प्यार हमें किस मोड़ पे ले आया .. .. ..

प्यार हमें किस मोड़ पे ले आया .. .. ..

प्यार ही था जो हर जगह हमलोग भीड़ लगा रहे थे। चुनावी रैली हो तो अपने प्रिय नेता का

प्यार था। किसी की शादी हो तो रिश्तेदारी का प्यार था। और कुछ नहीं तो टाइम पास के

लिए सड़कों पर मंडराते हुए विंडो शॉपिंग का प्यार था। अब घरों में कैद हुए पड़े हैं। जो वीर

इसमें में नहीं चेते वे बाहर से पुलिस का बेंत खाकर लौट रहे हैं। गाड़ियों में बिना पास के

निकलने वाले जुर्माना भर रहे हैं। यह प्यार नहीं तो और क्या है। मुगल ए आजम पुराना

गीत तो हम अक्सर ही गाते रहे हैं कि जब प्यार किया तो डरना क्या। तो लो झेलो अब।

जो दुश्मन लगभग खत्म हो चला था हमलोगों ने आपसी प्यार मोहब्ब्त दिखाने में उसे

फिर से हमला करने का मौका दे दिया। अब नतीजा हमारे सामने ही है। गनीमत है कि डंडे

के भय से हम थोड़ा संभल गये और दो मई तक चुनावी चकल्लस भी खत्म हो गया वरना

गंगा में और कितनी लाशें दिखने लगती, किसे पता।

अब गंगा में लाश देखकर भी विरोधी हमला करने में लगे हैं। अरे यार तुम्हें यहां की

संस्कृति का पता ही नहीं है। पहले से ही गंगा में लाशों को प्रवाहित करन की परंपरा रही है।

अभी थोड़ी पैसे की कड़की अधिक है और घाटों पर बहुत अधिक भीड़ है। इसलिए जलावन

की लकड़ी का खर्च और टैम बचा रहे हैं। जलावन की लकड़ी का खर्च बच जाएगा तो एक

हफ्ते के भोजन का इंतजाम हो जाएगा। सरकारी राशन तो शायद सिर्फ कागजों पर ही बंट

रहा है। वरना इतनी बुरी दुर्गत तो नहीं होती।

प्यार हमें किस घनचक्कर में डाल गया है भाई

वैसे दुर्गत को बड़े साहब की भी हो गयी। उनका बॉडी लैंग्वेज बता रहा है कि पहले किसान

आंदोलन और बाद में पश्चिम बंगाल दोनों ने उन्हें जोर का झटका बहुत जोर से दिया है।

बेचारे का बनारस वालों से बात करते हुए गला भी रूंध गया था। लेकिन इस बार मोटा भाई

का कैलकूलेशन गड़बड़ा गया। दरअसल स्ट्रीट फाइटर लेडी से पंगा लेकर अपना पुरानी

तरकीब आजमाना काम ना आया। नतीजा है कि जो विरोधी दल कल तक चूं चपड़ नहीं

करते थे, सब टर्राने लगे हैं।

इसी बात पर एक सुपरहिट फिल्म सत्ते पे सत्ता का गाना याद आने लगा है। इस गीत को

लिखा था गुलशन बाबरा ने और संगीत में ढाला था राहुल देव वर्मन ने । इसे किशोर

कुमार, भूपेंद्र और खुद राहुल देव वर्मन ने अपना स्वर दिया था। गीत के बोल कुछ इस

तरह हैं।

हम ने वो क्या देखा जो कहा दीवाना हम को नहीं कुछ समझ ज़रा समझाना

प्यार में जब भी आँख कहीं लड़ जाये तब धड़कन और बेचैनी बढ़ जाये

गिनता है जब कोई रातों को तारे तब समझो उसे प्यार हो गया – प्यारे

प्यार हमें किस मोड़ पे ले आया कि दिल करे हाय- हाय कोई तो बताये क्या होगा

बत्तियाँ बुझा दो अरे कोई बत्ती तो बुझा दे यार बत्तियाँ बुझा दो कि नींद नहीं आती है

बत्तियाँ बुझाने से भी नींद नहीं आयेगी बत्तियाँ बुझाने वाली जाने कब आयेगी

श श श शोर न मचाओ वरना भाभी जाग जायेगी

प्यार तुम्हें किस मोड़ पे ले आया कि दिल करे हाय

हाय कोई ये बताये क्या होगा

प्यार हमें किस मोड़ पे ले आया

होना क्या है? जा के उन्हें ले आयेंगे आखिर क्या थी ऐसी भी मजबूरी

मिल गए दिल अब भी क्यों है ये दूरी अरे, दम है तो उन को छीन के ले आयेंगे

दी न गर घर वालों ने मंज़ूरी प्यार हमें किस मोड़ पे ले आया

कि दिल करे हाय – हाय कोई ये बताये क्या होगा

अब कोरोना का प्यार कम हो रहा है तो नया बखेड़ा टूलकिट का है। ट्विटर वालों ने मार्का

लगाकर तो लोगों को और बहुत कुछ बोलने का मौका दे दिया है। ऊपर से कांग्रेस वाले जहां

तहां से मामला दर्ज करते चले जा रहे हैं। लगता है कि यह टैम ही खराब चल रहा है।

पिछले चुनाव से पहले किसानों के खाते में सीधे पैसे दिये थे तो प्रचंड बहुमत मिला था अब

किसानों का एक बहुत बड़ा तबका लट्ठ लेकर पीछे पड़ा है। किसानों ने भी पश्चिमी उत्तर

प्रदेश में ऐसा प्यार दिखा दिया कि सूपड़ा साफ हो गया। अब कौन जाकर मोटा भाई को

समझाये कि बहुत हुआ अब भी लौट चलें वरना आगे गहरी खाई है। एक बार जनता का

भरोसा टूट गया तो कांग्रेस से भी बुरी गत हो जाएगी। टू जी और थ्री जी घोटालों के आरोपों

के दौरान चुप्पी साधे बैठी कांग्रेस को जनता ने गुनाहकार मानकर जैसी सजा सुनायी है,

उससे भी कठिन सजा अब भी लोकतंत्र में सुनायी जा सकती है। वैसे लगता है प्यार के

खेल में अब पार्टी के अंदर भी कुछ खिचड़ी पक रही है। लेकिन ऐसी खिचड़ी की सुगंध तो

देर से ही बाहर आयेगी।

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