fbpx Press "Enter" to skip to content

दिल्ली की सीमा से फैलता आंदोलन भी अलग इतिहास बन जाएगा

दिल्ली की सीमा पर करीब तीन माह से चल रहा आंदोलन अब दूसरे राज्यों तक फैल रहा

है। भले ही अब तक खुलकर यह बात सामने नहीं आयी हो लेकिन पिछले छह वर्षों में यह

पहला मौका है जब आम आदमी हर किसी विषय पर सरकार पर सवाल उठाने लगा है।

कृषि-विपणन सुधारों के विकास की गाथा एक दिलचस्प एवं बेहद रोचक पाठ का विषय

है। जरूरत पर आधारित इन अधिकांश कदमों की अनुशंसा एम एस स्वामीनाथन की

अगुआई वाले राष्ट्रीय किसान आयोग ने भी 2006 में सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में की थी।

इन अनुशंसाओं को कांग्रेस की अगुआई वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार ने

2007 में पहली बार घोषित राष्ट्रीय किसान नीति में भी जगह दी थी। लेकिन भाजपा की

अगुआई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की मौजूदा सरकार ने इन सुझावों को

आखिरकार कानूनी जामा पहनाने का काम किया है। अधिकांश दल संप्रग या राजग

गठबंधनों का हिस्सा या सहयोगी कभी-न-कभी रहे हैं, लिहाजा वे इन कृषि सुधारों को

अंजाम दिए जाने की प्रक्रिया का हिस्सा प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप में जरूर रहे हैं। राष्ट्रवादी

कांग्रेस पार्टी (राकांपा) अध्यक्ष शरद पवार उस समय कृषि मंत्री थे जब कृषि क्षेत्र को

खोलने की प्रतिबद्धता दर्शाने के लिए किसान नीति बनाई गई थी। हालांकि आयोग की कई

अनुशंसाओं को इस नीति में शामिल किया गया था, लेकिन फसलों के न्यूनतम समर्थन

मूल्य (एमएसपी) को उत्पादन लागत के 50 फीसदी से अधिक रखने जैसे कुछ अहम

सुझावों को छोड़ दिया गया था।

दिल्ली की सीमा का मसला अब व्यापक फलक पर जा चुका

फिर भी कृषि व्यापार में निजी क्षेत्र को जोडऩे, निजी क्षेत्र में कृषि बाजार बनाने और ठेके

पर खेती को बढ़ावा देने जैसे सुझावों को किसान नीति में जगह मिली थी। मौजूदा समय

में किसानों के विरोध की वजह इन्हीं मुद्दों पर है और उन्हें कांग्रेस की अगुआई वाले संप्रग

का समर्थन भी मिल रहा है। एक सच यह भी है कि किसानों की एक अहम मांग एमएसपी

को न तो स्वामीनाथन आयोग ने ही स्पष्ट ढंग से परिभाषित किया है और न ही संप्रग या

राजग की सरकारों ने दिल्ली की सीमा से उपजी इस पर स्थिति स्पष्ट की है।

एमएसपी को उपज की भारित लागत के 50 फीसदी से अधिक होने की संकल्पना पेश

करने के साथ ही आयोग ने यह कहते हुए अनिश्चितता भी जताई थी कि यह खरीदी मूल्य

से अलग होना चाहिए। आयोग ने कहा था, अनाजों की खरीद एमएसपी पर न होकर

बाजार भाव पर की जानी चाहिए। आयोग ने अपनी अंतरिम एवं अंतिम रिपोर्टों में इस

अवधारणा की अलग-अलग संदर्भों में व्याख्या कर हालात को और भी बिगाड़ दिया। एक

स्थान पर उसने कहा कि एमएसपी और खरीद दो अलग गतिविधियां हैं और उन्हें उसी

तरह अंजाम दिया जाना चाहिए। वहीं एक अन्य स्थान पर उसने कहा, प्रमुख अनाजों को

उस भाव पर खरीदा जाना चाहिए जिसे निजी कारोबारी किसानों को देने को तैयार हैं। एक

दूसरे संदर्भ में आयोग ने कहा था, खरीद का भाव एमएसपी से अधिक हो सकता है और

यह बाजार की स्थितियों को भी प्रदर्शित करना चाहिए लेकिन मनमोहन सिंह की संप्रग

सरकार ने एमएसपी को लागत के 50 फीसदी से अधिक होने का फॉर्मूला ठुकराने के साथ

ही समर्थन मूल्य एवं खरीदी मूल्य दोनों को अलग करने की मांग भी खारिज कर दी।

डॉ मनमोहन सिंह की सरकार ने भी इस प्रस्ताव का खारिज किया था

सरकार को यह लगा था कि ऐसी मांग मान लेने से बाजार का रूप बिगड़ सकता है और

कुछ मामलों में यह प्रतिकूल भी साबित हो सकता है। स्वामीनाथन आयोग की ऐसी कुछ

और अनुशंसाओं को ठुकराए जाने पर दी गई टिप्पणी में कहा गया था, एमएसपी की

अनुशंसा कृषि लागत एवं मूल्य आयोग तमाम तरह के प्रासंगिक बिंदुओं पर गौर करने के

बाद करता है। लिहाजा लागत पर कम-से-कम 50 फीसदी भाव बढ़ाने की अनुशंसा करने

से बाजार खराब हो सकता है। एमएसपी एवं उत्पादन लागत के बीच एक मशीनी नाता

होना कुछ मामलों में उलटा साबित हो सकता है। एमएसपी एवं खरीदी मूल्यों को अलग

रखने के मुद्दे पर कहा गया था कि इसे लागू कर पाना मुश्किल होगा। बहरहाल, संप्रग

सरकार ने कृषि कारोबार में निजी भागीदारी एवं अनुबंध कृषि का पूरे मन से साथ दिया

था। राष्ट्रीय किसान नीति की धारा 5(10)(1) इस मसले पर कहती है, केंद्र एवं राज्य

सरकारों ने पहले ही कई महत्त्वपूर्ण बाजार सुधार शुरू किए हैं। वहीं आयोग ने अपनी

अंतिम रिपोर्ट की धारा 1(8)(3) में अनुबंध कृषि के मुद्दे पर कहा था कि किसानों और

कॉर्पोरेट घरानों या प्रसंस्करण इकाइयों के बीच उपज के पहले ही करार होने का रुझान

तेजी से बढ़ा है। लेकिन औपचारिक अनुबंध नहीं होने पर पलड़ा कृषि-कारोबारी कंपनियों

के पक्ष में झुक सकता है। इसी बात को लेकर दिल्ली की सीमा से जो आग लगी है वह

अंदर ही अंदर दूर तक फैलती हुई नजर आ रही है।

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from HomeMore posts in Home »
More from कृषिMore posts in कृषि »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from देशMore posts in देश »

Be First to Comment

... ... ...
%d bloggers like this: