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रानी चीटीं के मर जाने से भी आबादी नष्ट नहीं होने की खास बात का पता चला

  • इन चीटियों के पास अपना दिमाग सिकोड़ने का गुण मौजूद है

  •  दिमाग को छोटा बड़ा करने की क्षमता है इनमें

  •  काम पूरा होते ही पूर्व स्थिति में लौट जाते हैं

  •  ऐसा कैसे होता है, यह अब तक स्पष्ट नहीं हुआ

राष्ट्रीय खबर

रांचीः रानी चींटी के ईर्दगिर्द ही चीटियों की आबादी पूरी तरह निर्भर होती है। ऐसा इसलिए

है क्योंकि अकेली रानी चीटीं ही बच्चे पैदा करती है। चीटियों की बस्ती में मौजूद अन्य

मजदूर चीटी इन लार्वा की देखभाल कर उन्हें बड़ा करते हैं। अब पता चला है कि किसी

कारण से अगर रानी चीटी की मौत हो जाती है तो खास किस्म की चीटियां अपने दिमाग

को छोटा कर लेती हैं। इसे छोटा करने के साथ साथ वे अपने ओवरीज को बढ़ाने की क्षमता

रखते हैं। इस बदलाव की वजह से चीटियों की बस्ती में दूसरी रानी चीटीं आ जाती है और

उनके जीवन की गाड़ी यथावत चलती रहती है। जिस प्रजाति में यह खास गुण देखा गया है

उसे इंडियन जंपिंग एंट कहते हैं। उनकी आबादी में रानी की मौत के बाद भी वंशवृद्धि की

जिम्मेदारी कोई और मजदूर चीटी उठा लेते हैं। इस जिम्मेदारी को उठाने के लिए वह

अपने शरीर में आवश्यकत बदलाव खुद से कर सकती है। शोध के दौरान यह भी देखा गया

है कि अपने दिमाग को छोटा करने के बाद वे उसे फिर से पूर्व स्थिति में भी ले जा सकते हैं।

अपने दिमाग को छोटा बड़ा करने की क्षमता रखने वाले इस प्रथम प्रजाति की पहचान हुई

है। शोध दल ने पाया है कि अस्थायी तौर पर रानी चीटीं की जिम्मेदारी निभाने वाली

मजदूर चीटी काम खत्म होने के बाद पूर्व स्थिति में लौट जाती है। वैसे चीटियों की दुनिया

में लार्वा के पोषण के आधार पर यह पहले ही निर्धारित हो जाता है कि कौन सा लार्वा रानी

चीटीं बनेगा। उसे प्रारंभ से ही अलग किस्म का भोजन उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन

मजदूर चीटी की अपनी भूमिका बदल लेने और काम पूरा करने के बाद पूर्व स्थिति में चले

जाने की घटना बिल्कुल अनोखी है।

रानी चीटीं का काम लार्वा पैदा करना होता है

अमेरिका के केन्नेशा स्टेट यूनिवर्सिटी के डॉ क्लिंट पेनिक ने इस बारे में कहा कि यह

प्राणी जगत के लिए बिल्कुल अनोखी घटना है। आम तौर पर चीटियों की आबादी के

अनुशासन बहुत अच्छे होते हैं। वहां हरेक की अपनी अपनी जिम्मेदारी भी तय होती है।

रानी चीटीं का काम लार्वा पैदा करना होता है। इस बस्ती के अंदर इन बच्चों की परवरिश

के लिए भी मजदूर चीटियों की जिम्मेदारी पूर्व निर्धारित होती है। दूसरे मजदूरों का काम

भोजन का प्रबंध करने के अलावा इस बस्ती की सफाई और सुरक्षा देखना होता है। पहली

बार शोध वैज्ञानिकों ने यह देखा है कि किसी वजह से रानी चीटीं की मौत के कुछ ही घंटों

के भीतर अस्थायी तौर पर रानी चींटी की भूमिका संभालने वाले मजदूर भी आबादी को

आगे बढ़ाने का काम को गतिमान रखते हैं। यानी एक रानी चीटीं के मर जाने से इस

इंडियन जंपिंग एंट की आबादी तबाह नहीं हो जाती है।

यह देखा गया है कि मजदूर से रानी चीटीं बनने के लिए भी कड़ा कंपिटिशन होता है

शोध में यह पाया गया है कि दिमाग को संकुचित कर ओवरी को बढ़ा लेने से इस बस्ती के

अंदर बहुत कुछ बदल जाता है। अपने शोध के आगे बढ़ाते हुए पेनिक और उनकी टीम ने

ऐसे अस्थायी रानी चीटियों के पूर्व अवस्था में लौट जाने के बाद सब कुछ पहले जैसा ही हो

जाता है। यानी जिम्मेदारी पूरा होने के बाद वे फिर से मजदूर चीटीं की भूमिका में काम

करने लगते हैं और उनके शरीर में हुआ बदलाव भी समाप्त हो चुका होता है। वैसे अब तक

वैज्ञानिक इस गुत्थी को नहीं सुलझा पाये हैं कि दिमाग को सिकुड़ लेने और गर्भाशय को

बड़ा कर लेने के बाद वे फिर से अपनी पूर्व स्थिति में कैसे लौट जाते है। यह आधुनिक

विज्ञान के लिए भी एक अजीब गुत्थी है।

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