मंगल ग्रह पर मिले पानी होने के निशान

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  • यूरोपीय एजेंसी के अंतरिक्ष यान के आंकड़ों का विश्लेषण

  • दक्षिणी छोर पर मिला एक विशाल झील

  • सतह की गहराई में 24 विशाल गड्डे हैं

  • तीन से चार बिलियन वर्ष पूर्व सूख गया पानी

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः मंगल ग्रह पर पहले कभी पानी हुआ करता था।

इस ग्रह पर उतरे कई यानों की मदद से अब वैज्ञानिकों ने वहां पानी के बहाव के आधार पर जीवन की पहचान की है।

लेकिन यह तय है कि यह अत्यंत प्राचीन घटना है।

इस ग्रह के सतह पर होने वाला पानी किन्हीं कारणों से धरती के अंदर चला गया है।

अब अगर वहां पानी मौजूद भी हैं तो वह काफी गहराई में है।

लेकिन मंगल ग्रह पर घूमते यान वहां के विशाल झीलों का दौरा कर चुके हैं।

इन झीलों की बनावट ही यह बताती है कि इनकी संरचना पानी के बहाव की वजह से ही हुई हैं।

मंगल अभियान के तहत पहले मिले आंकड़ों से ही वहां पानी होने की संभावना व्यक्त की गयी थी।

लेकिन यह संभावना कंप्यूटर द्वारा तैयार मॉडलों के आधार पर थी।

अब वहां रोवरों के दौरे और उनके द्वारा भेजी गयी तस्वीरों से झीलों के अंदर की जानकारी मिली है।

इन्हीं नई सूचनाओं के आधार पर यूरोपीय स्पेस एजेंसी के मार्स एक्सप्रेस मिशन के वैज्ञानिक वहां पहले कभी पानी होने के निष्कर्ष पर पहुंचे हैं।

मंगल के जीवन को समझने में जुटे हैं वैज्ञानिक

इस परियोजना से जुड़े वैज्ञानिक दिमित्री टिटोव ने कहा कि

इस जानकारी के बाद हम एक एक कर मंगल ग्रह के प्राचीन जीवन को समझने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।

क्योंकि अगर वहां पानी होने की पुष्टि हो जाती है तो दूसरे ग्रह के प्राणियों के होने के सिद्धांत पर भी आगे काम बढ़ पायेगा।

पिछले वर्ष ही वैज्ञानिकों ने यह संभावना जतायी थी कि

मंग्रल ग्रह के दक्षिणी छोर पर एक बहुत बड़ा झील है, जिसके अंदर पानी अब भी मौजूद हो सकता है।

इस ग्रह के शेष भाग में पानी अब समाप्त हो चुका है।

यूट्रेच्ट विश्वविद्यालय के डॉ फ्रांसिसको सालेसी का कहना है कि

कभी यह ग्रह भी पानी से भरा हुआ था।

बाद में इस ग्रह का मौसम बदल गया।

इसकी वजह से ग्रह पर मौजूद पानी धरती के अंदर समा गया।

मंगल का सारा पानी अंदर ही समा गया

अब वहां पानी होने की पुष्टि होने के बाद प्राचीन काल में वहां के जीवन कैसा था,

इस पर बहस जारी है क्योंकि अब तक पानी होने के अलावा जीवन होने की पुष्टि नहीं हो पायी है।

मंगल ग्रह की झील के अंदर भी अंतरिक्ष यान का रोवर उतरा था

और उसके काफी अधिक दूरी तय की है। इस दौरान इस रोवर ने लगातार तस्वीरें भी खींची है।

वहां के 24 ऐसे गड्डों से मिले आंकड़ों का एक एक कर विश्लेषण किया जा रहा है।

इस बात की भी जानकारी मिली है कि ग्रह की सतह के काफी गहराई में और भी बड़े बड़े गड्डे हैं।

इन आंतरिक गड्डों की बनावट देखने के बाद वैज्ञानिकों ने पाया है कि

वे एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।

ऐसा तभी संभव है जबकि वहां पानी का बहाव होता रहा हो।

मंगल ग्रह पर नासा का वीडियो यहां देखिये

वैज्ञानिकों के अनुमान के मुताबिक करीब तीन से चार बिलियन वर्ष पूर्व

ही मंगल ग्रह की सतह पर का यह पानी सूखता चला गया।

जमीन के अंदर के विशाल सूखे जलागारों के आंकड़ों का विश्लेषण कर वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि वहां मिट्टी, कार्बोनेट और सिलिकेट रहे हैं।

इनकी उपस्थिति की वजह से वहां कभी जीवन होने की भी संभावना व्यक्त की जा रही है।

इन नई सूचनाओं से लैश होने के बाद रुस की अंतरिक्ष एजेंसी रॉसकोमॉस भी अगले साल फिर से एक अंतरिक्ष यान मंगल ग्रह पर भेजने की तैयारी में जुटी है।

दुनिया के प्रसिद्ध डीएनए वैज्ञानिक रोसालिंड फ्रैंकलिन के नाम पर बने इस यान का

रोवर यान मंगल ग्रह पर वर्ष 2021 में उतरेगा और नये सिरे से वहां की धरती के अंदर

की खुदाई कर जीवन के सबूत एकत्रित करने का काम करेगा।

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