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यह कपड़ा आइना जैसा रोशनी को वापस कर ठंढा रखता है


  • गर्मी से निजात दिलाने के अनुसंधान को सफलता 

  • रोशनी को परावर्तित कर अंतरिक्ष में भेजता है

  • सफेद कपड़े से भी ज्यादा ठंडा रखता है यह

  • व्यापारिक इस्तेमाल से इसकी लागत भी घटेगी

राष्ट्रीय खबर

रांचीः यह कपड़ा कपड़ों की दुनिया में नये किस्म का बदलाव लाने वाला है। यूं तो कपड़ों

की दुनिया में अनेक किस्म की विविधता आयी है। इस पर वैज्ञानिक शोध पहले बहुत कम

हुआ है। अब दुनिया के बदलते माहौल में ठंडे प्रदेश में बढ़ते तापमान ने वैज्ञानिकों का

ध्यान इस ओर आकृष्ट किया है। इसी सोच के तहत ऐसे कपड़े का आविष्कार हुआ है जो

सूर्य की गरमी में भी शरीर के अंदर का तापमान कमसे कम पांच डिग्री तक कम रखने में

सफल होगा। शोधकर्ताओं का मानना है कि जब इसका ज्यादा व्यापारिक उत्पादन होने

लगेगा तो उसकी लागत कम होने की वजह से यह आम आदमी के लिए बहुत मददगार

सिद्ध होगा। दरअसल मौसम में बदलाव की वजह से अमेरिका और कनाडा जैसे इलाकों में

अप्रत्याशित गरमी पड़ने की वजह से लोगों को हल्के लेकिन कम तापमान वाले कपड़ों की

आवश्यकता भी महसूस होने लगी है। कुछ वर्ष पूर्व लंदन में भीषण गर्मी पड़ने की वजह से

लोग खाली बदन और तमाम जलागारों के भीतर बैठकर खुद को ठंढा रखने की कोशिश

करते पाये गये थे। समुद्री तट के करीब रहने वाले समुद्र के अंदर रहकर गर्मी से निजात

पाने की कोशिश करते देखे गये थे। अब यह कपड़ा ऐसी परेशानियों के समाधान के तौर

पर सामने आया है। दरअसल हमें गरमी इसलिए महसूस होती है जब सूर्य की रोशनी

हमारे शरीर अथवा आस पास के इलाकों को गर्म कर देती है। कपड़ों में भी हल्के रंग के

कपड़े सूर्य की रोशनी को परावर्तित करने की वजह से हमें कम ताप की अनुभूति होती है।

दूसरी तरफ गहरे रंग के कपड़े सूर्य की रोशनी की गर्मी को सोखते हैं। इसलिए वैसे कपड़ों

में अधिक गर्मी महसूस होती है।

यह कपड़ा गर्मी को सीधे अंतरिक्ष में लौटाने का गुण रखता है

वैसे वैज्ञानिक शोध में यह पाया गया है कि कपड़ो में अधिक गर्मी महसूस होने की एक

दूसरी वजह सूर्य के इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विकिरण और अल्ट्रावॉयोलेट किरणों का प्रवेश

करना भी है। इसके अलावा नियर इंफ्रारेड किरणों के विकिरण से भी गरमी महसूस होती

है। इस गरमी को प्रकृति अपने प्राकृतिक तरीके से सोख लेती है। इनमें नियर इंफ्रारेड को

आस पास के जल के इलाके सोखते हैं जबति दूसरी गर्मी हवा में धीरे धीरे विलीन हो जाती

है। इसी गरमी लगने की प्रक्रिया को अगर कम कर दिया जाए तो आदमी बेहतर महसूस

करता है। शोधकर्तो ने यह पाया है कि मिड इंफ्रारेड रेडियेशन अपनी प्रकृति की वजह से

सीधे अंतरिक्ष में वापस लौट जाता है। इस प्रक्रिया में वह ताप के दायरे में आये वस्तु और

उसके आस पास के इलाकों को भी ठंडा करता चला जाता है। इस प्रक्रिया का इस्तेमाल

पहले से ही छतों, प्लास्टिक फिल्मों और लकड़ी के अलावा अल्ट्रा सफेद पेंट्स में किया

जाता रहा है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि इंसानी चमड़ा स्वाभाविक तौर पर मिड इंफ्रारेंड

किरणें छोड़ता है। इसी वजह से उस प्रक्रिया को अपनाने वाले परिधान भी अपेक्षाकृत कम

तापमान पैदा कर सकते हैं। इसी सिद्धांत के आधार पर स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के

वैज्ञानिकों ने तीन डिग्री तापमान कम करने वाले कपड़े का निर्माण पहले ही कर लिया था।

ऐसे परिधान की शर्त यह भी है कि इसे बहुत पतला होना चाहिए

अब झेजियांग विश्वविद्यालय के इंजीनियरमा याओगुआंग और हुआझोंग  विश्व

विद्यालय के टाओ गुआनमिंग ने वैसे कपड़ा बनाने में सफलता पायी है, जो इसके बीच से

सीधे एमआईएर को गुजार देती है। इसके लिए खास किस्म के रसायनों का प्रयोग किया

गया है। आकार में 550 माइक्रोमीटर पतला यह कपड़ा पॉलिएक्टिक एसिड और सिथेंटिक

फाइबर को टाइटेनियम डॉईऑक्साइड के नैनो पार्टिकल्स का प्रयोग किया गया है। इस

कपड़े की विशेषता यह है कि यह यूवी, के अलावा दिखने और नहीं दिखने लायक रोशनी

को भी परावर्तित करने की क्षमता रखता है। वैज्ञानिक परिभाषा में इस कपड़े को एक

आइना भी माना जा सकता है, जो रोशनी को परावर्तित कर देता है। परीक्षण में इस कपड़े

से पांच डिग्री तापमान को कम करने में कामयाबी मिली है। वैज्ञानिकों ने इसके बेहतर

परीक्षण के लिए इस रासायनिक कपड़े के साथ एक सफेद कपड़े का मिलान किया है। यह

पाया गया है कि सफेद कपड़े की तुलना में यह कपड़ा पांच डिग्री कम गर्म रहा। इसलिए

ऐसा माना जा रहा है कि मौसम के बदलाव की वजह से यह आइनानूमा कपड़ा लोगों के

इस्तेमाल की चीज बनने जा रहा है।

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