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पूरी दुनिया को विश्वयुद्ध के अनुभव दे रहा है अदृश्य शत्रु

  • इतिहास की पाठ्यक्रम में दर्ज होगा कोरोना का युद्ध भी
  • कई विषयों के पाठ्यक्रम को बदलेगा यह दौर
  • दुनिया के कई समीकरण बदलेंगे, यह तो तय है
  • हर विश्वयुद्ध दुनिया के समीकरणों को बदल देता है

रजत कुमार गुप्ता

रांचीः पूरी दुनिया को घरों में कैद करने वाला अदृश्य शत्रु भी निकट भविष्य में हमारे पाठ्यक्रम में

इतिहास का एक नया अध्याय बनेगा। वैसे इतना तो तय हो चुका है कि इस कोरोना के

प्रकरण की समाप्ति के बाद दुनिया का चेहरा भी बदल जाएगा और कूटनीतिक स्तर पर भी

नये समीकरण गढ़े जाएंगे। इस लिहाज से यह भी माना जा सकता है

कि सिर्फ इतिहास ही नहीं बल्कि राजनीति शास्त्र और वाणिज्य के पाठ्यक्रमों में भी

इसे एक महत्वपूर्ण बदलाव के विषय के तौर पर दर्ज किया जाएगा।

अब तक के घटनाक्रमों पर गौर करें तो दिसंबर 2019 के पहले तक दुनिया के जो कुछ भी

समीकरण रहे थे, वे अचानक इन चार महीनों में पूरी तरह बदल चुके हैं।

चीन के वुहान शहर से प्रारंभ हुई बीमारी अब दुनिया के अन्य

देशों में फैल चुकी है। ऐसे में जापान का अपनी कंपनियों को यह आदेश देना कि वे

तुरंत चीन से अपना कारोबार समेट लें, अपने आप में एक अप्रत्याशित आर्थिक फैसला है,

जिसकी पहले कल्पना तक नहीं की गयी थी। लेकिन इस काम के पूरा होने के बाद

चीन के अंदर और बाहर जो नये समीकरण बनेंगे, उनके बारे में पहले कोई कल्पना

तक नहीं थी।

वैज्ञानिक शोध के लिहाज से चांद से आगे निकलकर सूर्य के करीब पहुंचने का वैज्ञानिकों का दावा भी पूरी दुनिया

पर छा रहे इस अदृश्य शत्र की वजह से मलिन हो चुका है। सबसे बड़े अंतरिक्ष शोध संस्थान नासा के अधिकांश काम

काज बंद है। ऐसे में विज्ञान की तरक्की में कोरोना के ईलाज को भी निश्चित तौर पर भविष्य में अलग से स्थान

मिलेगा।

पूरी दुनिया में बहुत कुछ बदलता है ऐसी घटनाओं के बाद

कुछ इसी तरह इतिहास में प्लेग और यक्ष्मा के ईलाज को भी पहले स्थान दिया गया था। यहां तक कि

एंटीबॉयोटिक्स का आविष्कार भी पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण माना गया था।

लेकिन इन सभी से महत्वपूर्ण इतिहास का पाठ्यक्रम है। इसमें क्रमवार तरीके से छात्र जंगली जानवर से इंसान

बनने के क्रमिक विकास को क्रमवार तरीके से पढ़ते और जानते हैं। इसमें पहले हो चुके दो विश्वयुद्ध के कारण और

परिणामों का भी बार बार जिक्र होता है। खासकर दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान नाजी के उदय और पतन के साथ साथ

जापान में परमाणु बम गिराया जाना भी इतिहास में दर्ज है। मालूम हो कि इसी विश्वयुद्ध की वजह से पूरी दुनिया के

समीकरण ही बदल गये थे। इस वजह से अब जारी इस तीसरे किस्म के विश्वयुद्ध में पक्षकार अदृश्य शत्रु यानी

वायरस है। लेकिन इसके बाद भी दुनिया में देशों में खेमा बनता चला जा रहा है। जाहिर है कि इस युद्ध की समाप्ति

के बाद उसके नये अध्याय किस तरह के होंगे, उनका आकलन अभी संभव नहीं है। पूरी दुनिया के लिए यह अपने

किस्म का एक सबक होगा, यह जरूर तय हो गया है।

इससे आगे जब हम झारखंड के इतिहास की बात करेंगे तो झारखंड आंदोलन के इतिहास और पोलियो की समाप्ति

के अभियान के साथ साथ कोरोना के खिलाफ जारी संघर्ष में वर्तमान सरकार ने केंद्र से पहले कौन से कदम उठाये

और इन कड़े फैसलों का क्या लाभ हुआ, यह भी पूरी दुनिया के इतिहास के पन्नों में भविष्य में दर्ज होगा।

 

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