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चीन की चाल से ही चीन की मात दे दी इस बार भारत ने

  • दो इलाकों से आगे बढ़ गये थे भारतीय सैनिक

रास बिहारी

नईदिल्लीः चीन की चाल से ही इस बार चीन को मात दी है भारतीय सेना ने। दरअसल

1962 के युद्ध और गलवान घाटी के बाद से ही चीन लगातार इस कोशिश में जुटा है कि

किसी तरह भारतीय सेना को अपनी जाल में फंसाया जाए। लेकिन इस बार चीन की चाल

ही उसके लिए उल्टी पड़ गयी। दरअसल चीन को शायद इस बात का अंदाजा भी नहीं था

कि भारतीय सेना अब इस हद तक सतर्क रह सकती है। इसलिए जब चीन ने फिर से

भारतीय इलाके में घुसपैठ करना शुरु किया तो उनकी पूरी तरह घेराबंदी कर ली गयी थी।

अपुष्ट जानकारी के मुताबिक कुछ चीनी सैनिक शायद बंदी भी बनाये गये हैं लेकिन सेना

की तरफ से इस बारे में पूरी तरह चुप्पी है। सेना की गतिविधियों भर से पता चल रहा है कि

वहां सेना पूरी तरह सतर्क और युद्ध जैसी तैयारियों में हैं। शनिवार की घटना के बाद आज

भी इलाके में सैनिक गतिविधियां जारी रही।खास कर रोहतांग पास से ऊपर के इलाके में

आम जनता के जाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गयी है।  वहां के पत्रकारों ने अपने

माध्यमों से जो कुछ सूचनाएं एकत्रित की है, उसके आधार पर ही स्थिति का आकलन

किया जा रहा है।

चीनी दूतावास की प्रतिक्रिया से स्पष्ट होता है यह घाव उसे विचलित कर दी है

दूसरी तरफ चीनी दूतावास ने इस बार जिस तरीके से प्रतिक्रिया दी है, उससे भी जाहिर है

कि इस बार का घाव उसे विचलित कर गया है। दोनों देशों के सैन्य कमांडरों की बैठक

बेनतीजा रहने के बाद अब कूटनीतिक स्तर पर आरोप प्रत्यारोप का दौर चल पड़ा है।

वैसे अन्य माध्यमों से जो सूचनाएं पहुंची हैं, उसके मुताबिक चीन को भारतीय सेना की

ऐसी कार्रवाई का अंदाजा नहीं था। अब भारतीय सेना ने उस इलाके में अपनी पकड़ न

सिर्फ मजबूत कर ली है बल्कि कुछ चोटियों पर भी अपने शिविर स्थापित कर लिये हैं।

चीन की चाल से मुंहतोड़ जबाव देने के लिए भारतीय सेना तैयार है

चीन ने जबरन इन इलाकों में अपनी सेना के शिविर बना रखे थे, जिन्हें ध्वस्त कर दिया

गया है। सूत्रों की माने तो यह कार्रवाई एक नहीं बल्कि दो स्थानों पर हुई है। इस किस्म के

हमले की जबावी कार्रवाई के लिए चीन तैयार भी नहीं था। लिहाजा उसे इस बार अधिक

नुकसान उठाना पड़ा है लेकिन यह स्पष्ट नहीं हैं कि इस दौरान दोनों पक्षों के सैनिक मारे

गये हैं अथवा नहीं। अलबत्ता घटना के बाद दोनों तरफ से भारी युद्धक उपकरण इलाके में

तैनात कर दिये गये है। भारतीय सेना ने भी अपनी टैंक वाहिनी को और आगे बढ़ा दिया है।

सूत्रों की मानें तो भारतीय सेना ने चौकसी बरतते हुए चुमुर सेक्टर में चीनी सैनिकों की

गतिविधियों को देखते हुए ही खुद को तैयार कर लिया था। लेकिन उस इलाके में अब तक

चीन आगे नहीं बढ़ रहा है। सेना के एक अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर सिर्फ

इतना भर कहा कि इस इलाके में घनघोर युद्ध के लिए जो सही तैयारियां की जा सकती थी,

पूरी हैं।

इस बीच अमेरिकी गुप्तचर सूत्रों ने वाशिंगटन को यह सूचना भी भेजी है कि चीन अपनी

तरफ से लगातार भारत को उकसाने की कार्रवाई कर रहा है। पेंगौंग झील के पास जबरन

भारतीय इलाके को अपना बताने के साथ ही आस पास के इलाकों में चीन की हरकतें

भारतीय सेना को उकसाने वाली है। अमेरिकी गुप्तचरों की रिपोर्ट में इस बात का भी

उल्लेख किया गया है कि एक स्थानीय कमांडर द्वारा अपनी टुकड़ी को पीछे कर लेने के

फैसले से भी बीजिंग नाराज हुआ है। अमेरिकी गुप्तचर सेवा की रिपोर्टों का हवाला देते हुए

यूएस न्यूज एंड वर्ल्ड रिपोर्ट ने एक विस्तृत रिपोर्ट भी प्रकाशित की है।


 

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