बेनामी संपत्ति के जरिए काले धन की तलाश बेहतर

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बेनामी और नामी संपत्ति और उसकी खरीद के स्रोत की  जांच से भी काला धन बाहर आ सकता है।

नोटबंदी से अगर काला धन नहीं निकल पाया तो बेनामी और नामी संपत्तियों की जांच से काफी सारा अनैतिक धन बाहर आ जायेगा।

यह तय है कि गलत तरीके से तथा कर चोरी कर कमाई करने वाले अपना सारा धन नोट अथवा सोना के तौर पर एकत्रित नहीं रखते।

अधिकांश धंधेबाज इसका निवेश जमीन और मकान खरीदने में किया करते हैं।

इसलिए अगर नामी-बेनामी संपत्ति की जांच सही तरीके से हो तो कमसे कम

अधिकारियों की काली कमाई का बड़ा हिस्सा अपने आप ही बाहर निकल आयेगा।

वरना ऐसे लोग तो वार्षिक विवरणी में अपने ससुराल से गिफ्ट में मिली संपत्ति बताकर अपनी जिम्मेदारी से मुक्ति पा जाते हैं।

अगर जांच हो कि वाकई उनका ससुराल इतना धन देने की स्थिति में है

तो ससुराल की संपत्ति की पूरी जांच हो जाए और अगर नहीं तो अधिकारी को ससुराल के धन से

मिली संपत्ति का विवरण स्पष्ट करने का आदेश की काला धन बाहर लाने के नये रास्ते खोल देगा।

इस तरीका का फैसला केंद्र सरकार लागू करने जा रही है। जो वाकई एक सराहनीय कदम होगा।

वशर्ते कि इसमें भी अपना पराये की छूट न हो। सरकार ने जमीन और मकान सहित

अन्य अचल संपत्ति की खरीद फरोख्त तथा पंजीकरण में फर्जीवाड़ा रोकने के लिये नया कानून बनाने की घोषणा की है।

आवास एवं शहरी विकास मामलों के मंत्रालय ने एक ही संपत्ति के एक से अधिक

गैरकानूनी पंजीकरण को रोकने और संपत्ति की फर्जी बिक्री की समस्या से निपटने के लिये

भूमि स्वामित्व (लेंड टाइटिल) अधिनियम बनाने की प्रक्रिया शुरू की है।

फर्जीवाड़ा रोकने के लिये जमीन की मिल्कियत के राष्ट्रीय स्तर पर जुटाये गये आंकड़ों को समेकित कर इस समस्या से निपटा जा सकता है।

एक अध्ययन के मुताबिक, अदालतों में लंबित संपत्ति संबंधी मामलों में लगभाग 80 फीसदी मामले स्वामित्व से ही जुड़े होते हैं।

वैसे भी भू अभिलेखों के डिजीटल होने की प्रक्रिया से भी यह काम दिनोंदिन आसान होता चला जा रहा है।

वरना पूर्व में जमीन के रिकार्ड के नाम पर अनेक किस्म के गोरखधंधे हुआ करते थे।

इस बारे में केंद्रीय नगर विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पहले ही घोषणा की थी।

प्रत्येक भूखंड का एक विशिष्ट पंजीकरण नंबर जारी कर बहुत कुछ सुधारा जा सकेगा।

साथ ही इसी नंबर की बदौलत कौन सी संपत्ति किसकी है, इसका पता चलने के बाद

संबंधित व्यक्ति के पास वैसी संपत्ति रखने की औकात है अथवा नहीं, इसका जांच आसान हो जाएगी।

दरअसल कर चोरी और घूसखोरी से अवैध कमाई करने वालों ने अपने घर के नौकरों तक के नाम पर स्थायी संपत्ति खरीद रखी है।

इसलिए जब ऐसे मामलों की जांच संबंधित नाम से प्रारंभ होगी तो जड़ तक पहुंचना कोई कठिन काम नहीं होगा।

सरकारी घोषणा के मुताबिक केन्द्रीय कानून बनने के बाद अन्य राज्य इसे अपनी जरूरत के मुताबिक लागू कर सकेंगे।

दिल्ली के ग्रामीण इलाकों में खेती की जमीन पर आवास एवं विकास कार्यों की जरूरतों की

पूर्ति के लिये प्रस्तावित लैंड पूलिंग पॉलिसी भी इस कानून के दायरे में होगी।

अधिकारी ने बताया कि प्रस्तावित लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत जमीन के पंजीकरण की प्रक्रिया में

एक ही भूखंड का अलग अलग व्यक्तियों द्वारा पंजीकरण कराने के आधार पर सामने आयी।

इस समस्या के समाधान के लिये मंत्रालय ने भूमि स्वामित्व कानून की जरूरत महसूस करते हुये यह पहल तेज की है।

वर्तमान में जमीन के अवैध कारोबार से जुड़े लोग भी लोगों की अज्ञानता का लाभ उठाते हुए

एक ही जमीन अलग अलग लोगों को बेचकर बेवकूफ बनाते हैं।

दूसरी तरफ रजिस्ट्री की प्रक्रिया में इसे रोकने का भी कोई प्रावधान नहीं होने की वजह से

इस एक ही जमीन की अनेकों बार रजिस्ट्री हो जाती है।

नतीजा होता है कि रजिस्ट्री के कागजात लेकर घूमने वाले आपस में लड़ते रहते हैं।

असली कमाई करने वाले दूर खड़े होकर तमाशा देखते है।

कानून बन जाने के बाद ऐसे कारोबार में निश्चित तौर पर दंड का प्रावधान भी होगा।

लिहाजा लोग वर्तमान परिपाटी की तरह खुलेआम यह धंधा नहीं कर पायेंगे

क्योंकि वर्तमान में यह सारा अनैतिक कारोबार रजिस्ट्री कार्यालय के लोगों की मिलीभगत से ही होता है।

अलबत्ता हर संपत्ति की जांच होने पर किसी एक छोटे राज्य में भी इसे लागू किया गया

तो पूरे देश में स्थायी संपत्ति के तौर पर एकत्रित काला धन का पता चल जाएगा।

साथ ही घूसखोरी और कर चोरी से अर्जित संपत्ति पर अतिरिक्त दंड कर लगाकर

ऐसे कर चोरों से सरकार अतिरिक्त कमाई करने के साथ साथ उन्हें दंडित भी कर सकेगा।

इस किस्म के दो चार लोगों को दंडित किये जाते ही शेष लोग खुद ब खुद लाइन में लग जाएंगे।

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