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जिनके पैर विदेशों में थिरकते थे वे आज खेत में मजदूर हैं

नीमडीह (चांडिल): जिनके पैर विदेशों में थिरकते थे आज की इनकी मजबूरी ने कला से

मुँह मोड़ पेट की आग ने मजदूर और सब्जी विक्रेता बना दिया । ये अन्तरराष्ट्रीय छऊ

कलाकार को विदेशों मे अपना लोहा मनवाया है इटली ,फ़्रांश, इंडोनेशिया जर्मनी,में अपने

कला को दिखया है साथ ही कई बिदेशी युनिवेर्सिटी में छऊ को पढ़ाया भी है लेकिन इस

लॉक डाउन में इनको जमशेदपुर के नीमडीह में किशी को सब्जी बेचने पर मजबूर किया है

तो कोई खैतो में काम कर अपना पेट चला रहा है विश्व केदर्जनों देशों में धूम मचाने वाले

नीमडीह के चार अंतराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त मानभूम शैली के छऊ नृत्य कलाकार। नीमडीह

प्रखंड के जामडीह गांव के मानभूम शैली के अंतराष्ट्रीय लोकप्रिय छऊ नृत्य प्रशिक्षक सह

उस्ताद अधर कुमार तथा कलाकार नेपाल कुमार, विष्णु कुमार व अजित प्रमाणिक प्रति

वर्ष जुलाई से सितंबर माह तक यूरोप के इटली,फांस, स्वीटजरलैंड, जर्मनी, स्पेन, इंग्लैंड,

पोलैंड, ऑस्ट्रिया, पुर्तगाल,स्लोवेनिया, रूस आदि देशों में छऊ नृत्य का प्रशिक्षण देकर व

प्रदर्शन किया है ।

जिनके पैर विदेशों में थिरकते थे  इस वर्ष कोरोना महामारी ने  पैरों पर बेड़ियां डाल दी

जामडीह के भारतीय आदिवासी छऊ नृत्य संघ के चार कलाकारों ने विदेश के रंगमंच पर

विगत 25 वर्षों से झारखंड के कला संस्कृति कीजलवा बिखेरते रहा । इनकलाकारों के पूरे

साल की घरेलू खर्च विदेशों के आमदनी से होती है। लेकिन इस साल विदेश मेंसामूहिक

कार्यक्रम में प्रतिबंध लगाने के कारण चारों कलाकार बेरोजगारी और पेट की आग ने

मजबूर होकर आज मनरेगा मजदूर, खेतों में सब्जी की खेती और सब्जी बेचकर अपना

जीवन यापन करने पर मजबूर है ।


 

 

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