Press "Enter" to skip to content

पॉम तेल बनाने वाली कंपनियों के आतंक की कहानी फिल्म से कम नहीं







कंपनी की गाड़ी में गांव जाती है पुलिस
 गवाहों को हटाने में भी पुलिस ही सक्रिय
दो साल तक गुप्त जांच के बाद सारे तथ्य सामने

पोर्ट मोर्सबाई: पॉम तेल बनाने वाली किसी फिल्मी कहानी की तरह ही आतंक का जीता जागता

नमूना है पापुआ न्यू गिनी में जारी पॉम आयल के कारोबारियों का। काफी लंबे अरसे से चुपचाप

इसकी जांच चल रही थी। क्रमवार तरीके से इससे संबंधित सारे आंकड़े जुटा लेने के बाद अब माना

जा रहा है कि दरअसल वहां के ग्रामीणों को आतंकित करने के लिए पॉम आयल बनाने वाली

कंपनियों ने पुलिस को ही खरीद लिया है। वैसे इस घटना को जान लेने के बाद एक हिंदी में डब की

गयी दक्षिण की फिल्म जिगर कलेजा की याद आती है, जिसके नायक महेश बाबू थे। यह पूरी फिल्म

ही ऐसी ही एक कहानी पर आधारित थी। घटना के प्रत्यक्षदर्शियों ने इसके बारे में जानकारी दी है।

दरअसल इस बारे में काफी पहले से ही शिकायत मिल रही थी लेकिन शिकायतों के समर्थन में कोई

साक्ष्य नहीं मिल पाता था। अब इसका भी खुलासा हो गया है कि दरअसल किसी तरह लड़ने को

तैयार होने वाले गवाहों को खुद पुलिस ही आगे आने से रोक देती थी। अब इस बारे में जारी रिपोर्ट के

अनुसार जुलाई 2019 की रात को एक बड़ी गाड़ी पर सवार होकर हथियारबंद पुलिस का एक दल वहां

से वाटवाट गांव में पहुंचा था। उस समय का मौसम खराब था और तूफानी हवा चल रही थी। गांव

पहुंचने के बाद पुलिस ने गांव के सारे पुरुषों और बालकों को घर से बाहर खींचकर निकाला और

उनकी जबर्दस्त पिटाई के बाद वहां बारिश के पानी से बने कीचड़ में डाल दिया। उसके बाद कुछ

लोगों को वहां से गिरफ्तार भी कर लिया गया।

पॉम आयल की खेती को किनलोगों ने नुकसान पहुंचाया

पॉम आयल की खेती को किनलोगों ने नुकसान पहुंचाया है। पुलिस और माफिया के इस गठजोड़ का

खुलासा एडवोकेसी ग्रूप ग्लोबल विटनेस नामक संस्था ने किया है। किसी तरह उस गाड़ी का नंबर

जांच करने वालों तक पहुंची तो गाड़ी के नंबर से पता चला कि यह तो दरअसल एक पॉम आयल का

कारोबार करने वाली कंपनी की गाड़ी है। उसके बाद की कड़ियों को जोड़ना कठिन काम नहीं था।

स्थानीय ग्रामीण शिकायत करते हैं कि दरअसल पुलिस को इन कंपनियों ने खरीद लिया है। दो साल

के निरंतर अनुसंधान के बाद इस किस्म के माफिया और पुलिस के गठजोड़ से वहां पॉम आयल की

खेती के गोरखधंधे का पता चला है। साथ ही यह भी पता चला है कि सारे नियम कानूनों को ताक पर

रखकर वहां के प्राकृतिक जंगल काटे जा रहे हैं। वहां के ग्रामीणों के जीवन का बहुत बड़ा हिस्सा इसी

जंगल पर आधारित है। यहां तक कि ग्रामीणों को जंगल में जाने तक से रोक दिया जाता है। दूसरी

तरफ ग्रामीणों की परेशानी है कि वे जलावन की लकड़ी भी इसी जंगल से लाते हैं।



More from एक्सक्लूसिवMore posts in एक्सक्लूसिव »

Be First to Comment

Leave a Reply

Mission News Theme by Compete Themes.
%d bloggers like this: