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विदेश से आये अमीर लोगों ने भी अपना संक्रमण छिपाया था

  • हवाई अड्डे पर बेईमानी से पूरे देश पर संकट

  • आश्वासन के बाद भी नियमों का पालन नहीं किया

  • निजी विमान से आये तो बिना जांच के निकल गये

  • चाटर्ड फ्लाइट से आये यानी पता था खतरा क्या है

विशेष प्रतिनिधि

नईदिल्लीः विदेश से आये अनेक भारतीयों ने अपनी सेहत के बारे में सही जानकारी नहीं

दी थी। हवाई अड्डे पर तैनात अधिकारियों में भी कुछ लापरवाह लोग थे, जिन्होंने अपने

परिचितों की सही जांच करने में कोताही बरती। इसका नतीजा अब पूरे देश में कोरोना के

आंतक के तौर पर सामने आ चुका है। विदेश से आये लोगों के बाद में बीमार पड़ने और

हालत गंभीर होने के बारे में जो कुछ सूचनाएं अब सामने आयी हैं, उसका निष्कर्ष यही

निकल रहा है।

इस बात से कोई इंकार नहीं कर रहा है कि दरअसल भारत में कोरोना का संक्रमण विदेश

से आया था। अब यह संक्रमण विदेश के रास्ते ही पूरे देश के अनेक इलाकों तक फैला है।

इसलिए स्थिति की समीक्षा के साथ साथ इस बात की जांच भी जरूरी है कि विदेश से आये

कितने लोगों ने अपनी सेहत के बारे में सही जानकारी नहीं दी थी अथवा जांच में

लापरवाही बरती थी। कुछ ऐसे लोगों की पहचान भी हो चुकी है, जिन्हें नियमतः 14 दिनों

तक खुद को दूसरों से अलग थलग रखना था। इनमें से कुछ ने नियम तोड़ा और उनकी

पहचान हो चुकी है।

लेकिन इसके अलावा भी उन अदृश्य चेहरों की पहचान जरूरी है, जिन्होंने पूरे देश को

लॉकडाउन जैसी परेशानी में डाला है। अब आने वाले दिनों में इसकी आर्थिक परेशानी और

बढ़ने वाली है। आम दिहाड़ी मजदूर से लेकर अन्य आम आदमी अगर कोरोना का कहर

झेल रहा है तो इसके लिए मुख्य तौर पर जिम्मेदार विदेश से आने वाले ही हैं।

विदेश से आने में भी खर्च किये करोड़ों

कुछ लोगों का यह भी मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप के दौरे की वजह से अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों पर

रोक नहीं लगने की वजह से भी देश में अनेक कोरोना के रोगी आसानी से प्रवेश कर गये।

अगर कोरोना के फैलने की सूचना के तुरंत बाद अंतर्राष्ट्रीय हवाई उड़ानों को स्थगित कर

दिया जाता तो उससे डोनाल्ड ट्रंप का दौरा भी रद्द हो जाता। इसी दौरे के सफल बनाने के

लिए यह छूट दी गयी। इस छूट की वजह से विदेश से अनेक संक्रमित लोग भी देश के अंदर

आ गये। अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों पर जांच को भी किस तरीके से ऐसे लोगों ने धोखा दिया,

इसका खुलासा भी होने लगा है।

अब तो यह राज भी खुल चुका है कि हवाई अड्डा बंद होने के पहले एक सौ से अधिक निजी

फ्लाइट से लोग यहां आये थे। यह सारी कीमती निजी फ्लाइटें थी और आने वाले सारे पैसे

वाले ही थी। अब इन पैसों वालों में से कितने लोग बीमार पड़े और कितने लोगों ने अपनी

बीमारी छिपायी, इसकी जांच होनी चाहिए। बार बार यह नहीं चल सकता कि पैसा वालों के

लिए अलग कानून और गरीब के लिए अलग कानून का प्रावधान हो। जिनलोगों की वजह

से कोरोना का आतंक देश में प्रवेश कर चुका है, उन्हें तो हर हाल में दंडित किया ही जाना

चाहिए।

सूत्रों की मानें तो खुद को बीमार महसूस कर रहे हवाई यात्रियों में से कुछ ने जांच में पकड़े

जाने से बचने के लिए दिल्ली अथवा अन्य हवाई अड्डों पर उतरने के एक घंटा पहले

विमान में ही पैरासिटामॉल जैसी दवाई खा ली थी। इसलिए थर्मल सेंसर में दवा के प्रभाव

की वजह से उनकी बीमारी पकड़ में नहीं आयी। कुछ लोग नियमित विमान यात्री थे,

जिन्होंने हवाई अड्डों पर अपनी पहचान का गलत इस्तेमाल किया।

संकट का दौर बीते तो ऐसे लोगों से जुर्माना वसूला जाए

इसके ठीक उलट भारत सरकार जिन लोगों को अपने विमान से स्वदेश ले आयी, उन्हें

अलग थलग रखा गया। उनमें भी कोरोना के संक्रमित रोगी थे। लेकिन आइसोलेशन में

होने की वजह से इन रोगियों से संक्रमण दूसरों तक नहीं फैला। इससे स्पष्ट है कि

दरअसल कोरोना फैलाने वाले कितने लोग किसी तरह जांच से बचकर हवाई अड्डे से

निकल भागे थे। अब जांच के तहत ऐसे लोगों को गलत सूचना देने के साथ साथ पूरे देश

को परेशानी में डालने के लिए भी मुकदमा चल सकता है। समाज के कई तबकों से यह

मांग धीरे धीरे तेज होती चली जा रही है ।


 

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