतो प्रधान के घर से गाजे-बाजे के साथ भजन कीर्तन करते हुए खांजों नदी तट पर पंहुचे। वहां पवित्र मकर स्नान किया। उसके बाद ब्राहमणों को भोजन कराया कराया। दोपहर को खोला चंडी स्थित गेंद खेला मैदान में प्रतियोगिता का आयोजन हुआ।

पंरपरानुसार प्रतियोगिता का प्रारंभ गांव के नाया जानकी महतो के द्वारा किया गया। 100 मीटर की दूरी पर केले का खंभा गाड़ा गया इसके सभी प्रतिभागियों ने निशाना साधना शुरू किया। दूसरे राउंड में पहले तीर में ही कृष्ण किशोर ने खंभे पर सटीक निशान साधकर बाजी मारी ली।

इसके पूर्व भी कृष्ण किशोर ने एक बार व उसके पिताजी बैजनाथ महतो ने कई बार प्रतियोगिता में बाजी मारी है। महतो प्रधान सुमित्रा नंदन महतो ने कहा कि यह पारंपारिक त्योहार हमारे पूर्वजों के द्वारा आयोजित किया जा रहा है, उसी परंपरा को निभाते हुए हमलोग प्रत्येक वर्ष मकर संक्रांति के अवसर बेजाविंधा प्रतियोगिता का आयोजन किया। वहीं बेझा बिंधा-द गेम ऑफ यूनिटीष् डॉक्यूमेंट्री फिल्म का भी रिलीज किया गया।




मंजूरा की इस परंपरा पर ही बनी है फिल्म

मंजूरा में बेझा बिंधा के मौके पर ग्रामीण संस्कृति और एकता पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म बेझा बिंधा-द गेम ऑफ यूनिटी, यू-ट्यूब पर मंजूरा गांव के नाया जानकी महतो के द्वारा रिलीज किया गया। इस फिल्म का निर्माण मंजूरा निवासी आकाश सरोज ने किया है। इस फिल्म में मकर संक्रांति के मौके पर सुबह नजदीकी नदी में नहाने की परंपरा, तदोपरांत चूड़ा दही खाना, तत्पचात गेंद खेलने की परंपरा के उपरांत बेझाविंधा प्रतियोगिता का विस्तृत रूप से वर्णन किया गया है।

इस दौरान गांव के महतो सह प्रखंड प्रमुख विजय किशोर गौतम ने बताया कि आज से सैकड़ों वर्ष पहले मंजूरा के महतो स्व रीतवरण महतो के द्वारा शुरू की गई। बेझा बिंधा नामक परंपरा गांव के सभी समुदाय के लोगों ने मिल जुल कर हर वर्ष मनाते आए हैं।

समाजसेवी मिथिलेश महतो ने बताया कि महतो परिवार के पूर्वजों के द्वारा शुरू किए गए इतिहासिक परंपरा व रिवाज है। जिसे आज की मॉडर्न पीढ़ी अपनी परंपरागत संस्कृति से दूर होती जा रही है। इस फिल्म के निर्माण होने से हमारी युवा पीढ़ी को अपनी परंपरागत संस्कृति को देखने और समझने के साथ-साथ इस धनी संस्कृति का वाहक बनेगी।

संस्कृति के साथ आत्मरक्षार्थ हेतु भी ये अमूल्य है। डोक्यूमेंट्री फिल्म रिलीज के मौके पर निवर्तमान मुखिया सह ग्राम प्रधान नरेश कुमार महतो, गिरिवर कुमार महतो, सतीश चंद्र महतो, ओमप्रकाश महतो, सुमित्रानंदन महतो, विनय कुमार, नरेश घांसी, भीषम महतो, मंटू तुरी, बैजनाथ महतो, जीतनारायण ठाकुर, नंद कुमार महतो, तेजु महली, भागीरथ महतो, विक्रम नायक, हरेंद्र महतो, चोलाराम तुरी, जेठू महतो, समेत सैकड़ो लोग मौजूद थे।



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