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सौर कणों के भीषण तूफान को लगातार झेल रहा है सूर्य की तरफ बढ़ता यान




  • पार्कर सोलर प्रोव उसके और करीब पहुंचा है
  • भीषण टक्कर की वजह से प्लाज्मा विस्फोट
  • इससे भविष्य के यानों का मार्ग स्पष्ट होगा
  • 24 चक्कर काटकर सूरज के करीब जाएगा

राष्ट्रीय खबर




रांचीः सौर कणों के भीषण तूफान के बीच से नासा का पार्कर सोलर प्रोव आगे बढ़ रहा है। इन कणों

की बारिश को लगातार झेलने की वजह से वह प्लाज्मा विस्फोट भी झेल रहा है। गनीमत है कि

वैज्ञानिकों ने पहले से इनका अनुमान लगाते हुए ही इस यान को डिजाइन किया है। इसी खास

डिजाइन की वजह से यह यान अब तक बचा हुआ है। वैसे इन तूफानों से गुजरते हुए यह यान नये

आंकड़े भी संग्रहित कर रहा है जिससे इन सौर कणों के तूफानों के बारे में नियंत्रण कक्ष को नई नई

जानकारी मिलती जा रही है। वर्ष 2018 में सूर्य को करीब से देखने और समझने के लिए नासा द्वारा

रवाना किया गया यह यान अभी और आगे जाएगा। इस यान के अंदर लगे यंत्रों को बचाये रखने के

लिए खास किस्म के बचाव पद्धति का इस्तेमाल किया गया है। साथ ही पृथ्वी के नियंत्रण कक्ष से

अपनी यात्रा के दौरान संपर्क टूट जाने के बाद यह सारे आंकड़ों को खुद में संग्रहित करता रहता है।

दोबारा जब नियंत्रण कक्ष से संपर्क स्थापित होता है तो इन संग्रहित आंकड़ों को वहां तक भेज देता

है। इसी वजह से बीच बीच में उससे प्राप्त होने वाले संदेश बाधित होते रहते हैं। मजेदार बात यह है

कि अपनी इस यात्रा के दौरान कई अन्य ग्रहों की धुरी के बीच से गुजरते हुए यह यान अन्य ग्रहों के

आंकड़े भी उपलब्ध कराता जा रहा है। सूर्य में इसकी यात्रा के दौरान ही लॉकडाउन की स्थिति

उत्पन्न हुई है। इसी वजह से सूर्य से बीच बीच में भीषण लपटों को उठते हुए देखा जा रहा है। आम

तौर पर इस लॉकडाउन के दौरान सूर्य थोड़ा मद्धिम पड़ जाता है। इस अवस्था में ही पहली बार इस

यान ने वहां प्लाज्मा किरणों की बारिश को भी रिकार्ड किया है।

सौर कणों के टकराने की घटना तेज यान के साथ

वर्तमान में पार्कर सोलर प्रोव भी अत्यंत तेज गति से अपने लक्ष्य की तरफ आगे बढ़ रहा है। अभी

उसकी दूरी करीब सात लाख बीस हजार किलोमीटर प्रति घंटे की है। इतनी अधिक तेज गति की

वजह से जब एक कण भी उससे टकराता है तो वह भीषण टक्कर जैसी परिस्थिति पैदा करता है।

इस लिहाज से यह भी माना जा सकता है कि इन सौर कणों की बारिश को झेलकर आगे बढ़ने वाला

यह पहला अंतरिक्ष यान है। यूनिवर्सिटी ऑफ कोलेराडो के वैज्ञानिक डेविड मालास्पिना कहते हं कि




अब तक यह यान दसों हजार बार ऐसा झेल चुका है। अपनी यात्रा के क्रम में यह कुल 24 चक्कर

काटकर सूर्य के सबसे करीब पहुंचेगा। इसी क्रम में नौवें चक्कर के दौरान यान के सामने ऐसी स्थिति

आयी थी जब वह औसतन प्रति 12 सेकंड में एक ऐसे कण के टक्कर को झेल रहा था। यान की खास

डिजाइन ही उसे अब तक इस किस्म के टक्करों से बचाये हुए हैं। वरना दस हजार 780 किलोमीटर

प्रति घंटे से अधिक रफ्तार पर कभी भी इसके यंत्र नष्ट हो सकते थे। अपनी इस यात्रा के दौरान

पार्कर सोलर प्रोब वहां के जोडिकल बादलों के बीच से भी गुजरेगा, जो दरअसल सौर कणों का विशाल

समूह है। विभिन्न कारणों से अलग अलग उल्कापिंडों और धूमकेतुओं से निकले यह सारे कण वहां

एकत्रित होकर बादल जैसी स्थिति बनाये हुए हैं। इन खगोलीय कारणों से ही किसी तारे का जन्म

प्लाज्मा विस्फोट की वजह से होता है। नासा का यह अंतरिक्ष यान उन तमाम परिस्थितियों को झेल

रहा है। इसके पहले आठ परिक्रमाओं के दौरान ऐसे 250 उच्च ऊर्जा के टक्कर को महसूस किया गया

है।

अब तक कई बार महसूस किया गया है इस टक्कर को

वैसे इतना कुछ झेल लेने के बाद भी पार्कर सोलर प्रोव अब तक सही तरीके से काम कर रहा है। वैसे

जैसे जैसे यह यान सूर्य के करीब पहुंच रहा है ऐसे सौर कणों की टक्कर का कुल प्रभाव भी बढ़ता जा

रहा है। लेकिन अब तक के परिणामों के आधार पर वैज्ञानिक मान रहे हैं कि पार्कर सोलर प्रोव के इस

दौरान फेल होने की आशंका बहुत कम है। दूसरी तरफ इस यान से मिले आंकड़ों की वजह से

वैज्ञानिकों को भविष्य में भेजे जाने वाले अंतरिक्ष यानों को बेहतर तरीके से डिजाइन करने में भी

मदद मिलेगी, यह तय है। अब तक वैज्ञानिकों के पास इन सौर कणों की टक्कर का प्रभाव समझने

का कोई वास्तविक आंकड़ा उपलब्ध नहीं था। शोधकर्ता इस यान से मिले आंकड़ों की मदद से सूर्य

तक अब तक पहुंचे यान के यात्रा पथ का मैप भी बना रहे हैं, जो भविष्य में अन्य अंतरिक्ष अभियानों

के लिए मददगार साबित होगा। इन सौर कणों से अन्य ग्रहों एवं खगोलीय पिंडों पर क्या प्रभाव पड़ा

है, उसे भी समझने में मदद मिल रही है।



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