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भाजपा से सीधी लड़ाई के बाद टीएमसी अन्य राज्यों में जाएगी

  • तृणमूल कांग्रेस अन्य राज्यों में अपना विस्तार करेगी

  • पार्टी में महासचिव बनाये गये अभिषेक बनर्जी

  • महिला और युवा मोर्चा के नये पदाधिकारी बने

  • भाजपा को घर में घुसकर चुनौती देने की तैयारी

राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः भाजपा से सीधी लड़ाई और यह लड़ाई दिनों दिन कड़वी होने के बाद तृणमूल ने

साफ कर दिया है कि अब वह अपना क्षेत्र विस्तार करेगी। पार्टी संगठन में फेरबदल करने

के साथ साथ इस चुनाव में भाजपा के निशाने पर रहे अपने भतीजे और सांसद अभिषेक

बनर्जी को पार्टी का महासचिव बनाया गया है। इससे स्पष्ट है कि पार्टी में अभिषेक का कद

और बड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि लोकसभा के चुनाव तीन वर्ष के बाद होने वाले हैं।

इस बीच पार्टी उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात में अपने संगठन का विस्तार करेगी। इस

घोषणा से भी साफ हो गया है कि अब टीएमसी ने भाजपा को उसके ही मांद में घुसकर

चुनौती देने का मन बनाया है। पार्टी संगठन में हुए फेरबदल के तहत सांसद काकोली घोष

दस्तीदार को पार्टी की महिला शाखा का अध्यक्ष तथा अभिनेत्री सायोनी घोष को युवा

मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है। सायोनी इस बार के विधानसभा चुनाव में पराजित हो

गयी थी।

भाजपा से सीधी लड़ाई के बीच एक व्यक्ति एक पद का एलान

अभिषेक बनर्जी के राजनीतिक प्रोमोशन की वजह से इस चुनाव में ममता की तरफ से

चुनावी गतिविधियों के संचालन में उनकी भूमिका है। खास कर प्रशांत किशोर के साथ

तालमेल बैठाकर काम करना भी उनकी जिम्मेदारी रही है। चुनाव के दौरान भाजपा की

तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित तमाम बड़े नेताओं ने अभिषेक पर ही अनेक किस्म

के आरोप लगाये थे। जिनके जबाव में अभिषेक बनर्जी ने कहा कि अगर वह दोषी होगा तो

वह अपनी गला कटवा लेगा। अब प्रचंड जीत के बाद लगातार केंद्र सरकार की तरफ से

अड़चन पैदा किये जाने की वजह से टीएमसी अन्य राज्यो में भी अपने विस्तार का एलान

कर चुकी है। समझा जाता है कि इन राज्यों में भाजपा की कमजोरी और अन्य राजनीतिक

दलों की निष्क्रियता से उपजी राजनीतिक शून्यता का तृणमूल कांग्रेस लाभ उठाना चाहती

है। कुछ लोगों का कहना है कि प्रशांत किशोर के माध्यम से भी पार्टी को इस बारे में बेहतर

संकेत मिले हैं। दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में पार्टी छोड़कर भाजपा में गये अनेक नेताओं

के दोबारा पार्टी में वापस लौटने के अनुरोध को भी राजनीतिक तौर पर गंभीर माना जा रहा

है। कई नेता सार्वजनिक तौर पर इसका एलान कर चुके हैं लेकिन ममता बनर्जी ने अब

तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया है। दूसरी तरफ उत्तर बंगाल, जहां भाजपा का चुनावी

परिणाम बेहतर रहा है, वहां भी लोग भाजपा छोड़कर फिर से तृणमूल में शामिल हो रहे हैं।

इनमें अनेक ऐसे इलाके भी हैं, जहां से इस बार भाजपा का विधायक चुनाव जीत गया है।

अभिषेक पूरे चुनाव में भाजपा के निशाने पर रहे हैं

अभिषेक बनर्जी के बारे में प्रधानमंत्री और अमित शाह द्वारा तोलाबाज भाइपो यानी

रंगदारी वसूलने वाला भतीजा कहे जाने के बाद यह फैसला पार्टी में उनके बढ़ते कद की

पहचान है। अभिषेक इससे पहले युवा मोर्चा के अध्यक्ष हुआ करते थे। इस बारे में पार्टी के

वरिष्ठ नेता पार्थो चटर्जी ने कहा एक व्यक्ति एक पद की नीति के तहत युवा मोर्चा की

जिम्मेदारी दूसरे को सौंपी गयी है। पार्टी के संसदीय दल के नेताओं के तौर पर सुदीप

बंदोपाध्याय और डेरेक ओ ब्रायन ही काम करते रहेंगे।

पार्टी ने आज की अपनी बैठक में एक फैसला यह भी लिया है कि अब मंत्रियों की गाड़ियों

में लाल बत्ती नहीं लगेगी। साथ ही इस बैठक में आने वाले दिनों में होने वाले उपचुनावों

पर भी चर्चा होने बात बाहर आयी है। इसमें भवानीपुर की सीट भी है, जहां के खुद ममता

बनर्जी चुनाव लड़ने जा रही है क्योंकि उनके लिए शोभनदेव ने इस सीट से त्यागपत्र दे

दिया है। पार्टी के स्तर पर अब भाजपा द्वारा लगातार उठाये जा रहे हिंसा का मामलों में

भी रणनीति बनाकर काम करने की बात हुई है। समझा जाता है कि भाजपा के इस प्रचार

के खिलाफ भी तृणमूल जल्द ही कोई जवाबी कार्रवाई भी करेगी। इस बीच कई ग्रामीण

इलाकों में गैर राजनीतिक संगठन के बैनर तले भाजपा के लिए काम करने वाले लोगों के

सामाजिक वहिष्कार का मुद्दा भी चर्चा में आया है। टीएमसी नेताओं का मानना है कि

अपने आप को चर्चा में बनाये रखने के लिए भाजपा के लोग ही ऐसी हरकत कर रहे हैं।

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