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ऐसे लोगों का ईलाज तो पीठ पर बेंत ही है बातों से तो मान नहीं रहे

रांचीः ऐसे लोगों को भी जनता कर्फ्यू के दौरान रांची के कई इलाकों में देखा गया। कुछ

लोग सिर्फ शहर के विभिन्न इलाकों में तमाशा देखने निकल पड़े थे। ऐसे लोगों को तर्क

से समझाना बहुत कठिन हैं। वैसे भी हर इलाके में उद्दंड किस्म के कुछ जीव ऐसे पाये ही

जाते हैं, जिन्हें कोई भी अच्छी बात अच्छे तरीके से बताने पर समझ में नहीं आती। ऐसे

लोगों का ईलाज वही है जो अड़ियल बैल के साथ होता है। जब तक लाठी नहीं पड़ेगी,

बात इसके भेजे के अंदर नहीं जाती।

जनता कर्फ्यू लगा है, दूसरे सारे लोग अपने अपने घरों के अंदर बंद है। ऐसे में सड़क पर

क्रिकेट खेलते ऐसे बहादुर अपने साथ साथ अपने तमाम घरवालों को किस खतरे में डाल

रहे हैं, इसकी समझ शायद इन्हे होने के बाद भी नहीं है। लोगों को इस तरीके से घरों में

रहने का निर्देश सिर्फ इसलिए दिया जा रहा है ताकि कोरोना के संक्रमण को फैलने से

रोका जा सके। यह स्पष्ट हो चुका है कि कोरोना का प्रसार भारत में हो चुका है। जैसे

जैसे दिन बीतते जाएंगे, रोगियों की संख्या में बढ़ोत्तरी होती जाएगी। लेकिन हमें इस

बात को याद रखना होगा कि हमारे देश में इटली जैसे विकसित चिकित्सा सुविधाएं नहीं

हैं। इसलिए संक्रमण के बाद होने वाले ईलाज से बेहतर है कि उससे बचाव किया जाए।

ठंड का मौसम बीत रहा है और यह उम्मीद की जा रही है कि अधिक तापमान की

स्थिति में इस वायरस का प्रकोप समाप्त हो जाएगा। लेकिन बात बचाव की है।

ऐसे लोगों को मार पड़ेगी तो बात तुरंत समझ में आयेगी

यूं ही कोरोना से पीड़ित होने वाले सारे रोगी मर ही जाएंगे, ऐसा सोचना भी गलत होगा।

भारत में कोरोना से पीड़ित लोगों में से तीस लोग स्वस्थ होकर अपने अपने घरों में लौट

चुके हैं। इसलिए वायरस का हमला होने के बाद भी युवाओं और बेहतर शारीरिक

प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग इससे पार पा जाएंगे। खतरा सिर्फ अधिक उम्र के लोगों

और बीमारों को अधिक है। हम सरकारी निर्देशों की अवहेलना कर अपने ऊपर वायरस

का हमला होने की खुली छूट दे रहे हैं। हो सकता है कि क्रिकेट खेलते नजर आने वाले

महानुभावों की शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता अधिक हो लेकिन जो संक्रमण वे अपने साथ

अपने घर के अंदर ले जाएंगे, उससे घर के सारे सदस्य बच पायेंगे, इसकी गारंटी कौन

लेगी। इसलिए जनता कर्फ्यू के बाद जब लॉक डाउन का एलान हो चुका है तो तमाशा

देखने और खुद को स्मार्ट बताने वालों की पीठ पर बेंत ही इसका सही ईलाज हो सकता

है।

एक और सज्जन बीती दिन पुलिस से माला पहनते हुए भी नजर आये थे। वह अपनी

मोटरसाइकिल पर तीन सवारी बैठाकर कहीं जा रहे थे। गनीमत है कि पुलिस ने परिवार

के सदस्यों के सामने सिर्फ माला पहनाकर उनका स्वागत किया। लेकिन ऐसे लोगों का

बेहतर ईलाज क्या हो सकता है, यह हर समझदार समझ सकता है

कहावत है कि लातों के भूत बातों से नहीं मानते हैं।


 

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