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प्रजातंत्र है राजतंत्र नहीं आपको सेवा के लिए भेजा गया हैः शाह अली सज्जाद

  • पहले डाकू अमीरों को लूटकर गरीबों में बांटते थे

  • अब सरकार और अमीर गरीबों को लूट रहे हैं

  • नीतीश इस बार मजबूरी में फैसले ले रहे

  • कोरोना का ईलाज करने पर ध्यान रहे

दीपक नौरंगी

भागलपुरः प्रजातंत्र है राजतंत्र नहीं। पहले राजतंत्र में वादशाहों के जमाने में ऐसा कहा

जाता था कि यह मेरा हुक्म है और उसे आप ईश्वर का हुक्म समझकर उसका पालन करो।

वीडियो में देखिये उन्होंने क्या कुछ कहा

अब वह जमाना नहीं रहा। यह प्रजातंत्र है। यहां आपको जनता ने चुनकर इसलिए भेजा है

ताकि आप जनता की सेवा कर सके। अभी जो माहौल चल रहा है वहां जनता को कहां कहां

परेशानी है, उसे समझकर उसे दूर करने के लिए वादशाह जैसी ताकत सरकार को लगाना

चाहिए। यह बयान सामाजिक कार्यकर्ता सैयद शाह अली सज्जाद है। वह इनदिनों राज्य

सरकार के काम काज से कतई प्रसन्न नहीं हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को जनता

की सेवा के लिए जो कुछ करना चाहिए, उससे सरकार भाग रही है। वर्तमान हालात पर

नाराज अली सज्जाद साहब ने कहा कि पुराने जमाने में डाकू हुआ करते थे। उनके बारे में

कहा जाता है कि वह अमीरों को लूटते थे और गरीबों में बांट देते थे। अब तो हालत बिल्कुल

उल्टी हो चुकी है। यहां अमीर और सरकार दोनों मिलकर गरीबों को लूट रहे हैं। दरअसल

ऐसी स्थिति तब आती है जब सरकार नाम की कोई चीज अस्तित्व में ही नहीं रहे। इससे

प्रजातंत्र को ही नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि अभी राजनीति छोड़कर सभी को

इंसानियत पर ध्यान देना चाहिए। इस बात को समझना होगा कि अगर इंसान ही नहीं

रहेगा तो आपको वोट कौन देगा। उन्होंने यह भी कहा कि इंसान की ताकत को कम

आंकना राजनीतिक तौर पर गलती होती है। उन्होंने कहा कि मोदी जी ने पश्चिम बंगाल में

इतनी ताकत झोंक दी लेकिन उसका नतीजा क्या निकला। वहां के एक महिला ने मोदी की

पूरी फौज को शिकस्त दे दी। उन्होंने कहा कि यह चुनाव भी साबित कर देता है कि यहां

रावण नहीं चलेंगे।

प्रजातंत्र में इंसान की ताकत का उदाहरण है पश्चिम बंगाल

इस बात को राजनीति से जुड़े हरेक को अच्छी तरह समझ लेना होगा। उन्होंने साफ साफ

कहा कि वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काम काज की वह हमेशा ही तारीफ करते

आये हैं। इसलिए अभी राज्य की जो स्थिति है, उसकी उम्मीद उन्हें कतई नहीं थी। उन्हें

ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मजबूरी में फैसले ले रहे हैं। वरना इस राज्य में

सड़क, पानी, अपराध नियंत्रण, बाढ़ सहित योजनाओं का जितना काम श्री कुमार ने किया

है, उतना तो किसी मुख्यमंत्री के कार्यकाल में नहीं हुआ था।

कोरोना संकट पर उन्होंने अस्पताल और दवाई दुकानों में मची लूट पर भी आपत्ति

जतायी। उन्होंने इस बात की शिकायत की कि बाजार बंद कराया जा रहा है जबकि मरीजों

से मनमाना रकम लूटने वाले अस्पतालों और ऊंची कीमत पर दवा बेचने वाले दुकानदारों

के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि मास्क और लॉकडाउन

कोई कोरोना का ईलाज नहीं है। कोरोना का ईलाज जल्द से जल्द हो और लोगों को इस

ईलाज का ज्यादा से ज्यादा फायदा हो, उस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए। मास्क

पहनकर और लॉकडाउन से हम संक्रमण को कम रख सकते हैं लेकिन दरअसल यह

कोरोना का ईलाज तो नहीं है। कोरोना के असली ईलाज के लिए सरकार को और बेहतर

इंतजाम करना चाहिए और मनमानी करने वाले अस्पतालों और दवा दुकानों पर भी

कार्रवाई होनी चाहिए।

राजनीति के अलावा ईद और रमजान पर भी उन्होंने अपनी बात कही

पिछले वर्ष भी कोरोना संकट के दौरान उनकी भूमिका की काफी सराहना की गयी थी। इस

बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इस बात को अच्छी तरह समझ लेना होगा कि

आपकी कमाई में आपके पड़ोसी, मजदूर और आपसे जुड़े सभी लोगों का हक है। इसलिए

हमेशा यह कहा जाता है कि आप कमसे कम अपने पड़ोसी के दुख दर्द को जरूर बांटे।

उन्होंने बड़ी बात यह कही कि यह अमीरों की जिम्मेदारी है कि वह गरीबों की तलाश कर

उनकी मदद करे। हर गरीब बाजार में भीख मांगता हुआ नजर नहीं आता है। अमीरों को

हिदायत देते हुए उन्होंने कहा कि कमाई में तो जानवरों तक का हक है। जकात के नियमों

का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अगर हर पैसे वाला इस नियम का सही तरीके से

पालन करना प्रारंभ कर दे तो आबादी में कोई भूखा नहीं रहेगा।

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