कपड़ा खुद ही गर्म या ठंडा हो जाएगा मेरिलैंड वि.वि. ने किया विकसित

कपड़ा खुद ही गर्म या ठंडा हो जाएगा मेरिलैंड विश्वविद्यालय ने किया विकसित
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  • वैज्ञानिकों ने विकसित किया नये किस्म का फैब्रिक

  • कपड़े पर चढ़ी है खास किस्म की पर्त

  • कार्बन नैनोट्यूब से बंधे हुए हैं इसके रेशे

  • गर्मी छोड़ने अथवा रोकने से तापमान नियंत्रित

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः कपड़ा आम इंसान के बहुत काम आने वाला है।

वैज्ञानिकों द्वारा विकसित इस कपड़े की खासियत है कि यह खुद ही मौसम की जरूरतों को समझता है।

इस जरूरत को समझने की वजह से वह खुद ही गर्म अथवा ठंडा हो जाता है।

इससे लोगों को एक ही कपड़े से ठंडा और गर्मी में एक जैसा आराम मिलेगा।

मेरिलैंड विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं ने इस कपड़े के रेशा को विकसित किया है।

इसमें खास इंतजाम यह किया गया है कि यह अपनी बनावट और उसमें शामिल तत्वों की वजह से

खुद यह तय कर सकता है कि कपड़े के अंदर कितनी गर्मी को जाने देना है।

मौसम ठंडा होने पर कपड़ा अपने अंदर को गर्मी को बाहर निकलने से रोक देता है।

ठीक इसके विपरित जब कपड़ा यह महसूस करता है कि अंदर अधिक गर्मी है तो वह अपने रेशे की खिड़कियों को खोल देता है

ताकि अंदर की गर्म हवा बाहर निकले और रेशे से होते हुए ठंडी हवा अंदर जा सके।

इससे कपड़े के अंदर का तापमान एक जैसा बना रहता है।

साइंस पत्रिका के कल के अंक में इसकी जानकारी प्रकाशित की गयी है।

कपड़ा की जानकारी साइंस पत्रिका में आज ही दी गयी

इस जानकारी में कपड़े की संरचना के बारे में यह बताया गया है कि

इसके रेशों में सामान्य कपड़े की बुनावट के बीच ताप नियंत्रक धातु भी मिलाये गये हैं।

कपड़े के साथ यह पर्त होने की वजह से कपड़ा खुद ही ताप नियंत्रक बन गया है।

जब गर्मी अधिक हो तो कपड़े की यह पर्त ही गर्मी को बाहर निकालने का काम करती है।

यहां तक कि यह इंफ्रारेड विकिरण तक को परावर्तित कर सकता है।

इस शोध से जुड़े विश्वविद्यालय के रसायन विभाग के प्रोफसर यू हुयांग वांग ने बताया है कि

यह कपड़े की पहली तकनीक है, जिसमें इंफ्रारेड किरणों को भी रोकने की क्षमता है।

कपड़े को तैयार करने में दो किस्म के रेशों का प्रयोग किया गया है।

इनमें से एक किस्म का रेशा पानी सोख सकता है जबकि दूसरा पानी को रोकता है।

इनपर कार्बन नैनोट्यूब के लेप चढ़ाये गये हैं। जो वजन में बहुत ही हल्का है।

लेकिन काम में मजबूत है ।

इसी कार्बन धातु के लेप की वजह से कपड़ा दो तरफा काम कर पा रहा है।

गर्मी रोकने अथवा अंदर की गर्मी को बाहर निकालने में यह दो तरफा काम करता है।

इसकी वजह से कपड़े के अंदर का तापमान लगभग एक जैसा बना रहता है।

परीक्षण में यह पाया गया है कि शरीर के अंदर पसीना होने पर यह उसे सोखकर बाहर निकाल देता है।

इस प्रक्रिया में कपड़े के रेशे और करीब आ जाते हैं।

कपड़ा पर खास कार्बन का लेप चढ़ाया गया है

कपड़े के रेशों में इस कसावट की वजह से कपड़े के अंदर से हवा का प्रवाह और बढ़ जाता है और अंदर का तापमान नियंत्रित हो जाता है।

वैज्ञानिकों ने बताया है कि दरअसल कार्बन के इन नैनोट्यूबों की संरचना एक जंजीर जैसी है।

जो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरीके से एक दूसरे के करीब औऱ दूर आते जाते रहते हैं।

इसी विधि से तापमान नियंत्रित होता रहता है।

उनके मुताबिक जिस तरीके से रेडियो एंटेना को घूमाने से तंरग की स्थिति बदल जाती है,

ठीक उसी तरह इलेक्ट्रोमैग्नेटिक परिस्थिति तापमान नियंत्रण में भी काम करती है।

वांग कहते हैं कि सोचने में तो यह बहुत आसान सा लगता है

लेकिन इसे उस स्थिति तक तैयार करने का परिश्रम बहुत अधिक रहा है।

इसी शोध से जुड़े रहे वहां के भौतिकी विभाग के प्रोफसर मिन ओयांग कहते हैं कि

दरअसल इंसान क्या किसी भी जानवर का शरीर भी एक रेडियेटर की तरह है जो गर्मी छोड़ता रहता है।

इसी गर्मी छोड़ने की प्रक्रिया को कम अथवा अधिक करने के लिए हम अलग अलग किस्म के कपड़े पहनते हैं।

इस बार तो कपड़ा तैयार किया गया है, वह एक साथ दोनों ही काम कर सकता है।

इसका परीक्षण समाप्त होने के बाद अब कपड़े के व्यापारिक उत्पादन की तैयारियां चल रही हैं।

इसके पूरा होते ही यह कपड़ा दुनिया भर के लोगों के लिए उपलब्ध करा दिया जाएगा।

इससे दुनिया में कपड़े की कुल खपत में भी जबर्दस्त कमी आने का अनुमान व्यक्त किया गया है।

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