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सूख रहे हैं खेत मे ही टमाटर इस संकट में कोई खरीदार नहीं

सिल्लीः सूख रहे हैं किसानों के टमाटर। खेतों में तैयार टमाटरों का फिलहाल इस कोरोना

संकट में कोई खरीददार भी नहीं है। कोविड 19 को लेकर लगाये गये पाबन्दियों के बाद

सिल्ली एवं आसपास के किसानों की हालत खराब हो गयी है सभी किसान किसी तरह

आजीविका बचाने में लगे है। लोकडाउन के कारण उनके सब्जियों के लिए व्यापारी व

खरीददार नहीं मिल रहे हैं उनकी सब्जियां बन्दी व पाबंदियों के कारण बाजार तक नहीं

पहुंच रही है। सब्जियों के मोल नहीं मिलने के कारण किसान अपनी सब्जियां तोड़ने के

बजाय खेतों में ही छोड़ना मुनासिब समझ रहे है। सिल्ली में एक ओर रांची टमाटर का

थोक भाव इतना कम ही गया कई किसानों ने टमाटर खेतों में ही छोड़ दिया है। छाता टांड

के मोहन कोइरी बताते है कि मंगलवार को टमाटर का थोक मूल्य पांच रुपये तक गिर

गया।तोड़ने का खर्च अलग से. यही हाल, करेला, भिंडी, बींस, समेत अन्य सब्जियों का है।

सरकार की ओर से केवल एक बजे तक ही बाजार लग सकता है। इसलिये व्यापारी भी

रांची ले जाकर दूसरी बेला में सब्जी बेच नही सकते इसलिए खरीदार कम है।

सूख रहे हैं टमाटर क्योंकि बाहर से भी व्यापारी नहीं आ रहे

सिल्ली के बिजय कोइरी ने बताया कि पहले रांची से अनगिनत व्यापारी आते थे लेकिन

दोपहर बाद बाजार बन्द रहने के कारण अभी आठ दस व्यापारी भी नहीं आते हैं। केवल

एक बजे तक ही बाजार खुला रहता है इसलिए लोकल बाजार में सबेरे दो घण्टे तक ही

सब्जियाँ बेचकर किसान अपनी आजीविका चला रहे है। किसानों ने सरकार से आग्रह

किया है कि किसानों की दयनीय हालात देखते हुए किसानों के हित में कोई फैसला लें। यह

हाल सिर्फ सिल्ली का ही नहीं है। रांची के आस पास के इलाकों में जो भी कृषि प्रधान

इलाके हैं, वहां के किसानों की लगभग एक जैसी स्थिति है।

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