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दांतों के क्षय होने की समस्या से अब स्थायी तौर पर मुक्ति मिलेगी




  • चीनी वैज्ञानिकों ने एनामेल सुधारने का स्थायी जेल बनाया
  • परीक्षण सफल हुआ तो दुनिया भर के मरीजों को लाभ
  • अनेक खनिजों का भंडार होता है यह ऊपरी आवरण
  • दांत का एनामेल शरीर का सबसे मजबूत तंतु

प्रतिनिधि

नयीदिल्लीः दांतों के क्षय होने की समस्या का अब स्थायी समाधान सामने आने वाला है।

चीन के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा जेल तैयार किया है जो दांतों के एनामेल को सुधार सकता है।

दरअसल दांतों के सड़ने और खराब होने की प्रक्रिया इसी एनामेल के नष्ट होने की वजह से ही होती है।

अनेक बार दांतों को चमकीला बनाने के लिए किये गये प्रयास में भी दांतों के यह एनामेल घिस जाते हैं।

उसके बाद दांतों का क्षरण प्रारंभ हो जाता है।


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अब दुनिया भर के दांतों के मरीज इस सूचना से संतुष्ट हो सकते हैं कि इस गड़बड़ी को स्थायी तौर पर दूर करने का उपचार तैयार हो चुका है।

सिर्फ अन्य परिस्थितियों में इसका परीक्षण होना अभी शेष है।

चीन में एक पुरानी सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर यह काम करीब दो वर्ष पहले प्रारंभ किया गया था।

वर्ष 2016 का आंकड़ा यह बताता था कि दुनिया भर में करीब 24 करोड़ लोग इस किस्म की दांतों की परेशानी से जूझ रहे हैं।

यह भी संकेत दिया गया था कि गलत खान-पान की वजह से दांतों की इस किस्म की परेशानियों से जूझने वाले मरीजों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है।

दुनिया भर के करीब 48 करोड़ बच्चे अपने दूध के दांत टूटने के दौरान ही दांतों के क्षय होने की बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं।

इसकी खास वजह भी गलत खान पान की आदत ही है।

इस शोध के बारे में एक वैज्ञानिक प्रबंध में विस्तृत जानकारी दी गयी है।

इसमें प्रारंभ में ही बताया गया है कि इंसानी शरीर के अलावा अधिकांश सचल प्राणियों में दांत ही उनके शरीर का सबसे कठोर टिश्यू होता है।

इनमें क्षऱण के मुख्य कारण अम्लीय भोजन और ठंडे पेय हैं।

यह दोनों ही दांतों के एनामेल को नुकसान पहुंचाते हैं।

दांतों के क्षय होने पर पूरी जानकारी लेने के बाद बनाया यौगिक

दांतों के बारे में इतना कुछ जान लेने के आधार पर ही चीनी वैज्ञानिकों ने वह यौगिक तैयार किया है

जो एनामेल के क्षरण को स्थायी तौर पर समाप्त कर सकता है।

परीक्षण के दौरान जब इस यौगिक को 2.5 माइक्रोमीटर की मोटाई पर लगाया गया

तो वहां के दांतों में प्राकृतिक एनामेल अगले 48 घंटे के भीतर यथावत तैयार हो गया।

इस बारे में शोध कर्ताओं ने बताया है कि इस यौगिक को तैयार करने में

दरअसल इसे मानव तंतु के जैसा ही आचरण प्रदान किया गया है।

इसी वजह से वे दांतों के ऊपर लगाये जाने की स्थिति में नये सिरे से तंतुओं का निर्माण कर दांतों के क्षरण को रोक देते हैं।

वैसे शोधकर्ताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रतिकूल परिस्थितियों में अभी इस जेल जैसे यौगिक का परीक्षण नहीं किया गया है।

इस शोध से जुड़े मरीज टैंग ने बताया कि वह अपनी दांत की परेशानी को लेकर दांत के डाक्टर के पास गये थे।

जहां यह बताया गया कि उसके एक दांत के भीतर क्रैक है।

डेंटिंस्ट ने साफ कर दिया कि इसे सुधारा नहीं जा सकता।

डाक्टर की सलाह पर वह इस परीक्षण का हिस्सा बनने के लिए तैयार हो गये थे।

उनके ऊपर किया गया प्रयोग सफल रहा।


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अब वैज्ञानिक दांतों के क्षरण के अलग अलग कारणों के आधार पर इस यौगिक को आजमाना चाहते हैं।

यह स्पष्ट है कि दांतों में इस किस्म की गड़बड़ी के अनेक कारण होते हैं और उन गड़बड़ियों में भी विविधता होती है।

इसलिए हर किसी में यह यौगिक एक तरीके से का कर पाता है अथवा नहीं, इसकी जांच चल रही है।

एनामेल की जटिल संरचना के गहन अध्ययन के बाद किया प्रयोग

दरअसल एनामेल की संरचना काफी जटिल होती है।




यह इंसानी शरीर का सबसे कठोर तंतु होने के बाद भी अनेक किस्म के खनिजों का भंडार भी होता है।

औसतन दो मिलीमीटर की मोटाई वाले इस एनामेल पर अगर यौगिक की मदद से

स्थायी सुधार करना संभव हो पाया तो दांतों की बीमारी का एक बड़ा हिस्सा इससे समाप्त हो सकता है।

इस प्रयोग के पूरी तरह सफल होने के बाद दांतों के क्षरण को समाप्त करने के लिए फीलिंग का तरीका भी समाप्त किया जा सकता है।

वर्तमान में एनामेल घिस जाने की वजह से उस क्षेत्र की फीलिंग की जाती है

ताकि अचानक ठंडी अथवा गर्म चीज के सम्पर्क मे आने पर दांतों में झनझनाहट नहीं हो और दर्द से राहत मिले।

नया यौगिक इस क्षतिग्रस्त इलाकों के नये सिरे से स्थायी तौर पर ठीक कर सकता है।

अभी इसका क्लीनिकल परीक्षण चल रहा है।

जिसके सफल होने के बाद ही यह विधि पूरी दुनिया में आजमायी जा सकेगी।


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