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संक्रमण के बढ़ने से दौरान और अधिक सावधानी जरूरी

संक्रमण के बढ़ने की बात करें तो आज के दौर में सीधे सीधे कोरोना वायरस की ही चर्चा

होती है। तीसरे चरण का संक्रमण अब सामने आने लगा है। इसके बाद इस तीसरे चरण के

रोगियों से संक्रमित होने वालों का नंबर भी आयेगा। ऐसी स्थिति में एकमात्र विकल्प तो

यही है कि हम एक दूसरे से भौतिक दूरी बनाते हुए एक दूसरे के करीब रहें। यह दुर्भाग्यपूर्ण

स्थिति है कि इस संकट की घड़ी में भी कुछ लोग राजनीति कर रहे हैं और इस वैश्विक

महामारी के दौरान भी अपना उल्लू सीधा करने की साजिशें रच रहे हैं। सोशल मीडिया में

जिस तरीके से भ्रामक सूचनाएं जान बूझकर फैलायी जा रही है, उसे आम आदमी भी

समझ सकता है। लेकिन जो लोग ऐसी सूचनाएं फैला रहे है, अब उनसे यह सवाल पूछने

का वक्त आ गया है कि वह राष्ट्रभक्त हैं अथवा उन्हें भी प्रचलित कथन की तरह

पाकिस्तान भेज दिया जाए। संक्रमण का भारत में प्रवेश विदेशों से हुआ, यह तय है।

गनीमत है कि चीन से लगने वाली सीमा के राज्यों तक यह संक्रमण नहीं पहुंचा। उत्तर

पूर्वी भारत में इसके जो संक्रमित रोगी पाये जा रहे हैं, वे अन्य इलाकों से यह संक्रमण

लेकर आये हैं। पूरे देश में विदेश से आये लोगों के मामले में अगर कड़ाई के साथ सावधानी

बरती गयी होती तो स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है। वर्तमान में विदेश से आये

लोगों से जो संक्रमण बाकी लोगों में फैला है, वे भी संक्रमण को आगे बढ़ाने वाले साबित

हुए हैं। लिहाजा अब भी देश में इस संक्रमण के अनेक रोगी मौजूद होंगे, जिनकी पहचान

नही हो पायी है। दरअसल चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में हम बहुत कम लोगों की जांच

भी कर पाये हैं।

संक्रमण के बढ़ने का आंकड़ा जांच के साथ ही बढ़ेगा

इसलिए यह आंकड़ा देखकर संतुष्ट होने की कोई बात नहीं है कि भारत में अन्य देशों की

तुलना में संक्रमण का यह आंकड़ा काफी कम है। दरअसल यहां घनी आबादी वाले देश में

लोगों की जांच ही कम हुई है, इसलिए संक्रमण का वास्तविक आंकड़ा सामने नहीं आ पाया

है। वैश्विक स्तर पर गौर करें तो कूटनीतिक और व्यापारिक मतभेदों के बावजूद सभी देश

फिलहाल संकट की इस घड़ी में एक दूसरे की मदद के लिए हाथ बढ़ा रहे हैं। अपवाद सिर्फ

पाकिस्तान है, जो अब भी इसी मौके का फायदा उठाकर घुसपैठियों की मदद कर रहा है।

कोरोना वायरस का संक्रमण सिर्फ देश के लोगों को ही नहीं मार रहा बल्कि देश की

अर्थव्यवस्था को भी तबाह कर रहा है। लॉक डाउन की मजबूरी की वजह से जो उत्पादन

बाधित हुआ है, उसे स्थिति सामान्य होने के बाद भी पटरी पर लाने में काफी वक्त लगेगा।

बाजार में नकदी का प्रवाह बहुत तेजी से घटता चला जा रहा है। ऐसे में कोरोना वायरस का

प्रभाव खत्म होने के बाद इस आर्थिक बीमारी का असली नुकसान हमारे सामने आयेगा।

यह अच्छी बात है कि अनेक इलाकों में गरीबों को रोजगार देने के लिए कोरोना को ही

हथियार बनाया गया है। जेलों में, महिला स्वयंसेवी संस्थाओं और जिला प्रशासन की पहल

पर अन्य माध्यमों से मास्क और संक्रमण रोधी पोशाक तैयार करने का काम तेज हुआ है।

इससे निश्चित तौर पर रोजगार के नये साधन बने हैं क्योंकि आम तौर पर सामान्य

परिस्थिति में यह उत्पादन सिर्फ चंद कारखानों में ही किया जाता रहा है। दूसरी तरफ

डीआरडीओ जैसी सरकारी संस्थाएं खतरे को भांपते हुए वेंटीलेटर जैसे उपकरणों को तेजी

से बनाने का काम कर रही हैं।

अब अत्याधुनिक जीवन रक्षक तैयारियों की आवश्यकता पड़ेगी

जाहिर है कि जैसे जैसे इस रोग का प्रकोप बढ़ेगा, ऐसे अत्याधुनिक और जीवन रक्षक

उपकरणों की जरूरत भी बढ़ती चली जाएगी। हमने विलंब से ही परहेज भले ही शुरु किया

हो लेकिन अपनी श्रमशक्ति की बदौलत हम इस दूरी को अब भी पाट सकते हैं। लेकिन

इसके बीच एक दूसरे से दूरी बनाये रखने के नियम का कड़ाई से पालन करने का वक्त आ

चुका है। कुछ लोगों को अपने अपने कारणों से इस नियम को मानने में परहेज है। लेकिन

इस बात का कोई संतोषजनक उत्तर ऐसे लोगों के पास नहीं है कि दूसरों को खतरे में

डालने का अधिकार उन्हें किसने दिया है। खास तौर पर तबलीगी जमात में शामिल हुए

लोगों में जिस तरीके से संक्रमण की बात सामने आ रही है, उससे तो साफ है कि इसमें

शामिल लोगों को जितनी जल्द हो सके जांच में शामिल होना चाहिए ताकि वे कमसे कम

खुद संतुष्ट हो सकें कि वे दूसरों तक यह बीमारी नहीं फैला रहे हैं। जो लोग इस काम में

बाधक हो रहे हैं, उनके साथ सख्ती बरतने का समय आ गया है। हो सकता है कि कुछ

दिनों में इस महामारी का कोई निदान भी सामने आ जाए। लेकिन तब तक इस संक्रमण

से लड़ने का जो हथियार हमारे पास मौजूद हैं, हम उसी का ठीक इस्तेमाल तो कर लें।


 

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