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अंतरिक्ष में कई लाख मील तक की सफर पर जाएगा जेम्स वेब टेलीस्कोप

  • दूरबीन के सूर्य शील्ड को लगाने का काम जारी

  • पृथ्वी से काफी दूरी पर स्थापित होगा यंत्र

  • सूर्य की भीषण गर्मी से बचाना जरूरी है

  • पांच परतों में तैयार हुआ बारीक आवरण

राष्ट्रीय खबर

रांचीः अंतरिक्ष में कई लाख मील तक की सफर करेगा। इसकी जिम्मेदारी हब्बल

टेलीस्कोप के बदले अंतरिक्ष अनुसंधान में मदद करना है। इसलिए तैयार हो रहे जेम्स वेब

टेलीस्कोप को लेकर खगोल वैज्ञानिकों में बहुत उम्मीद है। अब कोरोना संकट की वजह से

सारा काम निर्धारित समय सीमा से देर से चलने के बाद भी अब उसे धीरे धीरे पूरा किया

जा रहा है। इसके तहत अब इस दूरबीन के ऊपरी पर्त पर सूर्य की भीषण गर्मी से टेलीस्कोप

को बचाने का आवरण लगाया जा रहा है। इसके पहले ही एक एक कर जोड़े गये इस

टेलीस्कोप को मोड़कर इस सूर्य किरणों से बचाव के शील्ड के अंदर रख दिया गया है। यह

अंतरिक्ष अनुसंधान दूरबीन इसी साल अपनी यात्रा प्रारंभ करेगा। अनुमान है कि उसे करीब

1.5 मिलियन किलोमीटर दूर अंतरिक्ष में स्थापित किया जाएगा। जहां से वह अंतरिक्ष की

हर गतिविधि पर नजर रखेगा। इस यंत्र को हब्बल के मुकाबले अधिक उन्नत बनाया गया

है। अंतरिक्ष में लगातार काम करने के लिए उसे सूर्य की तेज रोशनी और गर्मी से बचाना

आवश्यक है। इसी वजह से उस पर पांच पर्तों का आवरण लगाया जा रहा है। आकार में यह

शील्ड किसी टेनिस कोर्ट के जितना बड़ा है। यह किसी हीरे की शक्ल में है। वह इस

टेलीस्कोप के दोनों तरफ मुड़कर फिट हो सकता है। इसी अवस्था में उसे अंतरिक्ष में भेजा

जाना तय है। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक यह टेलीस्कोप एरियाना 5 रॉकेट के

जरिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। एक बार अंतरिक्ष के निर्धारित स्थान पर पहुंच जाने के

बाद नियंत्रण कक्ष से प्राप्त संकेतों के आधार पर यह खुद को इस कक्षा में स्थापित करेगा

और अपने असली आकार में आ जाएगा। इसे मोड़ने का काम कैलिफोर्निया के रेडोनो बीच

के नार्थथ्रोप ग्रूमैन केंद्र में पूरा कर लिया गया है।

अंतरिक्ष में कई लाख मील से दूर से ही काम प्रारंभ करेगा

इस काम से जुड़े नासा के वैज्ञानिकों ने बताया कि अंतरिक्ष में वहां इस किस्म का आवरण

पूरे यंत्र को बचाने के लिए आवश्यक है। खास कर यह सूर्य शील्ड इसमें लगे ऑप्टिकल

यंत्रों को सूर्य की रोशनी से नष्ट होने से बचायेगा। दूसरी तरफ इसमें लगे आइने सूर्य की

रोशनी से गर्मी प्राप्त कर इसे ठंड से भी बचाते रहेंगे। पहले ही उस स्थान के तापमान का

आकलन कर लिया गया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक वहां का तापमान करीब 230 डिग्री

फारेनहाइट से लेकर अंधेरे में माइनस 934 डिग्री फारेनहाइट तक हो जाता है। इसलिए

जेम्स वेब टेलीस्कोप को इस तापमान से भी सुरक्षित रखना जरूरी है। अधिकतम और

न्यूनतम तापमान यह दूरबीन झेल लेगा, उसका परीक्षण पहले ही कर लिया गया है। इस

शील्ड के बार में इसे बनाने वाले दल के प्रमुख जेफ चीजूम ने कहा कि यह किसी पैराशूट

की तरह है, जिसे मोड़कर अंतरिक्ष में भेजा जा रहा है। वहां पहुंचने के बाद यह खुल जाएगा

और काम करने लगेगा। इस शील्ड के चालू हो जाने के बाद यान के अंदर काम करने का

तापमान हमेशा बना रहेगा और दूरबीन में लगे अत्यंत संवेदनशील यंत्रों को भी कोई

नुकसान नहीं पहुंचेगा। चांदी के पर्त की तरह दिखने वाला यह सन शील्ड पांच परतों में हैं

और उसके पांच परतों को एक एक कर मोड़ने में एक महीने का समय करीब लग चुका है।

इसे मोड़ना भी कोई आसान काम नहीं था क्योंकि उन्हें इस तरीके से रखा जाना चाहिए

ताकि बाद मे संकेत पाने के बाद वे एक एक कर खुलते चले जाएं। इस परत के बारे में

बताया गया है कि इसकी एक परत यह करीब एक ईंच के दो हजारवां हिस्सा पतला है।

इतने बारीक पर्त को पूरी सावधानी से मोड़ा गया है

इसे अंतरिक्ष में चालू करने के लिए उसमें 90 किस्म के अलग अलग केबल लगाये गये हैं।

इतने पतली पर्त को मोड़ना और उसे सही क्रम में रखने में पूरी सावधानी बरती गयी है।

यह पूरा काम मशीनों के जरिए किया गया है ताकि मोड़े जाने के वक्त इन परतों को कोई

नुकसान नहीं पहुंचे। अंतरिक्ष में इस टेलीस्कोप को पहुंचाने के बाद पहले ही सप्ताह में एक

एक कर यह पर्त खुलती चली जाएगी। वे एक दूसरे से अलग होकर पांच परत बना लेंगे।

इसके बाद पूरे जेम्स बेव टेलीस्कोप को सूर्य की तेज रोशनी और भीषण ताप से बचाने के

अपने काम में यह जुट जाएगा। इनके पूरी तरह सक्रिय हो जाने के बाद ही जेम्स वेब

टेलीस्कोप के यंत्रों को एक एक कर जांच लेने के बाद चालू किया जाएगा।

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