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बाघ और बकरी एक घाट पर बाढ़ से ऐसा कर दिखाया

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटीः बाघ और बकरी एक साथ नहीं असली कहावत थी बाघ और बकरी एक घाट पर।

किसी जमींदार के आतंक के नाम पर यह कहावत प्रचलित थी जिसमें कहा जाता था कि

फलांने की रौब की वजह से बाघ और बकरी एक ही घाट पर पानी पिया करते थे। लेकिन

प्रकृति की अजीब संयोग देखिये। इस बार फिर से बाघ और बकरी एक साथ ही हो गये।

कहावत को सही साबित होते देखिये इस वीडियो में

लेकिन वे किसी घाट पर एक साथ पानी पीते नजर नहीं आये बल्कि बकरी के बाड़े में बाघ

और बकरी एक साथ रहे और उसने इस दौरान बकरियों पर हमला भी नहीं किया। गांव के

लोगों को बकरियों की हरकतों से रात को ही यह बात समझ में आ गयी थी कि कुछ न कुछ

तो गड़बड़ी है। लेकिन वे यह अंदाजा नहीं लगा पाये थे कि बकरियां जिस वजह से परेशान

होकर चिल्ला रही हैं, वह दरअसल बाघ है। असम में बाढ़ के भीषण प्रकोप में फिर से यह

वाकया देखने को मिला है।

बाघ और बकरी उसी बाड़े में एक साथ ही रात भर रहे

जंगल में बाढ़ का पानी भर आने की वजह से

बाघ को अपनी जान बचाने की पड़ी थी। इसी

जद्दोजहद में वह चुपके से गांव के अंदर आ गया

था। वहां बाढ़ का पानी नहीं होन के बाद भी

बारिश से बचने की चुनौती थी। इसलिए

सुरक्षित इलाका समझकर वह चुपके से बकरी

के बाड़े में घुस गया था। वहां अचानक बाघ के

चले आने से बकरियां बेचैन हो गयी थी। इससे लोग समझ गये थे कि बकरियों के बाड़े में

कुछ तो गड़बड़ है। जब सुबह हुई तो लोगों ने सावधानी से बकरी के बाड़े का जायजा लिया।

ध्यान से देखने पर उन्हे शिकारी और शिकार एक साथ ही नजर आ गये। ग्रामीण अपने

अनुभव से समझदार थे। इसलिए उनलोगों ने जंगली जानवर को परेशान करने का कोई

काम ही नहीं किया। अपना समय गुजराने के बाद बाघ चुपचाप वहां से निकल गया


 

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