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धरती के भीतर समाया हुआ है बाहरी पिंड का विशाल हिस्सा !

  • नये विचार का आधार संरचनाओं में अंतर पाया जाना

  • इसी टक्कर की वजह से चांद टूटकर अलग हुआ था

  • पश्चिमी अफ्रीका और प्रशांत महासागर के नीचे हैं

  • आइसोटोप बताते हैं कि वे पृथ्वी का हिस्सा नहीं

राष्ट्रीय खबर

रांचीः धरती के भीतर कोई विशाल टुकड़ा धंसा हुआ है। यह विशाल टुकड़ा किसी ऐसे तारे

का है जो शायद निर्माण की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाया था। वैज्ञानिक परिभाषा में इसे

प्रोटो प्लैनेट कहा जाता है। यह भी माना जा रहा है कि इस अर्धनिर्मित ग्रह के अचानक से

धरती के भीतर धंस जाने की वजह से ही चांद की सृष्टि हुई थी। इसी माह 52वें लूनार एंड

प्लैनेटरी साइंस की 52वीं बैठक में इस वैज्ञानिक सिद्धांत को प्रस्तुत किया गया है। इसके

समर्थन में कई वैज्ञानिक साक्ष्य भी दिये गये हैं। लेकिन वैज्ञानिकों को एक दल फिलहाल

इस सिद्धांत को स्वीकारने के पक्ष में नहीं हैं। उनके मुताबिक इस खोज पर अभी और शोध

किये जाने की आवश्यकता है। अतिरिक्त साक्ष्य मिलने के बाद ही यह समझ में आयेगा

कि जो सोचा जा रहा है वह वाकई सही है अथवा नहीं। लेकिन इस वैज्ञानिक सिद्धांत का

एक पहलु स्पष्ट है कि धरती के भीतर चार नहीं पांच परतें हैं। इसका खुलासा होने के बाद

ही शोध दल ने कहा है कि वायुमंडल के बाहर से आये इस पिंड का विशाल टुकड़ा धरती में

एक हजार मील की गहराई में धंसा हुआ है। इसके बारे मे यह भी बताया गया है कि

पश्चिमी अफ्रीका और प्रशांत महासागर के नीचे यह अब भी मौजूद है। जिसकी भौगोलिक

संरचना पृथ्वी से कतई मेल नहीं खाती है। इसी संरचना में अंतर की वजह से उसे बाहरी

जगत का पिंड माना जा रहा है, जो आकार में भी विशाल और किसी महादेश से भी बड़ा है।

एरिजोआना स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओँ का दावा है कि जो धरती के भीतर धंसा हुआ

हिस्सा है वह दरअसल गायब हो चुके ग्रह थेइया का हिस्सा है।

धरती के भीतर वहां तक पहुंचना अभी संभव नहीं

इस शोध दल के नेता क्यूआन यूआन के नेत्त्व में काम करने वाले शोध दल ने इसी

सिद्धांत पर अपना शोध प्रबंध भी प्रस्तुत किया है। इस पूरे घटनाक्रम के बारे में वैज्ञानिकों

का आकलन है कि काफी अरसा पूर्व करीब 4.5 बिलियन वर्ष पूर्व मंगल ग्रह के आकार का

एक खगोलीय पिंड पृथ्वी से आ टकराया था। इसी टक्कर की वजह से पृथ्वी का एक टुकड़ा

टूटकर वायुमंडल की परिधि से बाहर निकला और अंततः चंद्रमा में तब्दील हो गया। पृथ्वी

के वायुमंडल से बाहर निकलने के बाद भी वह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से प्रभावित होता है।

साथ ही पृथ्वी पर भी चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण को किसी भी समुद्र में पूर्णिमा और

अमावस्था के वक्त साफ महसूस किया जा सकता है। जो भी खगोलीय पिंड पृथ्वी से आ

टकराया था, उसकी गति तेज थी कि वह धरती के भीतर गहराई तक चला गया। अब वह

हजार किलोमीटर की गहराई में है। लेकिन पूर्व के सर्वेक्षणों में मिले आइसोटोप और अन्य

साक्ष्यों से यह पता चलता है कि यह पृथ्वी का मूल हिस्सा तो नहीं है। इसी वजह से ऐसा

माना जा रहा है कि गायब हो चुके ग्रह थेइसा का एक बड़ा हिस्सा यहां दबा पड़ा है। चंद्रमा

की सृष्टि आखिर कैसे हुई, इस बात पर शोध प्रारंभ करने वाले दल ने कड़ी से कड़ी को

जोड़ते हुए यह निष्कर्ष निकाला है। इसलिए माना जा सकता है कि दरअसल वर्तमान

पृथ्वी अपने मूल स्वरुप के साथ साथ इस बाहरी पिंड को मिलाकर बनी है। चंद्रमा पर भी

इसी गायब हो चुके ग्रह के हिस्से शोध के दौरान उपलब्ध नमूनों में पाये गये हैं।

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रोफसर एडवर्ड यंग कहते हैं कि शायद यह थेइया ग्रह

पृथ्वी और चांद दोनों में समाया हुआ है।

जब यह टकराया तभी चांद टूटकर बाहर निकल गया

शोध दल का आकलन है कि यह बाहरी पिंड का हिस्सा भी पृथ्वी के अन्यतम बड़े हिस्सों में

से एक है और शायद यह धरती के भीतर समाया हुआ अकेले सबसे बड़ा हिस्सा भी है।

एरिजोआना स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफसर एडवर्ड गारनेरो कहते हैं कि जो साक्ष्य शोध दल

ने प्रस्तुत किये हैं, उन्हें अनायास ही खारिज नहीं किया जा सकता है। पृथ्वी पर

उल्कापिंडों की बारिश होती रही है, यह प्रमाणित सत्य है। इसी क्रम में एक ऐसी ही घटना

की वजह से इस धरती पर से डायनासोर जैसे भयानक प्राणी एक ही झटके में विलुप्त हो

गये थे।

इस वीडियो में देखिये कैसे समाप्त हो गये थे डायनासोर

दूसरा तथ्य भी सच है कि पृथ्वी से टूटकर ही चंद्रमा की सृष्टि हुई है। इसके आगे के शोध

के लिए धरती के भीतर से मिट्टी के नमूने हासिल करना वर्तमान विज्ञान में संभव

नहीं है। इसी वजह से उपलब्ध तथ्यों के आधार पर कंप्यूटर मॉडलों का सहारा लेकर

उसकी संरचना का ढांचा तैयार करने की कोशिश जारी है। वैसे अन्य वैज्ञानिक मानते हैं

कि सैद्धांतिक तौर पर यह तर्क सही प्रतीत होने के बाद भी इसके समर्थन में अभी और

वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाये जाने की जरूरत है।

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