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सरकारी योजनाओं से वंचित जंगलों पहाड़ों में बसा तिरला गांव

  • तिरला को बीडीओ ने मॉडल गांव बनाने की है ठानी

  •  गांव में रोजगार की अपार संभावनाएं – कुमार अभिनव स्वरूप

  •  सरकार की विशेष पहल से गांव को विकसित करने की सोच

  •  बीडीओ ने कहा एक करोड़ से अधिक खर्च करेगी सरकार

  •  सब्जियों, अनाजों व फलों की प्रदर्शनी अधिकारी खुश

राष्ट्रीय खबर

ओरमांझीः सरकारी योजनाओं का लाभ अब तक तो राजधानी रांची से 45 किलो मीटर दूर

ओरमांझी प्रखंड के हिन्दीबिलि पंचायत के सुदरवर्ती क्षेत्र के तिरला गांव जो जंगलों व

पहाड़ो पर बसा है। आजादी के 70 साल बीत जाने के बाद भी गांव के लोग सरकारी

योजनाओं से वंचित हैं जिसको देखते हुए गांव को सरकार विशेष सरकारी योजनाएं

धरातल पर उतारने के लिए बड़ी जोर शोर से काम करा रही है। ताकि लोग आर्थिक

शैक्षणिक सामाजिक दृष्टि को ऊंचा उठाने की दिशा में प्रखंड विकास पदाधिकारी कुमार

अभिनव स्वरूप 15 दिनों से गांव में कैंप लगाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। गांव समृद्ध

व विकास की ओर आग्रसर हो गांव के लोगों को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। कई तरह

के प्रशिक्षण सरकार के द्वारा ग्रामीणों को दी जा रही है।बुधवार को कृषि प्रोद्योगिकी

प्रबंधन अभियान के तहत जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

जहां पर गांव के सैकड़ों ग्रामीण शामिल हुए और कृषि प्रदर्शनी दिखाएं। पांच दिनों के

प्रशिक्षण के उपरांत प्रशिक्षण प्राप्त किए 35 लोगों को प्रमाण पत्र दिया गया और सरकार

की लाभकारी योजनाओं की जानकारी दी गयी। गांव के लोगों को गांव में ही रोजगार के

साधन उपलब्ध कराने के लिए कृषि कार्य, मधुमक्खी पालन, के हुनर बताए गए वही

ग्रामीणों ने गांव की समस्याएं बताई और कहा कि आज भी लोग डोभा के पानी पीने को

विवश हैं।

सरकारी योजनाओं की प्राथमिकताएं भी उपलब्ध नहीं गांव में

ना ही गांव में कोई चिकित्सालय हैं ना ही कोई स्कूल है गांव तक पहुंचने के लिए सड़के

काफी जर्जर है। गांव वालों को प्रधानमंत्री आवास योजना सभी लाभ नहीं मिला है।

विधवावस्था पेंशन से भी लोग वंचित है। ग्रामीणों की स्थिति दयनीय है कमाने खाने के

लिए बाहर जाना पड़ता है। गांव के वार्ड सदस्य ने बताया कि नशा पान भी गांव की एक

बड़ी समस्या है, जिसका रोक लगनी चाहिए। मनरेगा योजना से सभी को जोड़कर रोजगार

देने की जरूरत है। प्रखंड विकास पदाधिकारी ने गांव को गोद लिया है। इस लिये इस गांव

में विकास की धारा बहेगी। मौके पर बीडीओ ने कहा कि गांव के विकास के लिए लोगों को

जागरूक होना होगा एवं सरकार द्वारा योजनाओं को लेने के लिए आगे आने की

आवश्यकता है। जीवन स्तर में परिवर्तन लाकर ही गांव का विकास संभव है। उन्होंने कहा

कि बिचौलियों से बचें सरकारी योजनाओं में किसी को एक पैसा देने की जरूरत नहीं है।

गांव में ही कृषि कार्य कर लाखों रुपए की आमदनी कर सकते हैं। बाहर रोजगार के लिए

जाना बंद करें अपने छोटे- छोटे बच्चों को बेहतर शिक्षा दें। गांव के विकास के लिए ग्रामीण

हफ्ता में 2 दिन श्रमदान करें। वही कृषि विभाग के उप परियोजना निर्देशक संजय कुमार

सिंह ने बताया कि गांव में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं लोग कृषि कार्य कर लाखों रुपए

कमा सकते हैं।

जरूरत पड़ी तो कृषि के लिए अलग से प्रशिक्षण देंगे 

गांव में किसी तरह की कृषि संबंधी प्रशिक्षण की जरूरत हो तो हम उच्च स्तरीय प्रशिक्षण

भी उपलब्ध कराएंगे। गांव में ही रोजगार के साधन मुहैया कराई जाएगी। कृषि कार्य के

लिए सरकार विशेष सुविधाएं देती है। गांव में उत्पादन बढ़ाकर शहरों तक सब्जियां भेजी

जा सकती है। गांव के सभी लोगों को सिंचाई के लिए नलकूप की व्यवस्था की जाएगी एवं

गांव के लोगों को प्रशिक्षण के लिए दिल्ली भी भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि कोरोना काल

में लोग खाने के लिए परेशान थे जिसे किसान द्वारा उपजाए गये अनाज ने उन्हें भूख

मिटाने का काम किया।

मौके पर मुख्य रूप से ओरमांझी प्रखंड के बीटीएम मुनी कुजूर, जेएसपीएल के प्रथम

कोऑर्डिनेटर मुकेश कुमार सिंह रोजगार सेवक अक्षय कुमार सिंह कृषक मित्र जगलाल

बेदिया, गोपाल बेदिया रमेश बेदिया संजय बेदिया जयगोविंद बेतिया, प्रेमनाथ बेदिया,

महेंद्र गंजू सुरेश बेदिया सहित सैकड़ों की संख्या में महिलाएं एवं पुरुष उपस्थित थे


 

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