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हवा में चालीस फीट तक पंख फैलाकर उड़ता था यह प्राचीन प्राणी




  • माजरा समझने में पचास साल लग गये
  • उड़ने से पहले हवा में उछलता था यह प्राणी
  • जुरासिक पार्क फिल्म में हम इसे देख चुके हैं
राष्ट्रीय खबर

रांचीः हवा में चालीस फीट तक उसके पंखों का फैलाव होता था। दरअसल वैज्ञानिकों को इस प्राचीन प्राणी की संरचना को पूरी तरह समझने में ही पचास साल लग गये। अब जाकर यह निष्कर्ष निकाला गया है कि यह दरअसल सरीसृप प्रजाति का प्राणी था लेकिन उसके पंख भी थे।




वैज्ञानिक परिभाषा में इसे पेट्रोसोर कहा गया है। इन पेट्रोसोर को उड़ते हुए हम साइंस फिक्शन फिल्म जुरासिक पार्क में भी देख चुके हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास (ऑस्टिन) के शोधकर्ताओँ ने अब जाकर इसकी पूरी संरचना का गठन करने में सफलता पायी है।

वरना इसके अवशेष तो पचास वर्ष पहले ही मिल चुके थे। तब भी यह सवाल बना हुआ था कि यह प्राणी पंखों वाला नजर आने के बाद भी आखिर उड़ता कैसे था। प्राचीन प्राणी के फॉसिल के सारे हिस्सों को एक एक कर तलाशने और क्रमवार तरीके से जोड़ लेने के बाद यह बताया गया है कि यह जब हवा में चालीस फीट का पंख फैलाकर उड़ता था तो कैसा नजर आता था।

हवा में उड़ने के पहले उछाल लेता था यह जीव

भारी शरीर का यह प्राणी उड़ने के लिए अपने पैर की मांसपेशियों की मदद से खुद को हवा में उछाल लेता था। हवा में उछाल लेने के बाद वह अपने विशाल पंखों के सहारे आसमान में ऊपर की तरफ उठता जाता था।




वैज्ञानिकों ने पाया है कि हवा में चालीस फीट पंख फैलाने के पहले यह प्राणी करीब आठ फीट तक ऊपर उछल जाता था। वैसे इस निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए वैज्ञानिकों ने कंप्यूटर मॉडल का भी सहारा लिया है। तब जाकर यह सुनिश्चित हो पाया है कि इस प्राचीन प्राणी की पूर्ण शारीरिक संरचना कैसी थी।

उसके पंख की हड्डियों के ढांचे खोखले हुआ करते थे। इस वजह से वजन में कम होने के बाद भी वे पंखों को मजबूती दे सकते थे और हवा में चालीस फीट पंख फैलाकर यह प्राणी ऊंचाई तक पहुंच जाता था।

अनुसंधान के दौरान यह निष्कर्ष भी निकाला गया है कि यह प्राचीन प्राणी इस धरती पर करीब सत्तर मिलियन वर्ष पूर्व रहा करता था।

अलग अलग फॉसिल मिलने के बाद वैज्ञानिक इस नतीजे पर भी पहुंचे हैं कि वयस्क पेट्रोसोर अकेला रहा करता था जबकि उसके शिशु सामाजिक तौर पर एक दूसरे के साथ और अपनी मां के करीब रहा करते ते। 1971 में मिले पहली फॉसिल के बाद अब जाकर इस प्राचीन प्राणी की पूरी गुत्थी सुलझ पायी है।



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