Press "Enter" to skip to content

बेल्जियम के पत्रकार और उनकी पत्नी के फोन पर हुई थी सेंधमारी




  • पेगासूस जासूसी का एक और पन्ना विदेश में खुला
  • रवांडा से बेल्जियम के पत्रकार की जासूसी
  • कई अन्य देशों की सरकार कर रही है जांच
  • भारत सरकार की दलील पर फैसला सुरक्षित

राष्ट्रीय खबर




नईदिल्लीः बेल्जियम के एक पत्रकार और उनकी पत्नी के फोन पर पेगासूस स्पाईवेयर का इस्तेमाल

किया गया था। इस मामले की जांच करने वाले बेल्जियम की सरकारी एजेंसी अब मामले की जांच

करने लगी है। बेल्जियम की मिलिट्री इंटैलिजेंस ने अपने देश में संभावित ऐसे लोगों की सूची तैयार

की थी, जिनकी जासूसी होने का अंदेशा था। इसी क्रम में यह पाया गया है कि वहां के पत्रकार पीटर

वेरलिंडेन और उनकी पत्नी के फोन पर पेगासूस का हमला हुआ था। यह भी पता चल गया है कि यह

हमला अफ्रीका देश रवांडा से किया गया था। मामले का पता चलने के बाद खुद पत्रकार पीटर ने कहा

कि इस सूचना से उन्हें कोई हैरानी नहीं हुई है क्योंकि वह दो दशक से अफ्रीका के लिए लगातार

रिपोर्टिंग कर रहे हैं। इसलिए वहां की किसी भी सरकार के निशाने पर उनका होना एक स्वाभाविक

बात है। फिर भी निजता के इस किस्म के हनन को वह कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन मानते हैं।

बेल्जियम की सैन्य जासूसी एजेंसी ने जब इस पर काम प्रारंभ किया तो उन्होंने पहले उनलोगों की

सूची बनायी, जिनकी जासूसी होने का अंदेशा ता। इस सूची में जो नाम आये थे, उनमें स पीटर और

उनकी पत्नी की फोन की अधिकारियों ने जांच की और पाया कि रवांडा नामक अफ्रीकी देश से दोनों

के फोन पर यह जासूसी हुई है। पेगासूस की जासूसी पर बेल्जियम की यह खबर फिर से भारत




सरकार के लिए परेशानी बढ़ाने वाली है, जिसने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट को

जानकारी देने से इंकार करने की बात कही है।

बेल्जियम के पत्रकार की जासूसी से भारत में फिर से चर्चा

दूसरी तरफ स्वतंत्र जांच में इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि देश के अनेक नेताओं, जजों, मंत्रियोँ

और पत्रकारो के अलावा उच्चाधिकारियों तक के फोन की जासूसी हुई है। भारतीय सेना ने

औपचारिक बयान जारी कर यह साफ कर दिया है कि उसका इजरायल की इस कंपनी से कोई

व्यापारिक लेनदेन नहीं हुई है। इसलिए अब यह मामला गृह मंत्रालय के अधीन काम करने वाली

एजेंसियों पर टिका हुआ है। जिसके बारे में सरकार में शामिल कोई भी व्यक्ति खुलकर कुछ नहीं कह

पा रहा है।

दूसरी तरफ दुनिया के अन्य देशों से हो रहे खुलासों से यह साफ होता जा रहा है कि जिस मकसद से

इस स्पाईवेयर को तैयार करने का दावा किया गया है, उसके बदले देश की सरकारें इसका अधिकतर

इस्तेमाल अपने राजनीतिक विरोध को कुचलने के लिए कर रही हैं। भारत के सुप्रीम कोर्ट में केंद्र

सरकार की दलील के बाद शीर्ष अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब उस फैसले के

बाद ही यह तय हो पायेगा कि इस मामले में निजता के हनन की जो शिकायतें की गयी हैं, उसके

जांच की गाड़ी कैसे आगे बढ़ती है।



More from एक्सक्लूसिवMore posts in एक्सक्लूसिव »
More from विश्वMore posts in विश्व »

Be First to Comment

Leave a Reply

Mission News Theme by Compete Themes.
%d bloggers like this: