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हर इंसान के लिए अलग ईलाज की बात कही विशेषज्ञों ने

  • शरीर पर उम्र का असर एक जैसा नहीं होता

  • आ रहा है व्यक्तगित जरूरत की दवा का जमाना

  • हर इंसान की शरीर की जरूरतें अलग अल होती हैं

  • अंदर में एक सौ से अधिक चाभी करते हैं काम

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः हर इंसान की संरचना अलग अलग होती है। इसी वजह से

उम्र का असर भी इंसान पर अलग अलग ही पड़ता है। इसी वजह से

अधिक आयु के लोगों के ईलाज के लिए अब विशेषज्ञ संबंधित इंसान

की जरूरतों के आधार पर ईलाज की बात कर रहे हैं। उनका मानना है

कि अलग अलग संरचना की वजह से एक ही दवा का असर एक जैसा

हो, यह संभव नहीं है। इस वजह से संबंधित व्यक्ति की संरचना की

जांच कर उसकी निजी आवश्यकताओं के मुताबिक ही उसे दवा दी

जानी चाहिए। इस किस्म की खास व्यवस्था से हरेक मरीज को दवा

का सबसे अधिक लाभ प्राप्त होगा। इस अनुसंधान से जुड़े वैज्ञानिकों

ने बताया है कि यह सभी जानते हैं कि किसी भी इंसान की प्रतिरोधक

शक्तियां उसके उम्र के साथ साथ घटती है। इसलिए अलग अलग आयु

वर्ग के इंसान में यह अलग अलग होती है। इसी तरह इंसान की

आतंरिक संरचना में भी काफी अंतर होता है। इसी वजह से एक ही उम्र

के इंसानों का आचरण और शक्ति का अंतर भी हमें खुली आंखों से

दिख जाता है। इसी तरह इंसान की आंतरिक संरचना का बदलाव ही

दवा के प्रभाव को नियंत्रित करता है। सिर्फ खुली आंखों से हम इस

अंतर को देख नहीं पाते। लेकिन एक ही उम्र के दो लोगों के आचरण

और शारीरिक सक्रियता का फर्क तो हमें खुली आंखों से दिखता है।

शोध से जुड़े वैज्ञानिकों ने इस बारे में बताया है कि जिस तरह एक ही

उम्र के दो इंसानों में शराब पचाने की क्षमता अलग अलग होती है ठीक

उसी तरह दवा का प्रभाव भी इंसानी शरीर के भीतर अलग अलग ही

होता है।

हर इंसान की शारीरिक संरचना अंदर से भिन्न भिन्न

इसी वजह से संबंधित व्यक्ति की संरचना को समझते हुए उनकी जरूरतों के मुताबिक दवा

का डोज निर्धारित किया जाए तो उसके बेहतर परिणाम सामने आ

सकते हैं। तीस साल की उम्र के बाद यह अंतर साफ तौर पर परिलक्षित

होता है। शोधकर्ता इसी अंतर को गहराई से जांचने और उसके आधार

पर ईलाज की विधि और दवा निर्धारित करने की बात करने लगे हैं।

इसके पीछे तर्क यह दिया गया है कि दरअसल हर इंसान की जेनेटिक

संरचना अलग अलग होने की वजह से शरीर के अंदर अलग अलग

तरीके से ही होता है। इंसान के शरीर के अंदर की इस संरचना में भी

समय समय पर काफी कुछ बदलाव इसी जेनेटिक कारण से होता

रहता है। यानी जो दवा एक बार सही तरीके से काम करे हो सकता है

कि कुछ समय बाद उस दवा के डोज को बदलने की आवश्यकता

महसूस हो। यह एक निरंतर प्रक्रिया है जिसे आतंरिक संरचना की

जांच से ही समझा जा सकता है। शरीर के अंदर क्या कुछ कमी है, उसे

समझकर अगर दवाई दी जाए तो यह दवा अधिक कारगर तरीके से

अपना प्रभाव दिखा पाती है। दरअसल यह पूरा शोध ही अधिक उम्र की

वजह से उत्पन्न होने वाली परेशानियों को कम करने के ख्याल से

किया गया था। इस शोध से जुड़े बॉयोलॉजिस्ट मिशेल स्नीडर कहते हैं

कि उम्र का असर तो सभी पर होता है। लेकिन शरीर के आंतरिक अंगों

पर इसका प्रभाव अलग अलग होना पहले से प्रमाणित है। इसी वजह

से अब दवा की जरूरत भी शरीर के अंदर की स्थिति की वजह से पड़ना

तय है।

शरीर के अंदर एक सौ आणविक कुंजियों से नियंत्रित होता है सब कुछ

उन्होंने बताया कि शरीर के अंदर करीब एक सौ ऐसे आणविक कुंजी हैं  जो शरीर की पूरी व्यवस्था को संचालित रखने में प्रमुख भूमिका निभाते  हैं। हरेक की यह कुंजियां अलग अलग

तरीके से काम करती हैं। अनेक लोग कम उम्र में ही दिल के मरीज पाये

जाते हैं जबकि ऐसे लोग भी हैं  जो नियमों के खिलाफ आचरण तो

करते हैं लेकिन उनके लीवर पूरी तरह ठीक रहते हैं। यह शरीर के अंदर

मौजूद इन्हीं कुंजियों की वजह से होता है। इसलिए इन कुंजियों में से

कौन सी कुंजी सही तरीके से काम नहीं कर पा रही है, उसे समझना

जरूरी है। इस कुंजी को फिर से अपने तरीके से काम करने लायक बना

देने से मरीज पर उम्र का असर कम पड़ना एक अत्यंत स्वाभाविक

बात होगी। शोध से जुड़े वैज्ञानिक मानते हैं कि इंसान की भोजन

पद्धति भी इन तमाम कुंजियों को सही बनाये रखने में महत्वपूर्ण

भूमिका निभाती है। इसलिए इंसान को बेहतर और पुष्टिकारक भोजन

के प्रति भी अधिक सावधान रहना चाहिए। ऐसा इसलिए जरूरी है

क्योंकि शरीर के अंदर अगर कुछ गड़बड़ी होती है तो उसका तुरंत ही

पता नहीं चल पाता। यह खुली आंखों से नजर भी नहीं आता। शरीर की

प्रतिरोधक क्षमता इससे लड़ने का भरसक प्रयास करती है। लेकिन जब

शरीर इस लड़ाई में अंदर से हार जाता है तब तक समस्या काफी बढ़

चुकी होती है। बेहतर और स्वास्थ्यवर्धक भोजन इसे बिगड़ने से

निरंतर बचाता रहता है

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