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भारतीय सेना ने फिर चीन के पीएलए को बड़ी मात दे दी

  • छह स्थानों की चोटियों पर भारतीय सेना कायम

  •  इलाका हासिल करने भारतीय सेना ने पूरी ताकत लगा दी

  •  चीन की सेना का धोखेबाजी का चरित्र फिर सामने आया

  •  भारतीय वायुसेना का सुखोई भी यहां किया गया तैनात

भूपेन गोस्वामी

तेजपुरः भारतीय सेना ने एक बार फिर अपना जौहर और पराक्रम दिखाया है। दूसरी तरफ

फिर से चीन की सेना का धोखेबाज रवैये सामने आया है। जब चीन गलवान और पैंगॉन्ग

में हार गया, तो शी जिनपिंग की सेना नए मोर्चे पर गतिरोध पैदा करने की कोशिश कर

रही है। अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर चीन की नई साजिश की पोल सामने आई है। चीन

ने अरुणाचल प्रदेश के पास वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के साथ 6 क्षेत्रों में सैनिकों

की तैनाती बढ़ा दी थी। लेकिन भारतीय सेना ने अरुणाचल सीमा पर 6 विवादित क्षेत्रों पर

कब्जा कर लिया है। अरुणाचल सीमा पर 6 विवादित इलाकों में चीन सीमा पर भारतीय

सेना ने पिछले 20 दिनों में बड़ी कामयाबी हासिल की है। भारतीय सेना ने पिछले 20 दिनों

में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के मंसूबों पर पानी फेरते हुए चीन की सीमा पर 6 विवादित

इलाकों’ और ‘4 संवेदनशील इलाकों’ पर कब्जा कर लिया है। चीनी सेना भारतीय सेना पर

हावी होने के वास्ते इन विवादित इलाकों पर कब्जा करना चाहती थी।

भारतीय सेना ने इस बारे में जानकारी दी है

भारतीय सेना के आधिकारिक सूत्रों ने आज शाम को कहा तेजपुर में कहा कि लद्दाख में

भारत से मिल रही कड़ी चुनौती के बीच चीन ने अरुणाचल सीमा पर चहलकदमी बढ़ा दी

है। जवाब में भारतीय सेना भी पूरी तैयार है और चीन से सटे 1962 के युद्ध के समय के ‘6

विवादित इलाकों’ और ‘4 संवेदनशील इलाकों’ में सतर्कता बढ़ाई है। रक्षा सूत्र ने बताया,

‘इन चार विवादित इलाकों के नाम असापिला, लोंगजू, बीसा और माझा हैं और ये अपर

सुबानसिरी जिले में स्थित हैं। यहां चीन ने एलएसी के पास एक रोड भी बना ली है।’

उन्होंने आगे बताया, ‘चीन पूरे असापिला सेक्टर पर अपना अधिकार जताता है और

इसलिए इसको लेकर काफी विवाद है।

बता दें कि मई महीने में चीनी सेना ने 21 वर्षीय एक युवक का असापिला सेक्टर से ही

अपहरण कर लिया था। हालांकि 19 दिनों बाद उन्होंने उसे भारतीय सेना के हवाले कर

दिया था। चीनी सेना ने अरुणाचल सीमा पर बढ़ाई चहलकदमी, भारत भी तैयार’ दूसरी

तरफ चीन भी भारत की बढ़ती हुई ताकत और विदेश में बढ़ रहे असर से परेशान हैं। चीन

अपने इलाके में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल के उस पार जहां अपनी सैन्य ताकत में

इजाफा कर रहा है। वैसे में भारत ने भी चीन के खिलाफ एक अभेद्य दीवार बना ली है

जिसको चीन किसी भी कीमत पर तोड़ नहीं सकता।

पहाड़ की चोटियों पर भारत का अभेद्य दीवार

इसी सिलसिले में पहली बार अरुणाचल प्रदेश के पस्सी घाट में सुखोई 30 उतरा गया है।

पस्सी घाट चीन सीमा से मात्र 80 किलोमीटर दूर है। इसका मतलब ये हुआ की भारत

सरकार किसी भी कीमत पर पाकिस्तान या फिर चीन सीमा सुरक्षा से कोई समझौता नहीं

करना चाहती।


चीन की ताकत को कम करने के लिए भारत ने अंडमान-निकोबार में सुखोई- 30

एमकेआइ फाइटर जेट के अतिरिक्त बेड़े की तैनाती के अलावा पूर्वोत्तर में खुफिया ड्रोन

और मिसाइल तैनात कर दी हैं। इसके अलावा पूर्वी लद्दाख में टैंक रेजिमेंट्स के साथ ही

सैनिकों की संख्या भी बढ़ाई गई है। यह अग्रिम एयरफील्ड साल 1962 के भारत-चीन युद्ध

के दौरान सैनिकों और रसद पहुंचाने के लिए इस्तमाल हुआ करता था। लेकिन बाद में यह

बंद कर दिया गया। सेना के अधिकारी ने कहा कि पासीघाट सहित क्षेत्र के अधिकांश हवाई

अड्डे जर्जर हो चुके हैं और उन पर घास उग रही है।


 

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