हमारे सौर मंडल के ठीक बीच में है विशाल ब्लैक होल

हमारे सौर मंडल के ठीक बीच में है विशाल ब्लैक होल
  • इंफ्रा रेड किरणों की मदद से पता चला

  • तीन तेज किरणों को देखा गया

  • इंफ्रा रेड टेलीस्कोप से पता चला

  • आकार विशाल पर नजर ही नहीं आता

प्रतिनिधि



नईदिल्लीः हमारे सौर मंडल के केंद्र में भी एक ब्लैक होल है। वैज्ञानिकों ने निरंतर शोध के बाद इस ब्लैक होल के अस्तित्व में होने की पुष्टि की है। पिछले 31 अक्टूबर को इस ब्लैक होल के होने की पुष्टि होने के बाद उसकी सूचना अब सार्वजनिक की गयी है।

वीडियो में देखिये कैसे सक्रिय है ब्लैक होल

 

इस काम को पूरा करने के लिए खगोल वैज्ञानिकों ने एक विशाल टेलीस्कोप का इस्तेमाल किया था।

इस टेलीस्कोप की मदद से सैजेटेरियस ए स्टार के क्षेत्र की परख की गयी है।

यह इलाका हमारे सौर मंडल के बीच में है।

इसी क्षेत्र को बतौर ब्लैक होल पहचाना गया है।

दरअसल वैज्ञानिकों ने टेलीस्कोप की मदद से इस क्षेत्र में तेजी से निकलती रोशनी का पीछा किया।

टेलीस्कोप से पीछा किये जाने पर अत्यंत तेज गति से निकलती रोशनी के केंद्र में इस ब्लैक होल के होने की पुष्टि हुई।

यह आकार में इतना विशाल है कि रोशनी की तमाम प्रचलित तकनीकों की मदद से भी इसे नहीं देखा जा सका है।

इसके अत्यंत जोरदार गुरुत्वाकर्षण की वजह से रोशनी में यहां सोख ली जाती है।

इस कारण इसके यहां होने का पता भी नहीं चल पाता है।

जिन रोशनियों के गुजरने के आधार पर इसके होने की पुष्टि हुई है,

वे भी सामान्य रोशनी के मुकाबले सूर्य की रोशनी के तीस प्रतिशत गति से वहां से गुजरती हैं।

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि वहां निरंतर सोखे और अंदर समाहित किये जाने वाले तारों के

गैसों का विकिरण ही इस किस्म की रोशनी पैदा करता है।

हमारे सौरमंडल के इस ब्लैकहोल का चुंबकीय क्षेत्र भी प्रवल

वैज्ञानिकों ने इसे आगे की शोध में यह पाया है कि इसके ईर्दगिर्द अत्यंत शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र है।

इस वजह से वहां के विवरण सामान्य उपकरणों से नजर भी नहीं आते।

वैसे इस उपलब्धि को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि किसी ब्लैकहोल के इतने करीब की कोई भी घटना दर्ज की जा सकी है।

जिस रोशनी को वैज्ञानिकों ने देखा है, उन्हें भी इस ब्लैक होल ने अपने अंदर सोख लिया है।

यहां का गुरुत्वाकर्षण इतना अधिक है कि वहां से रोशनी तक लौटकर नहीं आती।

इसी वजह से यह पूरा इलाका घने काले रंग में छिपा रहता है।

इस ब्लैक होल के होने का पता चलने के बाद वैज्ञानिक यह अनुमान लगा रहे हैं कि

दरअसल शायद पूरे ब्रह्मांड में इसी किस्म के ब्लैक होल के चारों तरफ ही तारा मंडल विकसित होते हैं।

पहले यह समझा गया था कि ब्लैक होल से कुछ भी बाहर नहीं आता है।

लेकिन बाद में पता चला कि कई बार ब्लैक होल भी तारों को निगल लेने के बाद अपने अंदर से नये स्वरूप के तारों को बाहर उछाल देता है।

इस वजह से संपूर्ण ब्रह्मांड में सृष्टि की रचना के केंद्र में ब्लैक होल होने के सिद्धांत पर अब खगोल वैज्ञानिक आगे काम कर रहे हैं।

समझा जा रहा है कि तारामंडल समूह का पूरा इलाका ही इस किस्म के ब्लैक होल के ईर्दगिर्द ही चक्कर काट रहा है।

इसमें नये तारों का सृजन हो रहा है और पुराने तारे इस ब्लैक होल के गुरुत्वाकर्षण में अंदर समा रहे हैं।



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