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टीएमसी के संविधान में होगा फेरबदल एक कार्यकारी अध्यक्ष होगा




  • राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः टीएमसी के संविधान में परिवर्तन किया जाने वाला है। इस संशोधन के तहत अब पार्टी में एक अखिल भारतीय कार्यकारी अध्यक्ष भी होगा, जो अध्यक्ष की व्यस्तता के बीच पार्टी के दूसरे कार्यों का संचालन कर सकेगा। औपचारिक तौर पर कोई एलान नहीं होने के बाद भी ऐसा समझा जा रहा है कि इस पद पर शायद पार्टी के वर्तमान महासचिव और ममता बनर्जी के भांजे अभिषेक बनर्जी को बैठाया जाएगा।




ममता बनर्जी को राष्ट्रीय राजनीति में अधिक समय देने के लिए ही यह फेरबदल टीएमसी के संविधान में किया जा रहा है, यह लगभग स्पष्ट हो चला है। यानी अपनी घोषणा के मुताबिक ममता बनर्जी टीएमसी के अन्य राज्यों की गतिविधियों पर अधिक ध्यान देंगी और राज्य में पार्टी संगठन के रोजाना के काम काज की जिम्मेदारी पार्टी के नये कार्यकारी अध्यक्ष की होगी।

इसके साथ ही यह सूचना भी मिली है कि टीएमसी अब एक राष्ट्रीय परिषद का भी गठन करने जा रही है। इसमें दो हजार सदस्य होंगे। इस कमेटी में निर्वाचित और मनोनीत दोनों ही किस्म के सदस्य होंगे। यह कमेटी ही पार्टी की अंतिम फैसला लेने वाली कमेटी होगी। पार्टी संविधान में बदलाव के बाद बनने वाले कार्यकारी अध्यक्ष का चयन भी यही कमेटी करेगी, जिनका कार्यकाल पांच वर्षों का होगा।




टीएमसी के संविधान में अध्यक्ष का कार्यकाल तय नहीं

संविधान संशोधन के तहत पार्टी में अब छह महासचिव बहाल करने की बात चल रही है। यह सभी छह लोग हर रोज के काम काज और खास कर संगठन के विस्तार पर नियमित ध्यान देंगे। सूचना है कि अब पार्टी के सदस्यता शूल्क को भी बढ़ाने की बात चल रही है।

पार्टी के अंदर से यह बात सामने आयी है कि वर्तमान में पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी पर काम का जो दबाव है, उससे संगठन का दबाव कम करना उनकी राष्ट्रीय राजनीति में अधिक सक्रिय होने के लिए मददगार होगा। वैसे संविधान संशोधन की चर्चा के बीच यह स्पष्ट हो रहा है कि फिलहाल ममता बनर्जी ही पार्टी की अध्यक्ष बनी रहेंगी क्योंकि अध्यक्ष के काम काज की अवधि पर कोई चर्चा नहीं हुई है।

साथ ही पार्टी अध्यक्ष को पद से हटाने का कोई प्रावधान भी नहीं रखा गया है। इस बीच यह स्पष्ट हो गया है कि प्रशांत किशोर का संगठन आईपैक अगले पांच साल के लिए ममता बनर्जी के लिए काम करता रहेगा। साथ ही महिलाओं की भागीदारी और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के प्रतिनिधित्व को भी स्पष्ट तौर पर रेखांकित किया जाएगा।



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