fbpx Press "Enter" to skip to content

उस प्रतिरोधक की पहचान का काम आगे बढ़ा जो कोरोना को रोकता है

  • इम्नुनिटी की यह स्थिति बहुतों में प्राकृतिक भी
  • संक्रमण होने के बाद भी वायरस मर जाता है
  • खून में प्रतिरोधक भी खुद ब खुद बनता है
  • मरीज के ठीक होने के बाद खत्म होता है
प्रतिनिधि

नईदिल्लीः उस प्रतिरोधक की पहचान में वैज्ञानिकों ने तरक्की कर ली है, जो कोरोना

संक्रमण से लड़ने में सक्षम हैं। लंदन के किंग्स कॉलेज के शोध कर्ताओं ने कई अन्य टीमों

के साथ जुड़कर यह काम किया है। इसके आधार पर वे मानते हैं कि इम्युनिटी प्रदान करने

यह तत्व अनेक लोगों में प्राकृतिक तौर पर भी मौजूद होता है। इस प्रतिरोधक की वजह से

ही कोरोना वायरस को शरीर में मारक प्रभाव डालने का मौका ही नहीं मिलता है। इस शोध

से जुड़े तथ्यों की परख अभी सेंट थॉमस अस्पताल में की जा रही है। इसकी जानकारी

एंड्रियान हेयडे ने दी है। वह और उनके सहयोगी इस शोध से जुड़े हुए हैं।

इससे संबंधित एक रोचक वीडियो भी देख लीजिए

दरअसल इस बात का पता चलने के बाद शोध को और परिष्कृत किया गया कि अनेक बार

प्रारंभिक अवस्था में कोरोना की जांच में नेगेटिव रिजल्ट आते हैं। यानी कोरोना संक्रमण

होने के बाद भी अगर जांच प्रारंभ में की गयी तो मरीज को कोरोना है, इसका पता नहीं चल

पाता है। इसी वजह से कोरोना की बीमारी से ठीक हो चुके मरीजों के सारे आंकड़ों के

विश्लेषण के बाद प्रतिरोधक की पहचान का काम तेज हो गया है। जैसे जैसे कोरोना के

रोगियों के आंकड़े बढ़ रहे हैं, वैसे वैसे जांच का दायरा भी फैलता जा रहा है। अनेक ऐसे

मामले भी आये हैं, जिनमें मरीज को कोरोना संक्रमण होने के बाद भी उन्हें कोई खास

परेशानी नहीं हुई। इनमें से कुछ में तो कोरोना के लक्षण तक नहीं देखे जा सके थे। सिर्फ

जांच से उन्हें कोरोना होने की पुष्टि हुई थी।

उस प्रतिरोधक की पहचान से वायरस की पहचान आसान होगी

उस प्रतिरोधक की पहचान का काम आगे बढ़ने पर दो किस्म की गतिविधियों की

वैज्ञानिकों को मिली है। इन दोनों का गहन विश्लेषण किया गया है। इनमें से पहला तो

किसी दवा अथवा वैक्सिन की वजह से शरीर में तैयार हुआ प्रतिरोधक है। दूसरा शरीर की

आंतरिक प्रतिक्रियाओं की वजह से तैयार प्रतिरोधक है, जो कोरोना वायरस को परास्त

करने की प्राकृतिक क्षमता रखता है। इसके तहत यह प्रतिरोधक विधि उस बी और टी कोष

को ही समाप्त कर देती है, जो कोरोना वायरस के वाहक बनते हैं। इंसान से इंसान तक

पहुंचने वाले इस वायरस का शरीर में प्रवेश होते ही यह प्रतिरोधक उसे समाप्त करने का

काम अपने आप ही प्रारंभ कर देता है। उसकी भूमिका किसी ऑटोमैटिक मशीन की तरह

होती है, जो खुद ही संकेत पाकर चालू हो जाता है।

जांच के अगले दौर में 63 लोगों के खून के नमूनों की जांच की गयी है। यह सारे मरीज सेंट

थॉमस और एक अन्य अस्पताल में भर्ती थे। इनके खून का विश्लेषण किया गया। दूसरी

तरफ अन्य अस्पतालों में भर्ती वैसे अन्य मरीजों के खून के नमूने भी लिये गये, जो

कोरोना से मुक्त थे। कुछ और खून के नमूने ऐसे भी थे, जो ठीक हो चुके कोरोना के मरीजों

के थे। इन सभी आंकड़ों के विश्लेषण और अध्ययन के आधार पर शरीर में मौजूद उस

प्रतिरोध की पहचान का काम आगे बढ़ाया गया है। इसके तहत प्लासमैसाइटोइड डेंड्रिटिक

कोषों के खत्म होने, बासोफिल से घट जाने और सीडी 4 और सीडी 8 के टी कोषों के

अतिरिक्त सक्रिय हने का पता चला है। यह चंद वैसी घटनाएं हैं तो वर्तमान में कोरोना के

संक्रमण से सीधे तौर पर जुड़ी हुई नजर आ रही हैं।

कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों में यह गुण मौजूद नहीं

उस प्रतिरोधक के बारे में यह स्पष्ट हुआ कि कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों में अब यह

गुण मौजूद नहीं हैं। यानी यह एक ऐसी प्रक्रिया थी, जो जरूरत समाप्त होने के बाद खुद ही

समाप्त हो चुकी है। आइपी10 के बढ़े होने का प्रमाण उन मरीजों में भी नहीं मिला, जो

दूसरी बीमारियों की वजह से अस्पतालों में भर्ती थे। इन्हीं आंकड़ो के आधार पर वैज्ञानिक

यह मानते हैं कि टी सेल की कार्यकुशलता को बढ़ाने में आइएल सात का इस्तेमाल किया

जा सकता है। सेंट थॉमस अस्पताल में भी वर्तमान में इस विधि की जांच चल रही है।

इनमें से कुछ मामलों में आइएल 7 के साथ साथ आइपी 10 को भी मिलाया गया है। दोनों

के आंकड़ों का नियमित विश्लेषण किया जा रहा है ताकि कोरोना से मुक्ति का कोई स्थायी

मार्ग निकाला जा सके।


 

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from कोरोनाMore posts in कोरोना »
More from जेनेटिक्सMore posts in जेनेटिक्स »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from लाइफ स्टाइलMore posts in लाइफ स्टाइल »
More from विज्ञानMore posts in विज्ञान »
More from वीडियोMore posts in वीडियो »
More from स्वास्थ्यMore posts in स्वास्थ्य »

2 Comments

Leave a Reply