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योजनाओं की राशि खर्च करने में विफल रही राज्य सरकार

  • बजट की मात्र 33 फ़ीसदी राशि ही हो पाई है खर्च

  •  एक लाख 43 हजार करोड़ खर्च नहीं हुआ

  •  सरकार के लचर काम काज पर विपक्ष का हमला

  •  क्या इस सरकार में मार्च लूट की तैयारी है

राष्ट्रीय खबर

पटना :  योजनाओं में प्रदत्त राशि को खर्च नहीं कर सकी है राज्य सरकार । अफसर मार्च

लूट में लगे रहते हैं। सरकार और अफसरों के लचर कामकाज का जीवंत उदाहरण है कि

मात्र 33% राशि ही गत वित्तीय वर्ष में खर्च हो सकी। विपक्ष ने इस मुद्दे पर गुरुवार को

सरकार को घेरा।

तेजस्वी यादव ने विधानसभा में बजट पर हुई चर्चा के दौरान सरकार की पोल खोल दी।

उन्होंने कहा कि मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए सरकार ने दो लाख तेरह हजार करोड़ रुपए

का बजट तैयार किया था। जिसमें 11 महीने में सिर्फ 70 हजार करोड़ रुपए ही सरकार के

विभाग द्वारा खर्च किया जा सका है। तेजस्वी यादव ने कहा है कि वित्तीय वर्ष खत्म होने

में मात्र एक माह का समय बचा हुआ है और सरकार के पास अब एक लाख 43 हजार करोड़

रुपए खर्च किए जाना शेष है।

योजनाओं में प्रदत्त राशि को सरकार बताए कि वह कैसे इन पैसों को खर्च करेगी

इस  दौरान तेजस्वी ने मार्च लूट का जिक्र करते हुए कहा कि अपने अधिकारियों से इस

संबंध में  जानकारी ले लिजिए, वह बता देंगे कि मार्च लूट क्या है। 13 45621 लोगों ने

उदयमी के  लिए आवेदन दिया जिसमें सिर्फ 4500 लोगों का चयन किया गया , इसमें भी

सिर्फ 3641  लोगों के लिए 93 करोड़ रुपए मंजूर किया गया। नेता प्रतिपक्ष ने पूछा कि

सीएम बताएं कि  वह कैसै 20 लाख रोजगार मुहैया कराएंगे। तेजस्वी ने कहा कि वे कहते

कुछ है और करते  कुछ और हैं, बजट में उद्यमी के लिए सिर्फ 12 सौ करोड़ की व्यवस्था

की गई। तेजस्वी  यादव ने कहा बिहार में उद्योगपतियों को लोन नहीं मिल पाता है, तो

छात्रों को कहां लोन  मिलेगा। इसे समझा जा सकता है। इस दौरान तेजस्वी ने एक शायरी

भी पढ़ी, जिसमें  उन्होंने कहा कि तू कर ले हिसाब अपने हिसाब से, जनता हिसाब लेगी

अपने हिसाब से।

उन्होंने भाजपा और जदयू के बीच कैबिनेट विस्तार पर चर्चा करते हुए कहा कि भाजपा के

मंत्री ज्यादा हैं, लेकिन बजट जदयू के मंत्रियों के पास अधिक है। उन्होंने कहा कि यह एक

अखबार में छपी हुई खबर है। इस दौरान उन्होने मुकेश सहनी को छोटा रिचार्ज कूपन

करार दिया। कहा कि मुकेश सहनी के विभाग के कामकाज की कभी भी जांच हो सकती है

और वे किसी भी घोटाले में फंसाए जा सकते हैं।

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