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लॉक डाउन में छूट मिलते ही राज्य में बढ़ने लगा अपराध का ग्राफ

  • पुलिस अफसर को ही लूटकर फरार हुए अपराधी
  • कई इलाकों में नक्सली घटनाओं में बढ़ोत्तरी
  • रोजगार कम होने से जोड़ रहे हैं इन वारदातों को
  • ग्रामीण इलाकों में नक्सली लेवी वसूली की घटनाएं बढ़ी
संवाददाता

रांचीः झारखंड में लॉक डाउन की छूट का एक गलत नतीजा देखने को मिल रहा है। राज्य

में धीरे धीरे अपराध का ग्राफ ऊपर जाने लगा है। इसके अलावा राज्य में निर्माण कार्य

प्रारंभ होते ही फिर से नक्सली लेवी वसूली की शिकायतें भी मिलने लगी है। साथ ही इस

क्रम में अलग अलग नाम से सक्रिय कथित नक्सली संगठनों के बीच लेवी के मुद्दे पर

आपसी टकराव के कुछ नतीजे भी सामने आये हैं। बुड़मू इलाके में नक्सली मोहन यादव

की हत्या उसका जीता जागता नमूना है।

थानों और विभिन्न इलाकों इस किस्म के अपराधों की लगातार शिकायतें मिल रही हैं।

दरअसल लूट और गुंडागर्दी के अलावा मार पीट की घटनाओं में भी बढ़ोत्तरी हुई है।

बरियातू के रिम्स परिसर स्थित एसबीआइ से सिल्ली थाना के पुलिस अधिकारी का पैसा

लूटा जाना इसका सबसे ताजा उदाहरण है। इसके पहले गत पांच 5 जुलाई को बोकारो के

पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र के बूढ़ाबांध जंगल मे अपराधियों ने खटाल संचालक प्रफुल्ल कुमार

पर हमला कर 70 हजार रुपए लूट लिए। छह जुलाई को धनबाद के तोपचांची जीटी रोड पर

प्राइवेट कंपनी के एक कलेक्शन कर्मचारी को गोली मारकर दो लुटेरों ने साढ़े 17 लाख

रुपये लूट लिए। इससे पहले चार जुलाई को रामगढ़ में सीसीएल कर्मी की पत्नी सीमा शर्मा

से बाइक सवार अपराधियों ने 1. 58 लाख रुपये की छिनतई कर ली। यह घटना रामगढ़

थाना क्षेत्र के थाना चौक के पास हुई।

लॉक डाउन में छूट के बाद कई बड़ी आपराधिक घटनाएं

27 जून को दुमका में आंध्रप्रदेश जा रहे मछली व्यवसायी से दिन दहाड़े अपराधियों ने 20

लाख रुपये लूट लिए। 25 जून को खूंटी के कर्रा थाना क्षेत्र अंतर्गत सावड़ा ग्राम के नजदीक

रोलागुटू निवासी रणधीर सिंह से दो अज्ञात अपराधियों ने हथियार का भय दिखाकर

22500 रुपये व मोबाइल फोन लूट लिया। 11 जून को रांची के मांडर थाना क्षेत्र के टटकुंडों

के पास हथियार के बल पर महिला से चार लाख रुपए लूट लिए गये थे।

इनमें से अधिकांश मामलों में अपराध घटना के बाद निकल जाने में कामयाब रहे हैं और

पुलिस को देर तक इस बार में सुराग तक मिलने की सूचना नहीं है। अनुमान के मुताबिक

इस अवधि में करीब पचास लाख रुपयों की लूट हो चुकी है। इनमें से कुछ में अपराधियों

का पहचान का दावा किये जाने के बाद भी पुलिस लूट की रकम बरामद नहीं कर पायी है।

कुछ लोग मानते हैं कि लॉक डाउन की अवधि में बाहर निकलने पर प्रतिबंध होने और

चौक चौराहों पर पुलिस की सतर्कता की वजह से अपराधियों को बाहर निकलने का अवसर

प्राप्त नहीं हो रहा था। साथ ही आम आदमी भी इनदिनों सड़कों पर नहीं था लिहाजा

शिकार की भी कमी थी। अब जैसे जैसे आम जनजीवन की गतिविधियां तेज हो रही है,

वैसे वैसे अपराधी भी सक्रिय हो रहे हैं। कुछ मामलों में रोजगार की कमी की वजह से भी

आपराधिक घटनाओँ में बढ़ोत्तरी दर्ज किये जाने की शिकायतें मिल रही है। अब जैसे जैसे

पुलिस की जांच और जगह जगह पर लगे बैरियर हटा दिये गये हैं, वैसे वैसे राज्य में दोनों

किस्म के अपराधों का ग्राफ धीरे धीर ऊपर जाने लगा है।


 

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