Press "Enter" to skip to content

धरती की गहराई में क्रस्ट के पास कई हॉटस्पॉट मौजूद हैं




  • ज्वालामुखी विस्फोट का अध्ययन किया गया
  • क्रस्ट के ऊपर से बनते हैं ज्वालामुखी
  • दबाव से ही पहाड़ बनता चला जाता है
  • रिंग ऑफ फायर इसका उदाहरण ही है
राष्ट्रीय खबर

रांचीः धरती की गहराई में सबसे अंतिम हिस्सा क्रस्ट का होता है। इसके अंदर खौलता हुआ लावा ही है। जब कभी इस क्रस्ट में छेद होता है तो खौलता हुआ यह लावा किसी न किसी छेद से धरती के बाहर ज्वालामुखी के तौर पर निकलता है।




अभी हाल में दो ज्वालामुखी विस्फोट होने के बाद नये सिरे से इस पर अध्ययन किया गया है। दरअसल यह सवाल पहले से ही बना हुआ था कि आखिर ज्वालामुखी विस्फोट किसी पहाड़ पर ही क्यों होता है। इसके संदर्भ में वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि धरती की गहराई में मौजूद ज्वालामुखी के हॉटस्पॉट के ऊप लगातार दबाव बने रहने की वजह से जमीन का वह इलाका ऊपर की तरफ उठ जाता है, जहां से ज्वालामुखी विस्फोट होता है।

हर पहाड़ पर ज्वालामुखी नहीं होती है लेकिन हर ज्वालामुखी एक पहाड़ बन जाने के बाद ही विस्फोट करता है। इसी वजह से इस ज्वालामुखी विस्फोट की वजह को धरती की गहराई में खोजा गया है।

धरती की गहराई की संरचना पर शोध हुआ

वैज्ञानिकों ने आंतरिक संरचन का अध्ययन करते हुए वैसे हॉटस्पॉटों की पहचान करने का दावा किया है जो धरती की गहराई में स्थित हैं। इन्हीं हॉटस्पॉटों की वजह से हवाई द्वीप के ज्वालामुखी के इलाके बने हैं। आइसलैंड और गालापोगोस द्वीप की भी ऐसी ही स्थिति है।

जहां धरती की गहराई में ऐसे केंद्र मौजूद हैं। यह बताया गया है कि ज्वालामुख विस्फोट के केंद्र अक्सर ही टेक्टोनिक प्लेट के किनारे होते हैं, जो आपस में रगड़ की वजह से अंदर के क्रस्ट में दरार पैदा करते हैं। वहां पर इस घर्षण की वजह से जो भीषण ऊर्जा पैदा होती है, वह अपनी प्रकृति के मुताबिक ऊपर की तरफ आती है।




जहां जहां कमजोर मिट्टी और पत्थर होते हैं, वहां से यह ज्वालामुखी ऊपर का दबाव बनाती है। जब कभी पृथ्वी की गहराई का यह दबाव ऊपर की संरचना से अधिक हो जाता है तो पहाड़ फटते हुए लावा का प्रवाह निकल पड़ता है।

दबाव से जमीन उठकर पहाड़ बन जाता है

इसी शोध के तहत यह पाया गया है कि आम तौर पर ज्वालामुखी इन टेक्टोनिक प्लेटों की सीमा के ऊपर अवस्थित होते हैं। कई बार असली केंद्र ठीक ज्वालामुखी पहाड़ के नीचे पृथ्वी की गहराई में नहीं होता है। सिर्फ ऊपरी संरचना जहां जहां कमजोर मिलती है, वहां से लावा ऊपर की तरफ आता चला जाता है।

इसी वजह से ज्वालामुखी विस्फोट से पहले धरती की गहराई से भूकंप के झटके भी महसूस किये जाते हैं। पृथ्वी की गहराई में स्थित टेक्टोनिक प्लेटों की संरचना की वजह से ही धरती के ऊपर रिंग ऑफ फायर बना हुआ है, जिसमें चारों तरफ ऊपर के इलाके में ज्वालामुखी फैले हुए हैं।

वैसे इस शोध के तहत यह भी पाया गया है कि कई बार नीचे से तेज गति से क्रस्ट के इलाके से निकलते पत्थर भी ऊपर की संरचना को बदल देते है। अंदर का तापमान बदलने की वजह से ही पृथ्वी के नीचे का माहौल बदलता चला जाता है। इसी वजह से अंदर जमा धुआं और राख सबसे पहले ज्वालामुखी विस्फोट के प्रारंभ होते ही बाहर निकलता है।



More from HomeMore posts in Home »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from पर्यावरणMore posts in पर्यावरण »
More from प्रोद्योगिकीMore posts in प्रोद्योगिकी »

One Comment

Leave a Reply

Mission News Theme by Compete Themes.
%d bloggers like this: