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इस दीपावली आप भी एक उम्मीद का दीया जलाएं







रांचीः इस दीपावली की तैयारियां तो जोरों पर हैं।

लोग अभी से ही हर साल की तरह अपने अपने घरों की सफाई में जुट गये हैं।

घर की दीवारों पर रंग रोगन का काम हर दस घर में से दो में होता हुआ नजर

आता है। इसी दीपावली के दौरान ही एक ऐसा प्रेरक वीडियो भी सामने आया

है, जिसे देखना और उसके मर्म को समझना आज के दौर की युवा पीढ़ी के

लिए शायद और भी जरूरी है। सिर्फ मसला यह इस दीपावली भर का नहीं है।

ऐसा था हमारा प्राचीन भारत का नक्शा

हमारा प्राचीन भारत ऐसा था

दरअसल यह प्राचीन अर्थव्यवस्था से जुड़ी हुई परंपराएं हैं। शायद इन्हीं

परंपराओं की वजह से सम्राट समुद्रगुप्त के कार्यकाल में हमारी अर्थव्यवस्था

पूरी दुनिया में सबसे मजबूत थी।

इस दीपावली जब इन परंपराओं की चर्चा पर बात आ गयी तो हमें यह भी याद

कर लेना चाहिए कि उस काल का भारत दरअसल दिखता कैसा था और वह

कहां तक फैला था। यह इराक और ईरान से होता हुआ इंडोनेशिया के आगे

तक था। इसी तरह श्रीलंका से लेकर चीन का बड़ा हिस्सा और आज के दौर के

म्यांमार के आगे का हिस्सा भी अखंड भारत का अंग था।

यहां देखें वह प्रेरक वीडियो

अब इस दीपावली के इस खास वीडियो की बात करें जो कई संदेश एक साथ दे

जाता है। यूं तो इस वीडियो के रचयिता की जानकारी सोशल मीडिया में मुझे

नहीं मिल पायी। लेकिन किसी मित्र समूह में इस वीडियो को जारी किये जाने

के बाद इसमें छिपे संदेश और इस दीपावली से जुड़ी उम्मीदों को बच्चे की

आंखों से देखने समझने का मौका जरूरत मिल गया।

इस दीपावली के वीडियो से सोचने सीखने का मौका है

इस दीपावली में हम भी उम्मीद का एक दीया जलाये शीर्ष पर पर्दे के पीछे से

चल रही एक कविता के बीच आज के दौर पर सिर्फ दीया बेचने की चुनौती

भारतीय प्राचीन अर्थव्यवस्था के धराशायी होने के खतरे से हमें अवगत

कराती है। दूसरी तरफ एक नन्हा सा बालक अपने सीमित संसाधनों की

बदौलत क्या कुछ बदलाव ला सकता है, इसे भी स्पष्ट कर देता है।



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