fbpx Press "Enter" to skip to content

पृथ्वी की गहराई के हल्के भूकंप जमीन के खिसका रहे हैं

  • जमीन के ऊपर महसूस नहीं होता है यह

  • एक सीमा के बाहर यह ऊपर की तरफ होगा

  • अंदर में जमीन सीढ़ी के जैसी बनती चली जा रही

  • कुछ इलाकों में चुपचाप लेकिन बढ़ रहा है भीषण खतरा

राष्ट्रीय खबर

रांचीः पृथ्वी की गहराई में कुछ इलाको में छोटे छोटे भूकंप आ रहे हैं। जमीन के ऊपर इन

भूकंपों का कोई ज्यादा प्रभाव तो नजर नहीं आता। लेकिन भूगर्भशास्त्री इनसे चिंतित हैं।

वैज्ञानिकों ने पाया है कि काफी अधिक गहराई में हो रहे इन भूकंपों की वजह से कई इलाके

की जमीन धीरे धीरे खिसकती जा रही है। एक खास सीमा तक यह कोई असर नहीं

दिखायेगा लेकिन उस सीमा के बाद यह सारे विशाल भूखंड तेजी से नीचे की तरफ सरकते

चले जाएंगे। वैसी स्थिति में बहुत बड़े भूकंप और जमीन के खिसककर समुद्र में जाने की

वजह से विशाल सूनामी का खतरा बढ़ रहा है। जिन इलाकों को इसके लिए अधिक

संवेदनशील समझा गया है उनमें कनाडा से लेकर उत्तरी कैलिफोर्निया तक का इलाका

सबसे अधिक खतरनाक बनता जा रहा है। इन इलाकों में पहले भी आयी तबाही का असली

कारण पृथ्वी की गहराई में होने वाले उथल पुथल से जुड़ा हुआ है। शोध के दौरान यह पाया

गया है कि जमीन से काफी नीचे होने वाले इन्हीं भूकंपों की वजह से नीचे से जमीन की

परत खिसकती जा रही है। पेन विश्वविद्यालय के शोध कर्ता ए मैकेंजी कहते हैं कि

लगातार इसका क्रम जारी रहने की वजह से सारा दबाव किसी एक दिशा में केंद्रित हो रहा

है। इसी एक दिशा में जोर पड़ने की वजह से ही पृथ्वी की गहराई में जमीन के विशाल परत

नीचे की तरफ खिसकते जा रहे हैं।

पृथ्वी की गहराई में सारे भूखंड जुड़े हुए हैं

यह हम सभी जानते हैं कि पृथ्वी का बाहरी आवरण जैसा भी दिखता हो, अंदर से यह

टेक्नोनिक प्लेटों के माध्यम से जुड़ा हुआ है। जब कभी दो टेक्नोनिक प्लेटों में रगड़ होती

है तो बड़ी तबाही भी आती है। पृथ्वी के कुछ हिस्सों में टेक्नोनिक प्लेटों की रगड़ की वजह

से एक प्लेट के ऊपर उठने तथा दूसरे के नीचे धंस जाने का क्रम अब भी जारी है।

इन टेक्नोनिक प्लेटों की संरचना में जब कभी बीच में दरार आती है, जिसे वैज्ञानिक भाषा

में फॉल्ट लाइन कहते हैं तो अंदर की ऊर्जा वहां से भी बाहर निकलते हुए इस रगड़ की गति

को और तेज करती चली जाती है। जहां जहां ऐसे फॉल्ट लाइन हैं, वहीं पर पृथ्वी के ऊपर

ज्वालामुखी बने हैं। अब बताया जा रहा है कि प्रशांत महासागर के तट से लेकर कैसकेट

पर्वत श्रृंखला के बीच माउंट सेंट हेलेंन, माउंट हूड और माउंड रेइनर जैसे ज्वालामुखी इसी

वजह से पैदा हुआ है। यह लगभग एक कतार में हैं और फॉल्ट लाइन के ऊपर हैं। इसी

इलाके में वर्ष 1700 में एक भीषण भूकंप आया था। तब से अब तक कोई बड़ा भूकंप यहां

नहीं आया है। लेकिन जमीन के नीचे से खिसकते चले जाने का क्रम जारी है। वैज्ञानिकों ने

यह भी पाया है कि जैसे जैसे पृथ्वी की गहराई में यह काम होता है, अगले खिसकने का दौर

और अधिक गहराई में चला जा रहा है। भले ही इसकी गति अभी बहुत कम हो लेकिन

इसके एक सीमा के बाद बहुत बड़ी तबाही की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।

भूकंप की असर नीचे की तरफ और खतरा और बढ़ रहा

पेन स्टेट विश्वविद्यालय के प्रोफसर केविन पी फरलांग कहते हैं कि दरअसल भूकंप की

दिशा इस प्लेटों के आगे बढ़ने की विपरित दिशा में होता है। लेकिन इन मामलों में प्लेटों

का प्रभाव और गहराई तक जा रहे हैं। इसी वजह से खतरा ज्यादा बढ़ रहा है। किसी एक

सीमा तक पृथ्वी की गहराई तक इसके प्रभाव के जाने के बाद एक समय यह ऊपर की

तरफ आयेगा। उस स्थिति में इतनी अधिक ऊर्जा निकलेगी कि बहुत बड़े भूकंप और

उसकी वजह से उत्पन्न सूनामी का प्रभाव भी विनाशकारी होगा। इस शोध के आगे बढ़ाते

हुए वैज्ञानिकों ने यह भी पाया है कि न्यूजीलैंड का इलाका भी इसी भूस्खलन के दायरे में

आ रहा है। दरअसल पृथ्वी की गहराई में इसका प्रभाव भी गुरुत्वाकर्षण की वजह से

निर्धारित होता है। जैसे जैसे इसका असर ऊपर की तरफ आयेगा, खतरा उतना अधिक

होगा। इस किस्म के संभावित भूकंपों को वैज्ञानिक मेगाथ्रस्ट भूकंप का दर्जा दे रहे हैं।

अब तक के शोध में पृथ्वी के अंदर 22 मील की गहराई तक के घटना को समझने में

वैज्ञानिकों को मदद मिली है। उनका आकलन है कि इसी निरंतर प्रक्रिया की वजह से

जमीन के नीचे सीढ़ी जैसी स्थिति बनती जा रही है। जिस दिन यह सीढ़ी सीधे खिसक

गयी उसी दिन जो क्रम चालू होगा, वह काफी लंबे समय तक जारी रहेगा।

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from पर्यावरणMore posts in पर्यावरण »
More from प्रोद्योगिकीMore posts in प्रोद्योगिकी »
More from विश्वMore posts in विश्व »

One Comment

... ... ...
%d bloggers like this: