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टावर तकनीक से दिल के एओरटा वाल्व में लीकेज, बिना सर्जरी के वॉल्व रिप्लेसमेंट

जयपुरः टावर तकनीक (ट्रांस कैथेटर एओर्टिक वॉल्व रिप्लेसमेंट) के जरिए गंभीर

बीमारियों से जूझ रही 59 वर्षीय महिला का वॉल्व रिप्लेसमेंट से सफल उपचार किया है।

इस महिला सीता देवी को खून की गंभीर बीमारी,क्रानिक किडनी डिजीज और अन्य

बीमारियां थीएटरनल अस्पताल के सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ रवीन्द्र

सिंह राव ने बताया कि सीता देवी को चलने पर सांस फूलने और घबराहट की भी समस्या

थी। उन्हें हाल ही में जयपुर इटरनल हास्पिटल लाया गया जहां उनका उपचार किया गया।

जांच के दौरान उन्हें एओर्टिक रीगर्जिटेशन (एओरटा में लीकेज) की समस्या थी। इस

बीमारी में ऑक्सीजन युक्त रक्त आगे बहने की बजाय वापस दिल की तरफ चला जाता है

जिससे ऑक्सीफाइड और अनऑक्सीफाइड खून आपस में मिल जाते हैं और दिल के चैंबर

पर दबाव पड़ने लगता है। पीड़ित महिला को आईटीपी की समस्या होने के अलावा क्रॉनिक

किडनी डिजीज और हाइपरटेंशन की भी दिक्कत थी। इन कारणों की वजह से उनका

ओपन हार्ट सर्जरी संभव नहीं थी।

टावर तकनीक से ओपन हार्ट सर्जरी का विकल्प खुला

उन्होंने बताया कि सर्जनी के खतरों को देखते हुए सीतादेवी को इंटरवेंशनल तकनीक से

वॉल्व रिप्लेस किया गया जिसके लिए टावर तकनीका इस्तेमाल किया गया। पूरी प्रक्रिया

मरीज को वेंटीलेटर और एनेस्थेसिया की ही की गयी। जांघ की धमनी के रास्ते कैथेटर की

सहायता से एओर्टिक वॉल्व तक पहुंचा गया जहां बैलून एक्सपेंडल तकनीक का इस्तेमाल

करते हुए मरीज को नया वॉल्व लगाया गया। इसके साथ ही एक अन्य डिवाइस की मदद

से दो अन्य नसों के छेद को बंद किया गया। नये वॉल्व ने इंप्लांट होने के साथ ही काम

करना शुरू कर दिया और मरीज की हाल में तेजी से सुधार आना शुरू हो गया। एक-दो दिन

बाद ही मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज भी कर दिया गया और अब वह सामान्य जीवन

जी रही है।


 

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