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परिवार चलाने के लिए मजबूरी में बेच दी अपनी एक एक किडनी

परिवार चलाने के लिए मजबूरी में बेच दी अपनी एक एक किडनी
  • लॉकडाउन की मजबूरी का भी फायदा उठाया दलालों और अस्पतालों ने

  • असम में अंतरराष्ट्रीय अंग तस्करी का भंडाफोड़

  • अवैध किडनी व्यापारियों के साथ हेमंत की तस्वीर

  • मां-बेटे सहित पांच दलाल अब तक गिरफ्तार

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: परिवार चलाने की मजबूरी क्या कुछ ना करने को बाध्य कर देती है। इसी

सिलसिले में ऐसी मजबूरी में फंसे लोगों का नाजायज फायदा उठाने वाले असम में किडनी

के अवैध कारोबार का अब तक का सबसे बड़े रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। असम पुलिस ने

हाल ही में मोरीगांव जिले में एक अंतरराष्ट्रीय अवैध मानव अंग व्यापार रैकेट का भंडाफोड़

किया है। इस मामले में मां-बेटे की जोड़ी सहित कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किया।

पुलिस रिपोर्ट के अनुसार अब तक अंतरराष्ट्रीय अंग तस्करी के आरोपियों में मां और बेटे

की जोड़ी सहित 5 दलाल गिरफ्तार किए गए हैं। दो आरोपी फरार हो गए हैं। गिरफ्तार

महिला और उसके साथी जिले के दक्षिण धरमतुल गांव में किडनी का अवैध कारोबार चला

रहे थे। उन्होंने परिवार चलाने की मजबूरी में फंसे गरीब ग्रामीणों को 4-5 लाख रुपये देने

का लालच दिया, अगर उन्होंने कुछ बीमार लोगों और संगठनों को अपनी किडनी दान कर

दी। माना जा रहा है कि गांव के 20 लोगों ने एक-एक किडनी बेची है। हाल ही में असम में

मानव गुर्दे के व्यापार की घटनाएं सामने आई हैं जिसने राज्य में लोगों के बीच गंभीर

चिंता बढ़ा दी है। सरकार भी दबाव में आ गई है क्योंकि इस अवैध कारोबार की जड़ का

पर्दाफाश करना समय की मांग बन गया है। गुवाहाटी से 85 किलोमीटर पूर्व मोरीगांव

जिले का धरमतुल गांव किडनी की अवैध खरीद-फरोख्त की वजह से सुर्खियों में है। गांव

की विलेज डिफेंस पार्टी ने किडनी बेचने वाले गिरोह की पोल तब खोली, जब उन्होंने एक

महिला और उसके बेटे को गांव के एक गरीब से कुछ कागजात पर दस्तखत करवाते देखा।

परिवार चलाने की मजबूरी वालों से दलाल संपर्क करते थे

परिवार चलाने में मजबूर गरीब पैसे के बदले अपनी किडनी बेचने जा रहा था। पुलिस ने

मामले में केस दर्ज कर तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। गांव में कम से कम अबतक 12

लोगों ने जो परिवार चलाने की मजबूरी अथवा कर्ज में डूबे हुए थे, ने पुलिस को लिखित में

दिया है कि वो पैसे के लिए किडनी बेच रहे थे। हालांकि, किडनी बेचने वालों को कभी उतनी

रकम नहीं मिली, जितने का वादा उनसे किया गया था। इस गोरखधंधे में कोलकाता का

एक अस्पताल भी शामिल है। इसी अस्पताल में किडनी रैकेट चलाने वाले किडनी

ट्रांसप्लांट करवाता था। ये अस्पताल पहले से ही पुलिस राडार पर था। धरमतुल गांव के

निवासी 37 वर्षीय सुमंत दास पेशे से मिस्त्री हैं। लॉकडाउन की वजह से पिछले एक साल से

उनके पास कोई काम नहीं था। उनकी आर्थिक स्थिति दयनीय हो गई थी। इसके अलावा

उनके बेटे के दिल में छेद है। जिसके इलाज के लिए उन्हें पैसे की जरूरत थी। ऐसे में सुमंत

दास ने परिवार चलाने की इसी मजबूरी में किडनी गिरोह को पांच लाख में अपनी किडनी

बेचने का फैसला किया। सुमंत बताते हैं कि लाचारी के कारण उन्होंने अपनी एक किडनी

बेच दी लेकिन उन्हें पांच लाख की जगह सिर्फ डेढ़ लाख रुपये ही दिए गए। सुमंत अब

बीमार रहते हैं। वो कहते हैं कि उनसे कोई भी बोझ उठाया नहीं जाता। वो भारी और

मेहनत वाला काम नहीं कर सकते। सुमंत की पत्नी ने कहा कि बेटे की बीमारी और

महाजन के कर्ज की वजह से किडनी बेचने का फैसला लिया था। ताकि कर्ज चुकता कर

सकें और बेटे का इलाज भी करवा सकें, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

कोलकाता जाकर किडनी बेच आते थे मजबूर लोग

परिवार चलाने को मजबूर लोग कोलकाता जाकर किडनी बेचकर आते थे। हमें इसका पता

चल रहा था लेकिन हम इसका भंडाफोड़ नहीं कर रहे थे। ऐसा नहीं है कि किडनी बेचने वाले

सभी मजबूर थे। कुछ लोगों ने आसानी से पैसा कमाने के लिए भी किडनी बेची है। सिर्फ

पुरुष ही नहीं बल्कि गांव की महिलाएं भी इस गिरोह का शिकार हुई हैं।

इधर, पुलिस ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। पुलिस अब दलालों और किडनी लेने

