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कोरोना से लड़ने के लिए अब फिर से मोबाइल पर जासूसी

  • फिर पिगासूस साफ्टवेयर का नाम आया

  • अमेरिका में भी एक जैसा ही आंकड़ा एकत्रित

  • कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने की योजना

  • बीमारी छिपाकर घूम रहे लोगों की पहचान होगी

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः कोरोना से लड़ने के लिए फिर से मोबाइल जासूसी को काम में लाया जा रहा है।

इजरायल ने घोषित तौर पर यह काम प्रारंभ कर दिया है। दूसरी तरफ अमेरिका में भी इसी

तकनीक को आजमाने की तैयारियां हो रही है। दरअसल विदेशों से संक्रमण लेकर देश के

अंदर आये लोगों के माध्यम से जो संक्रमण फैला है, उसकी वजह से अब ऐसा करना

जरूरी समझा गया है। वैसे इस मोबाइल जासूसी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अनेक

सरकारें पहले से ही लोगों की निजी जिंदगी में पहले से ही दखल देती आयी हैं।

इजरायल के रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की है कि वह लोगों के मोबाइल फोन की गतिविधियों

की मदद से कोरोना संक्रमित रोगियों की पहचान करने की कोशिश प्रारंभ कर चुकी है।

इसके लिए संभवतः उसी जासूसी साफ्टवेयर पिगासूस का प्रयोग हो रहा है, जिसे लेकर

पहले भी भारत में बवाल मचा था। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यह आरोप लगता है कि सऊदी

पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या में भी इसी मोबाइल जासूसी का तरीका आजमाया गया

था।

इजरायल के रक्षा मंत्री नाफटाली बेनेट ने कहा कि देश में एक कोरोना मीटर बनाया गया

है। इसे कैबिनेट की स्वीकृति प्राप्त है। इसके तहत होने वाली छानबीन को रोकने का

अधिकार सिर्फ अटर्नी जनरल को दिया गया है। कोरोना से देश को और अधिक संक्रमित

होने के बचाने के लिए हर दिन पांच हजार लोगों की जांच की जा रही है। लेकिन अनेक

लोग अब भी संभवतः संक्रमित होने के बाद भी बीमारी की पहचान नहीं होने की वजह से

घूम रहे हैं और दूसरों तक इस संक्रमण को फैला भी रहे हैं।

कोरोना से लड़ने के लिए संक्रमितों की पहचान पहले

अब जासूसी साफ्टवेयर के इस्तेमाल से उनलोगों की पहचान जल्दी हो पायेगी, जिन्हें

प्राथमिकता के आधार पर जांचना जरूरी है। जांच में संक्रमण पाये जाने की स्थिति में ऐसे

लोगों को तुरंत ही दूसरों से अलग थलग भी कर दिया जाएगा। इसका विरोध होने के बाद

भी वहां की सरकार कोरोना से देश को बचाने के लिए इसके प्रति अड़ी हुई है। अभी तक

इजरायल में 15 लोगों की मौत हुई है और 4347 लोग इससे पीड़ित पाये गये हैं। अब

तमाम मोबाइल इस्तेमाल करने वालों के आंकडे एकत्रित किये जा रहे हैं। खास तौर पर जो

विदेशों से लौटे हैं, उनके तथा उनके संपर्क में आने वालों की गतिविधियों पर नजर रखी जा

रही है। खुद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी खुद को कोरोना से पीड़ित होने की वजह

से अलग थलग कर रखा है। दरअसल उनके एक सहायक के कोरोना पॉजिटिव होने की

वजह से उन्होंने ऐसा फैसला लिया है। कोरोना से लड़ने की तैयारियों के बीच वहां कई

अन्य प्रमुख लोग कोरोना पॉजिटिव पाये गये हैं।  जिस तकनीक से कोरोना के मरीजों की

जांच की जा रही है, उसमें कोरोना संक्रमि इलाकों और लोगों के संपर्क में आने वालों की

नजरदारी हो रही है। दूसरी तरफ अमेरिका सहित कई देश इस इजरायली कंपनी

एनएसओ के जासूसी साफ्टवेयर की गतिविधियों की लगातार शिकायत कर रहे हैं।

अमेरिका में भी फैसला पर निजता का सवाल भी

दूसरी तरफ कोरोना का आतंक देश में लगातार बढ़ते जाने की वजह से अब अमेरिका भी

मोबाइल के जरिए कोरोना पीड़ितों का पता लगाने का काम प्रारंभ करने जा रहा है। जिन

इलाकों में कोरोना फैला है, वहां से कितने लोग कहां गये हैं, उनकी जांच की जाएगी। इसके

जरिए यह परखा जाएगा कि इन लोगों की वजह से नये इलाकों तक कोरोना का संक्रमण

पहुंचा है अथवा नहीं। इसके साथ भीड़ एकत्रित होने वाले आंकड़ों को भी जुटाया जा रहा है।

अमेरिका के पांच सौ इलाके में इसे प्रारंभिक तौर पर आजमाया जा रहा है। वैसे सरकार ने

स्पष्ट कर दिया है कि इस माध्यम से प्राप्त आंकड़ों को गोपनीय ही रखा जाएगा। सिर्फ

कोरोना अन्य इलाकों तक नहीं फैले, इसके लिए यह व्यवस्था आजमायी जा रही है।

कोरोना प्रभावित इलाकों से अन्यत्र गये लोगों के अलावा कोरोना संक्रमित इलाकों में

नियमित जा रहे लोगों की गतिविधियों को इसके जरिए देखा जा रहा है। वैसे चर्चा यह भी

है कि अमेरिकी प्रशासन ने इसके लिए फेसबुक से भी मदद मांगी थी। अपुष्ट जानकारी के

मुताबिक फेसबुक के प्रमुख मार्क जुकरवर्ग ने इसे निजता का उल्लंघन बताते हुए इसमें

सहयोग करने से इंकार कर दिया है। इसलिए समझा जा रहा है कि लोगों के मोबाइल पर

काम करने वाले अन्य एप की मदद से आंकड़े जुटाये जा रहे हैं।


 

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