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पुराने सीरियलों के बाद नकल करने की प्रवृत्ति खतरनाक

  • लॉक डाउन में फिर से पुरानी समस्या लौट कर आयी
  • टीवी सीरियल से प्रभावित हो रहे बच्चे
  • खेल में 10 साल के बच्चे की आंखे क्षतिग्रस्त
  • चोट से कोर्निया और रेटिना को हो सकता है नुकसान
  • कश्यप अस्पताल रांची में आयुष्मान के तहत हुआ ऑपरेशन

संवाददाता

रांचीः पुराने सीरियलों के प्रसारण के साथ साथ पुराना खतरा फिर से लौट आया है। पहले भी बच्चे इन्हीं सीरियलों

को देखकर उनकी नकल के खेल में गंभीर रुप से घायल हुआ करते थे। अब फिर से उसी की पुनरावृत्ति होने लगी

है। लातेदार जिला के महुआडाढ़ इलाके के एक बच्चे के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है। लॉक डाउन के दौरान टीवी में

प्रसारित होने वाले धारावाहिकों से प्रभावित होकर वह भी तीर धनुष खेल रहा था। इसी दौरान दूसरे

बच्चे के द्वारा चलाये गए तीर से उसकी आंख में गंभीर चोट लग गयी। महुआटांड की सरकारी नेत्रसहायक संजु

कुमारी ने डॉ. भारती कश्यप से तुरंत संपर्क कर अगली सुबह उसे एम्बुलेंस की मदद से कश्यप मेमोरियल आई

हॉस्पिटल भिजवाया। इस अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत सोमवार को उसका ऑपरेशन किया गया।

ऑपरेशनकर्ता डॉ. निधि गडकर कश्यप, कोर्निया एंव नेत्र प्रत्यारोपण सर्जन, कश्यप मेमोरियल आई हॉस्पिटलने

बताया कि क्षतिग्रस्त हुए मोतिबिंद के रूप में परिवर्तित हुए आँखों के लेंस को हटा कर कोर्निया तथा रेटिना को

रिपेयर किया गया है कुछ दिनों के बाद कृत्रिम लेंस का प्रत्यारोपण किया जायेगा उन्होंने जल्द ही आंखों की रोशनी

लौटने की उम्मीद है।

पुराने सीरियलों के बाद बच्चों के खेल पर ध्यान रखें अभिभावक

डॉ. भारती कश्यप, डायरेक्टर, कश्यप मेमोरियल आई हॉस्पिटलने बच्चों को लेकर सजगता बरतने की सलाह दी है

उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के कारण दूरदर्शन पर इन दिनों मशहूर धारावाहिक रामायण और महाभारत का पुनः

प्रसारण किया जा रहा है। इस तरह के सीरियल का बच्चों के ऊपर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह का

असर पर रहा है। इसका सकारात्मक पक्ष यह है कि यह परिवारों के भावनात्मक ढांचे को मजबूत करता हैं तथा

इसका नकारात्मक पक्ष यह है कि बच्चे इन सीरियलों में तीर -कमान चलाने के दृश्यों को देख कर इसका अनुसरण

करने लगते हैं और तीर -कमान से खेलना चालू कर देते हैं। जिसकी वजह से उनकी आँखों या शरीर के नाजुक अंगों

को गंभीर रूप से चोट लग सकती है। ऐसे बच्चों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने की जरूरत होती है ।

डॉ.भारती कश्यप ने चिंता जताते हुए कहा कि तीर-कमान की चोट की वजह से पुतली में सुराख हो सकता है।

कई बार आँख के लेंस की झिल्ली फट जाती है जिससे सफेद मोतियाबिंद बन जाता है। कई बार इतनी तेजी से तीर

लग सकती है कि तीर आँख की पुतली को पार करते हुए परदे को भी चीर देता है। इसके इलाज के लिए बड़े

ऑपरेशन की जरुरत पड़ती है। कई बार कॉर्निया के गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होने की वजह से कोर्निया प्रत्यारोपण

की भी जरूरत पर जाती है। अगर सफेद मोतिया बन जाए तो ऑपरेशन से मोतियाबिंद को निकालकर उसमें लेंस

लगाना पड़ता है।इस वजह से सभी अभिवावकों को यह ध्यान देना चाहिए की बच्चे तीर-कमान या किसी भी प्रकार

की नोकिली चीजों से न खेलें। क्योंकि हर किसी की थोड़ी सी सावधानी ऐसे हादसों को होने से रोक सकती है ।

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