वालों को भी ढूंढ़ रही है। पुलिस का मानना है कि यह अंतरराज्यीय गोरखधंधा बहुत बड़ा

है, जिसमें कई लोग शामिल हो सकते हैं। जैसे ही गिरफ्तारी की भनक लगी कोलकाता में

किडनी बेचने गए कई शख्स वहां से भाग खड़े हुए। वहां से लौटे एक युवक ने कहा, “मुझे

मुफ्त चावल तो मिलता है लेकिन वह काफी नहीं है, इसलिए मैंने किडनी बेचने का फैसला

किया था। मैं यह भी सोच रहा था कि यह फैसला सही है या गलत लेकिन अपनी पत्नी के

साथ मैं कोलकाता से भागकर गांव आ गया। दिलचस्प है कि असम के लोग हैरान हो गया

जब अवैध किडनी व्यापारियों के साथ असम के मुख्यमंत्री हेमंत विश्व शर्मा के तस्वीर

सोशल मीडिया में वायरल हो गया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा सहित

भाजपा नेताओं के साथ मानव अंग व्यापार में लिप्त होने के आरोप में गिरफ्तार एक

व्यक्ति की तस्वीरें देखने के बाद राज्य भाजपा में घमासान मचा हुआ है।

बड़े नेताओं के साथ तस्वीर सोशल मीडिया में वायरल

असम पुलिस ने आज रात 28 वर्षीय नीतू मणि दास को गिरफ्तार किया। द्रंग एसपी

सुशांता बिस्वा सरमा ने बताया कि मोरीगांव थाने में अवैध अंग तस्करी के एक मामले में

पुलिस की टीम ने द्रंग जिले के दलगांव थाना अंतर्गत धेकरीगांव स्थित उनके आवास से

उन्हें गिरफ्तार किया ।अब मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, कमलपुर से भाजपा विधायक

दिगंता कलिता और अन्य भाजपा नेताओं के साथ दास की तस्वीरें सोशल मीडिया पर

सामने आई हैं। हालांकि यह तुरंत पता नहीं चल पाया है कि वह सत्तारूढ़ भाजपा के

सदस्य हैं या नहीं। मोरीगांव के बाद नौगांव और डिब्रूगढ़ में नए अंग व्यापार का भंडाफोड़

होने के साथ ही सवाल यह है कि इस मामले में कथित तौर पर शामिल लोगों की तत्काल

गिरफ्तारी क्यों नहीं हो रही है। इस अवैध कारोबार का पर्दाफाश करते हुए यह बात प्रकाश

में आई कि एक ब्रोकर सर्कल करीब 30 लोगों को पहले जीएमसीएच ले गया जहां से

उन्होंने फर्जी पहचान बनाने वाले किडनी प्रत्यारोपण के लिए आधिकारिक पत्र जारी

किया। दलाल सर्किल मोरीगांव के करीब 30 लोगों को नारायण हृदयालय के पास ले गया,

जो कोलकाता में रवींद्रनाथ टैगोर के नाम पर है और मानव किडनी के अवैध कारोबार के

बदले में 5 से 6 लाख रुपये का ठेका देने का वादा किया था। शुक्रवार को असम के अन्य

जिलों से भी किडनी बेचने के ऐसे ही मामले प्रकाश में आए। नौगांव और डिब्रूगढ़ में आज

गुर्दे के विक्रेताओं को पाया गया है, जहां इस अंग बेचने का मूल कारण एक बार फिर खराब

वित्तीय स्थिति रही है।

कई नामों का भी स्थानीय स्तर पर खुलासा हो गया

नौगांव में इस अवैध अंग व्यापार के पीछे प्रांजल बोर्डोलोई नाम के एक व्यक्ति का आरोप

लगाया गया है और एक अन्य, प्लाबन बोरठाकुर को मोरीगांव अंग व्यापार की घटना में

गिरफ्तार किया गया है। अंग तस्करी संभवतः मानव तस्करी के सबसे गुप्त रूपों में से

एक है जो इस दुनिया में चल रहा है। अंगों की एक वैश्विक कमी उद्योग के लिए गरीब

आबादी पर भरोसा करने के लिए दानदाताओं और अमीर आबादी प्राप्तकर्ताओं होने के

लिए प्रेरित किया है। दुनिया में अंग तस्करी का लक्ष्य सामान्य गरीब और कमजोर

आबादी है जो इस भयानक व्यापार का शिकार हो जाती है। ऐसी कई घटनाएं होती हैं जहां

लोगों को संज्ञाहरण के तहत रखा जाता है और फिर वे अपने अंगों को गायब करने के लिए

जागते हैं, या यहां तक कि अंगों के लिए हत्या कर दी जाती है। नियोक्ताओं/दलालों आम

तौर पर लोग हैं, जो एक ही समुदायों या एक कमजोर आबादी की जातीयता से हो सकता है

ताकि विश्वास संबंधों को आसान बनाने के लिए कर रहे हैं। इसके बाद दलाल अंग

आपूर्तिकर्ताओं से बड़ी रकम की तरह वादे करते हैं या कर्ज से रिहाई करते हैं और उन्हें

समझाते हैं कि इस अंग को जीने के लिए जरूरत नहीं है।

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