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पनामा के पास वैज्ञानिकों ने एक लंबी खाई की खोज की है




धरती के नीचे भी है एक विशाल सुरंग
करीब पंद्रह सौ किलोमीटर लंबा है यह
मेंटल के पदार्थ ऊपर पाने से खोज हुई
एक सौ किलोमीटर की गहराई में है यह




राष्ट्रीय खबर

रांचीः पनामा के पास वैज्ञानिकों नें एक लंबी खाई को खोज निकाला है। धरती की गहराई में यह सुरंग करीब डेढ़ हजार किलोमीटर लंबा है। लेकिन यह जानकारी पहली बार मिली है कि यह धरती की गहराई में है। इसके गहराई में होने की वजह से ही अब तक इसके बारे में जानकारी नहीं मिल पायी थी।

यह सुरंग मध्य अमेरिका के पनामा से लेकर पूर्वी प्रशांत महासागर के गैलापागोस द्वीप तक फैला हुआ है। इसलिए अब वैज्ञानिक इस नतीजे पर भी पहुंचे हैं कि पृथ्वी की ऊपरी सतह को भी अब पूरी तरह ठोस नहीं माना जा सकता है। दरअसल धरती की ऊपरी सतह के नीचे स्थित मेंटल के इलाके के पदार्थों के इधर उधर पाये जाने की वजह से यह सवाल उठा था कि आखिर यह ऊपरी सतह तक आते कैसे हैं। बूड्स होल ओशनोग्राफिक इंस्टिट्यूशन के वैज्ञानिकों ने इसे खोजा है।

पनामा के पास मिल रहे थे मैंटल के पदार्थ

खोजकर्ताओं के एक दल ने सारे आंकड़ों का संकलन कर लेने के बाद यह निष्कर्ष निकाला है कि इसी लंबे सुरंग से हवा के तेज झोकों के साथ ही पृथ्वी की गहराई में स्थित पदार्थ बाहर निकलते हैं और इधर उधर चले जाते हैं। इसी खोज की वजह से अब यह भी मान लिया गया है कि धरती के मेंटल के ऊपर भी तेज हवा के झोके होते हैं।




कई बार धरती की बहुत अधिक गहराई में सुक्ष्म जीवों के पाये जाने से भी यह सवाल उठा था कि इन जीवों को धरती की गहराई में सांस लेने के लिए ऑक्सीजन कैसे मिलता है। पनामा के पास इस सुरंग की खोज के बाद ऐसा माना जा रहा है कि धरती के गर्भ में मौजूद पत्थर आदि इसी हवा के झोंके से अंदर से ऊपर की तरफ आते रहते हैं।

सुंरग के तेज हवा के झोकों का असर है यह

पानामा के पास मेंटल वाले पदार्थ अक्सर ही पाये जाने की वजह से इस पर शोध प्रारंभ किया गया था। वूडस होल के शोधकर्ता डेविड बेकारेट कहते हैं कि वहां के तमाम साक्ष्यों और जीवित कोषों की जांच से यह पता चला है। खास तौर पर जब जीवित प्राणियों का खून निकलता है तो ऐसा लगता है कि धरती से मैग्मा निकल रहा हो।

इस खून की जांच से भी मैग्मा के अंशों की पुष्टि हो जाती है। पनामा के पास यह सुरंग गहराई में है और धरती के नीचे वाले हिस्से के लिए एक खिड़की के जैसा काम करता है। यह लंबा सुरंग पनामा के पास धरती से करीब एक सौ किलोमीटर की गहराई में प्रारंभ होता है। इसी वजह से मेंटल के इलाके के पदार्थ इससे ऊपर की तरफ आते रहते हैं। टेक्टोनिक प्लेटों के घर्षण से उत्पन्न परिस्थितियों की वजह से ही पनामा के पास कुछ जीवित ज्वालामुखी भी हैं।



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