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झारखंड का पर्यटन विकास भी राज्य के लिए ज्यादा जरूरी

झारखंड को नये सिरे से पर्यटन के लिहाज से बेहतर स्थान पर लाना भी

राज्य के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

अभी से करीब तीन दशक पूर्व दुर्गा पूजा प्रारंभ होते ही इस पूरे राज्य में

पर्यटकों के आने का सिलसिला प्रारंभ हो जाता था।

उस दौर में रांची का मौसम भी कुछ और था और खास तौर पर कोलकाता से

आने वाले पर्यटन अपने माथे पर बंदर टोपी लगाये होने की वजह से आसानी से पहचाने जाते थे।

दरअसल रांची के ठंड में उन्हें तकलीफ होती थी। बाद में खास तौर पर सरकारी उपेक्षा के साथ साथ

नक्सली हिंसा की वजह से यह पर्यटन उद्योग मरता चला गया।

बेतला और नेतरहाट के जंगल जो पश्चिम बंगाल के पर्यटकों से गुलजार रहते थे, वे सुनसान होते चले गये।

उस दौरान लोगों को खासकर इन पर्यटन क्षेत्रों के लोगों को इसका नुकसान तुरंत समझ में नहीं आया था।

बाद में जब पर्यटकों ने पूरी तरह आना बंद कर दिया तब जाकर नुकसान की बात समझ में आयी।

लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अब नये सिरे से लोग स्थिति बेहतर होने की

जानकारी पाकर फिर से आने लगे हैं।

इस क्रम को और विकसित करने की जरूरत है।

झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कल ही इस बारे में विस्तार से जानकारी दी है।

उन्होंने अपनी बात पतरातू के लेक रिसोर्ट के लोकार्पण के मौके पर कही थी।

श्री दास का यह कहना सही है कि पर्यटन उद्योग के माध्यम से भी राज्य को

आर्थिक समृद्धि उपलब्ध करायी जा सकती है। देश के कई राज्य ऐसे हैं,

जो पूरी तरह पर्यटन उद्योग के भरोसे ही कमाई करते हैं।

वहां के लोगों के रोजगार का अन्यतम प्रमुख साधन भी पर्यटन उद्योग से जुड़ा हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि पर्यटन स्थल राज्य की आर्थिक व्यवस्था को सुदृढ कर सकती है,

रोजगार दे सकती है। इसको आधार मानकर, प्राथमिकता देते हुए सरकार कार्य कर रही है।

उन सभी पर्यटन स्थलों को विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है जो

अब तक अनछुए थे। यहां के सांस्कृतिक पर्यटक स्थल को विकसित करने का कार्य शुरू हो चुका है।

इटखोरी में दुनिया का सबसे बड़ा बौद्ध स्तूप का निर्माण हो रहा है।

पारसनाथ जो जैन धमार्लंबियों का तीर्थ स्थल है वहां तक हमने रेल लाइन से जोड़ने की अनुमति मिल चुकी है।

मां छिन्नमस्तिका रजरप्पा में लक्ष्मण झूला, फोरलेन सड़क का निर्माण होगा।

दुमका स्थित मसानजोर डैम, गुमला स्थित अंजनी धाम हनुमान जी की

जन्म स्थली को पर्यटकों के लिए विकसित करने की योजना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड आने वाले पर्यटकों को सुविधा उपलब्ध कराने हेतु हम प्रतिबद्ध हैं।

पिछले कुछ वर्षों में झारखंड के पास कुछ होने के बाद भी

पर्यटन के क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहा था।

लेकिन 2014 के बाद से पर्यटन के क्षेत्र में विशेष ध्यान दिया गया,

जिससे यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है

हम इसे और आगे बढ़ाएंगे और उसी अनुरूप पर्यटन स्थलों को भी विकसित किया जा रहा है।

विदेशी पर्यटक भी यहां आएं। पतरातू आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर का

पर्यटक स्थल के रूप में जाना जाएगा। रामगढ़ की पहचान सिर्फ कोयला से

नहीं बल्कि पर्यटन स्थल के रूप में भी होगी।

अगर झारखंड के हरेक पर्यटन स्थल के बारे में इंटरनेट पर ज्यादा जानकारी उपलब्ध हो

और वहां आधारभूत संरचनाएं विकसित कर दी जाएं तो लोग अपने अवकाश के दिनों में नये नये

जगहों पर घूमने की तलाश में निश्चित तौर पर झारखंड में भी आने लगेंगे।

यह स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का एक नया साधन बनेगा।

जो स्थल पहले से ही धार्मिक अथवा दर्शनीय पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित हो चुके हैं,

वहां के रोजगार के मॉडल को हम उदाहरण मान सकते हैं कि

इनकी बदौलत कैसे स्थानीय लोगों को अतिरिक्त रोजगार उपलब्ध होता है।

इस बात को भी अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि जब पर्यटन घूमने आते हैं तो

वर्तमान जीवन शैली के अनुसार वे बेहतर सुविधाओं की तरफ ज्यादा आकृष्ट होते हैं।

इसलिए झारखंड में पर्यटकों की संख्या के आधार पर तमाम पर्यटन स्थलों को

बेहतर तरीके से सुविधाओं के जोड़ने का काम किया जाना चाहिए।

भले ही यह मौसमी रोजगार का साधन हो लेकिन यह कमसे कम दूरस्थ इलाकों को

हर साल के लिए एक बेहतर कमाई का नया जरिया उपलब्ध करायेगा।

इसके लिए हम उत्तराखंड के उन इलाकों पर गौर कर सकते हैं,

जो चार धाम की यात्रा से जुड़े हुए हैं।

चार धाम की यात्रा भी एक नियत समय तक के लिए होती है।

इसी दौरान स्थानीय लोगों को इतना पैसा मिल जाता है कि वे सालों भर का गुजारा कर लेते हैं।

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