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गुदगुदी करने के भी एक नहीं अनेक फायदे हैं







  • उम्र के असर को भी कम करती है गुदगुदी

  • कान की पीछे की नस पर हुआ प्रयोग

  • प्रयोग के फायदे खुली आंखों से नजर आये

  • शोध में शामिल सभी लोग 55 साल से अधिक के


प्रतिनिधि

नयीदिल्लीः गुदगुदी करने पर हंसी अवश्य आती है लेकिन शरीर में इससे बेचैनी भी होती है।

पहली बार वैज्ञानिकों ने यह खोजा है कि शरीर में गुदगुदी के खास फायदे हैं।

लीड्स विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने इस पर शोध किया है।

इस शोध के बाद वे इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि इससे शरीर में कई किस्म के फायदे नजर आने लगते हैं। वैज्ञानिकों ने नियमित तौर पर इस विधि को आजमाया था।

दो सप्ताह के बाद यह पाया गया कि इससे इंसान का शरीर पहले से बेहतर अवस्था में था।

इसकी दिनचर्या और मूड बेहतर होने के साथ साथ उनकी नींद भी अच्छी होने लगी थी।

यानी गुदगुदी से इंसान के मनोविज्ञान पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।


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शोध के क्रम में वैज्ञानिकों ने पाया है कि कान के पीछे एक खास इलाके पर

गुदगुदी करने से उम्र संबंधित समस्याएं कम होती हैं। इससे मानसिक तौर पर बेचैन लोगों को राहत भी मिलती है।

55 वर्ष से अधिक आयु के लोगों पर यह अधिक कारगर तरीका साबित हुआ है।

वैज्ञानिकों ने शोध के दौरान हल्के बिजली के करंट के जरिए कान के पीछे यह गुदगुदी पैदा की थी।

लगातार जब दो सप्ताह तक इस विधि को आजमाया गया तो उसके नतीजे साफ साफ नजर आने लगे थे।

वैज्ञानिकों ने यह स्पष्ट किया है कि कान की पीछे वाले हिस्से में नसों का एक बड़ा जाल होता है।

जब हल्के बिजली के करंट से वहां गुदगुदी पैदा की जाती है तो इन तमाम नसों में खून का प्रवाह ठीक होने लगता है।

दो सप्ताह के बाद यह सारी व्यवस्था पटरी पर लौटने लगती है।

जिस वजह से प्रयोग से लाभ खुली आंखों से नजर आने लगते हैं।

गुदगुदी के फायदों के बारे में वैज्ञानिक शोध पत्रिका में जानकारी




एक वैज्ञानिक शोध पत्रिका में इसके बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी है।

जिसमें बताया गया है कि नियमित तौर पर यह विधि आजमाने से शरीर का आंतरिक नियंत्रण बेहतर हो जाता है।

इसके लिए इंसान के कान के पीछे का हिस्सा अधिक बेहतर है।

वैसे याद रहे कि बचपन में हमलोगों भी कान उमेठे जाने से परेशान रहते थे।

यह सजा के तौर पर हमें घर अथवा स्कूलों में भी मिला करती थी।

अब कान उमेठे जाने के वैज्ञानिक कारणों का भी पता पहली बार चल पाया है।

इससे शरीर की आंतरिक व्यवस्था को बेहतर होने में मदद मिलती है।


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इस शोध से जुड़े वैज्ञानिक बिटराइस ब्रेथेरटन ने कहा कि यह जानकारी किसी विशाल बर्फखंड के ऊपरी हिस्से के नजर आने जैसा है।

हो सकता है कि इस अनुसंधान के आगे बढ़ने पर हमें और अधिक जानकारी मिल सके।

प्रारंभिक परीक्षणों का नतीजा है कि इस विधि से शरीर के रक्त संचालन की स्थिति में जबर्दस्त सुधार होता है।

जब रक्त संचालन ठीक होने लगता है तो उससे शरीर के अन्य शारीरिक और मानसिक स्थिति में भी बेहतरी दिखने लगती है।

वैसे इस विधि का मानसिक प्रभाव देखा गया है, जिसके बारे में अभी और शोध चल रहा है।

अब तो बिजली के वेदनारहित प्रवाह से भी होता है यह काम




इंसानी शरीर के ईलाज में बिजली के प्रवाह को पहले से ही आजमाया जाता रहा है।

लेकिन यह पहली बार हो रहा है कि कान के पीछे दर्द रहित बिजली के झटके से गुदगुदी उत्पन्न कर शरीर और मन को बेहतर बनाया जा रहा है।

इसका दूसरा फायदा यह है कि इस विधि को आजमाने के लिए शरीर के अंदर कोई ऑपरेशन आदि नहीं करना पड़ता।

जिस नस में झनझनाहट पैदा करने की जरूरत है, वह कान के पिछले हिस्से में होती है।

लिहाजा बाहर से यह काम बड़ी सुगमता के साथ किया जा सकता है।

इसका पता चलने के बाद कान के पिछले हिस्से से गुजरने वाली खास नस का

इंसानी दिमाग पर क्या प्रभाव पड़ता है,

इस बारे में दुनिया भर के वैज्ञानिक जानकारी हासिल करने की कोशिशों में जुटे हैं।

शोध के लिए वैज्ञानिकों ने 29 लोगों को इसके लिए शामिल किया था।

इनमें से सभी 55 वर्ष से अधिक आयु के लोग थे।

इन सभी को नियमित तौर पर यह उपचार 15 मिनट के लिए दिया गया था।

दो सप्ताह के बाद इन सभी की शारीरिक और मानसिक स्थिति बेहतर होने के साथ साथ नींद नहीं आने की समस्या अपने आप दूर हो गयी थी।

इस वजह से अब इस शोध को और आगे बढाया जा रहा है ताकि इसके आगे की जानकारी हासिल हो सके।


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