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गुटखा जब्ती में अब तक असली आदमी सामने नहीं आया

  • माल छुड़ाने की डील में करोड़ों की सौदेबाजी की चर्चा
संवाददाता

रांचीः गुटखा जब्ती की डील में अब भी असली खिलाड़ी खुद को पर्दे के पीछे रखकर सारी

बातों को मैनेज करने की कोशिश कर रहा है। लॉक डाउन के दौरान प्रतिबंधित तंबाकू

उत्पाद को अपने गोदाम में रखने वाले व्यापारी अब भी पर्दे के पीछे से खेल कर रहा है। वह

अब तक सामने आकर यह नहीं कर रहा है कि दरअसल माल उसका है। फिलहाल तो

उसकी तरफ से मोरहाबादी का एक व्यक्ति सामने आया है। लेकिन इसके बाद में जिस

मकसद से सारी खेल किया गया है, वह पूरी तरह सफल नहीं हो पाया है। पहले इस किस्म

के पदार्थों को 31 मई तक लौटाने की बात थी। इस तिथि के बीत जाने के बाद जब छापा

पड़ा तभी मामले को सेट करने की डील काफी ऊंची रकम पर होने की चर्चा अपर बाजार में

है। इसी चर्चा के बीच यह भेद भी सामने आया है कि दरअसल उस गोदाम में करीब

चालीस करोड़ का माल पड़ा हुआ है। पर्दे के पीछे की सेटिंग की वजह से 31 मई की तिथि

को आगे बढ़ाकर 10 जून कर दिया गया था। लेकिन इतना कुछ होने के बाद भी असली

कारोबारी यानी जय प्रकाश सिंघानिया खुद को पर्दे के पीछे ही रखकर चल रहा है। सूचना

है कि उसकी तरफ से मीडिया मैनेजमेंट का काम भी तेज किया गया है। लेकिन इसके बाद

भी गोदाम में जब्त माल को वैध बनाने और उसे अपना साबित करने की कोशिश में

सफलता नहीं मिली है।

गुटखा जब्ती में जो सामने आया वह असली मालिक नहीं

जानकार बताते है कि दरअसल सरकार की नर्मी की दूसरी वजह राज्य के कई अन्य

इलाकों में भी गुटखा और अन्य तंबाकू उत्पादनों का होना है। वहां के कारोबारी भी अपने

अपने तरीके से माल बचाने औऱ किसी कानूनी पचड़े में फंसने से बचने के लिए भी पैरवी

कर रहे है। दूसरी तरफ सूत्र यह भी बता रहे हैं कि डील की भनक होने की वजह से ही

अधिकारियों का एक खेमा इस धंधेबाजी को बंद करने के लिए इस तरीके से आदेश जारी

कर रहा है, जिसका पालन होने के पहले ही उसमें उल्लेखित तिथि की अवधि समाप्त हो

जाए। गुटखा के मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ है क्योंकि संशोधित आदेश में उल्लेखित

दस जून की तिथि भी समाप्त हो चुकी है।


 

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