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व्यायाम के बिना भी कसरत का लाभ देगा यह प्रोटिन

  • शोधकर्ताओं ने सेस्ट्रिन के फायदों को क्रमवार तरीके से दर्ज किया

  • शोध को दरअसल मांसपेशियों की बीमारी के लिए किया गया था

  • शरीर के अंदर यह प्रोटिन कसरत के सारे काम पूरा करता है

  • इसके काम करने के तरीके पर अब चल रहा है शोध

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः व्यायाम के बिना भी व्यायाम का पूरा लाभ मिल सकता है, यह

सोचना भी किसी सुखद सपने के जैसा है। लेकिन वैज्ञानिकों ने यही फायदा

देने वाले एक प्रोटिन की पहचान कर ली है। सेस्ट्रिन नाम का यह प्रोटिन

इंसानी शरीर में बिना किसी कसरत के उसके तमाम लाभ उत्पन्न कर

सकता है। इस बारे में शोध का निष्कर्ष है कि शरीर का बिना कोई मांसपेशी

हिलाये भी यह लाभ सिर्फ इसी प्रोटिन की बदौलत हासिल हो सकता है।

दूसरे शब्दों में कहें तो शरीर को ठीक रखने के लिए जरूरी सारे व्यायाम का

काम यह अकेले कर देता है। वैसे बिना कसरत के शरीर के मोटापा पर

नियंत्रण के बारे में यह शोध कोई जानकारी नहीं देता है। शोधकर्ताओं ने

सिर्फ यह बताया है कि कठिन परिश्रम से शरीर के अंदर जो कुछ बदलाव

होते हैं, उसे इस प्रोटिन के माध्यम से हासिल किया जा सकता है।

इस शोध से जुड़े वैज्ञानिक यह मानते हैं कि अधिक उम्र में मांसपेशियों के

क्षरण और अन्य कारणों से शरीर में जो मांसपेशियों का विकार आता है,

उसे यह प्रोटिन रोक सकता है।

मिशिगन मेडिसन के शोधकर्ताओं ने इस पर काफी समय से अपना

अनुसंधान किया है। इसी क्रम में वह इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि सेस्ट्रिन

नाम का यह प्रोटिन शरीर के अंदर व्यायाम के तहत उत्पन्न होने वाली

तमाम प्रक्रियाओं की नकल करने में सक्षम है। इस शोध के प्रारंभिक

परिणाम सामने आने के बाद वैज्ञानिकों ने इसकी गाड़ी को आगे भी

बढ़ाया है। उसके तहत यह पाया गया है कि प्रोटिन का प्रभाव सीधे शरीर

की तमाम मांसपेशियों तक पहुंचता है। इस शोध से जुड़े कई प्रमुख वैज्ञानिकों

ने इसके अलग अलग आयामों की जांच की है।

व्यायाम और प्रोटिन का परीक्षण मक्खियों पर किया गया

परीक्षण का पहला चरण सफल साबित होने के बाद उसका प्रयोग मक्खियों

पर किया गया हैं। इसके लिए डॉ मियुनजिन किम और डॉ जून ही ली ने पाया

है कि इस प्रोटिन का सीधा संपर्क कसरत के प्रक्रियाओं से जुड़ा हुआ है।

मक्खियों पर प्रयोग करने के लिए शोधकर्ताओं ने खास प्रजाति की मक्खी

ड्रोसोफिला पर इसे आजमाया गया था। वायने विश्वविद्यालय के रॉबर्ट

वेसल्स और एलिसन सूजोकस्की ने इसे नापा है। इस परीक्षण के तहत

मक्खियों को कसरत के लिए ही आजमाया गया था। प्रोटिन का यह

प्रभाव उनपर सफल साबित हुआ है। यह पाया गया कि जिन मक्खियों को

इस प्रोटिन का मामूली डोज दिया गया था उन्होंने सामान्य क्षमता से काफी

अधिक कसरत करने में सफलता पायी। दूसरी तरफ जिन मक्खियों को

यह प्रोटिन नहीं मिला था, उनका आचरण बिल्कुल सामान्य रहा।

तीन सप्ताह तक लगातार चले इस परीक्षण का यह निष्कर्ष वैज्ञानिकों के

लिए उत्साहवर्धक था। इस प्रोटिन के डोज के अनुपात में भी मक्खियों की

शारीरिक क्षमता का विकास नापा गया है। मक्खियों पर मिले परिणाम से

उत्साहित वैज्ञानिकों ने इसका प्रयोग अन्य प्राणियों पर भी किया है।

इसके तहत चमगादड़ पर इसके प्रयोग और भी उत्साहजनक रहे हैं।

अब वैज्ञानिक इस प्रोटिन के उन तमाम गुणों को एक एक कर दर्ज कर रहे हैं

तो शरीर के अंदर खास स्थिति पैदा करते हैं। इसके आधार पर वैज्ञानिक यह

भी मान रहे हैं कि काफी अरसे से निष्क्रिय हो चुकी मांसपेशियों को भी

इस प्रोटिन की बदौलत फिर से पूरी तरह सक्रिय किया जा सकता है।

व्यायाम के बिना भी कसरत का लाभ देगा यह प्रोटिननिष्क्रिय पड़ी मांसपेशियों में भी जान डाली जा सकेगी

इससे अनेक किस्म की बीमारियों से लड़ने के लिए इंसान खुद ही सक्षम

हो जाएगा।   क्योंकि यह प्रोटिन समान रुप से शरीर के हर हिस्से के

मांसपेशियों को अपने प्रभाव में लेगा और इसके तहत जो मांसपेशियों

निष्क्रिय पड़ी हुई हैं, वे भी सक्रिय होने लगेंगी। लेकिन इस प्रोटिन के तमाम

गुणों को वैज्ञानिक एक एक कर दर्ज कर रहे हैं ताकि यह पता चल सके कि

इस सेस्ट्रिन प्रोटिन से आखिर शरीर के भीतर यह बदलाव कैसे और किस क्रम

में होता है। दूसरी तरफ वैज्ञानिक अब यह भी समझना चाहते हैं कि कसरत के

माध्यम से शरीर के अंदर यह प्रोटिन किन प्रक्रियाओं के तहत पैदा होता है।

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