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भीषण बाढ़ से असम में बाइस लोगों की मौत

  • बरसात के साथ साथ मौत का तांडव जारी

  • विभिन्न इलाकों के 38।8 लाख लोग प्रभावित

  • काजीरंगा नेशनल पार्क का 75 फीसदी हिस्सा डूबा

  • राज्य का धेमाजी जिला सबसे अधिक बाढ़ग्रस्त

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : भीषण बाढ़ की वजह से असम में सोमवार से हालात और बिगड़ गए हैं। राज्य

के 33 जिलों में से 23 बाढ़ के पानी में डूब गए और मरने वालों की संख्या बढ़कर 22 हो गई

है। वहीं एक सींग वाले गैंडे के लिए पूरी दुनिया में मशहूर काजीरंगा नेशनल पार्क का 75

फीसदी हिस्सा बाढ़ में डूबा गया है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्थिति का

जायजा लिया और केंद्र से हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया है। मानसून के पहुंचने के

बाद से मूसलाधार बारिश हो रही है और इस कारण से राज्य में बाढ़ आ गई है। असम के

23 जिलों के 2,317 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। ब्रह्मपुत्र नदी खतरे के निशान से ऊपर बह

रही है। मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने सभी जिलों के उपायुक्तों को बाढ़ प्रभावित इलाकों

में राहत कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं।असम में पांच और व्यक्ति की मौत हो जाने के

बाद मृतकों की संख्या बढ़ कर 22 हो गई। राज्य में धेमाजी सार्वधिक प्रभावित जिला है

और इसके बाद तिनसुकिया, माजुली और डिब्रूगढ़ भी बाढ़ से बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं।

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की दैनिक बाढ़ रिपोर्ट के मुताबिक डिब्रूगढ़ में बाढ़

ने आज एक और व्यक्ति की जान ले ली। ब्रह्मपुत्र नदी और इसकी सहायक नदियां कई

स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं और इसके चलते धेमाजी, लखीमपुर,

बिश्वनाथ, उदलगुड़ी, दरंग, बक्सा, कोकराझार, बारपेटा, नागांव, गोलाघाट, जोरहाट,

माजुली, शिवसागर, डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया जिले बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।

भीषण बाढ़ का असली कारण सभी नदियों की उफान

भीषण बाढ़ की वजह से असम में सोमवार से हालात और बिगड़ गए, बाइस लोगों की मौत

छह जिलों में 365 राहत शिविर और वितरण केंद्र स्थापित किए हैं, जहां 46,900 से अधिक

लोग रहे रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल और स्वास्थ्य

मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से राज्य में बाढ़ की स्थिति और भूस्खलन और कटाव के कारण

होने वाली कठिनाइयों का जायजा लेने के लिए आज बात की। उन्होंने स्थिति से निपटने

में असम को हर संभव मदद का आश्वासन दिया।

430 वर्ग किलोमीटर में फैले काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान का लगभग 70% क्षेत्र पिछले कुछ

दिनों मं भारी बारिश से बाढ़ के कारण बह गया है। पार्क के बुरपाहार और बागोरी

पर्वतमाला सबसे अधिक प्रभावित हैं। दुनिया भर में एक सींग वाले गैंडों के सबसे बड़े

आवास पार्क में फैले 183 में से 90 वन शिविर प्रभावित हुए हैं। पार्क में गतिविधियों की

निगरानी के लिए वन कर्मियों द्वारा उपयोग किए जाने वाले दो शिविर खाली कर दिए गए

हैं। इस बीच, बाढ़ के पानी ने काजीरंगा, पोबितोरा और मानस राइनो निवास के प्रमुख

हिस्सों को जलमग्न कर दिया है, जिससे जानवरों को सुरक्षा के लिए कृत्रिम हाइलैंड्स में

शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। असम के वन और पर्यावरण मंत्रालय की एक

विज्ञप्ति में कहा गया है कि वर्तमान में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान का लगभग 90 प्रतिशत

हिस्सा जलमग्न है। हालांकि पार्क के 199 एंटी-प्वाइजिंग कैंपों में से 155 बाढ़ के पानी से

प्रभावित हैं, लेकिन कर्मचारी और सुरक्षाकर्मी नौकाओं का उपयोग करते हुए अपनी ड्यूटी

कर रहे हैं। पार्क के संवेदनशील स्थानों पर एक विशेष राइनो सुरक्षा बल भी तैनात किया

गया है। बोकाखाट में राष्ट्रीय राजमार्ग -37 गुजरता है, बाढ़ के कारण पूरे ऊपरी असम से

कट गया है। गोलाघाट जिला प्रशासन ने नुमालीगढ़ में वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध

लगा दिया है।


 

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