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अंडा देने के लिए मादा इलिश अब 72 किलोमीटर तक तैर रही है




  • पहली बार छोटी नदियों में इस प्रजाति की आ गयी बाढ़
  • बांग्लादेश सरकार के नियमों से फायदा साफ नजर आ रहा
  • खास समय पर अंडा देने के लिए मछली मारने पर प्रतिबंध लागू
राष्ट्रीय खबर

ढाकाः अंडा देने के लिए मादा इलिश अब नदियों में 72 किलोमीटर तक का सफर तय कर रही है।




यह इलिश मछली के अंडा देने का मौसम है। इसे देखते हुए अभी बांग्लादेश में इस मछली को

पकड़ने पर अगले 22 दिनों का प्रतिबंध लगा है। इस प्रतिबंध के लागू होते ही लोगों ने इलिश मछली

को नदियों के काफी अंदर तक आते हुए देखा है। इसके पूर्व इलिश मछली को नदी के इतने अंदर

आते हुए पहले कभी नहीं देखा गया था। समुद्र के मुहाने से काफी दूर भी अब एक दिन के बाद ही इस

प्रजाति की मछली की कतारें नजर आ रही हैं। यह सभी मादा मछलियां हैं, जो अंडा देने के लिए

इतनी दूर तक चली आयी है। ऐसा क्यों हैं, इस बारे में अभी कोई वैज्ञानिक तर्क नहीं है। वैसे कुछ

लोग मान रहे हैं कि मौसम में हो रहे बदलाव का भी इलिश के अंडा देने की प्रवृत्ति पर प्रभाव पड़ रहा

है। जिसकी वजह से मादा इलिश इतनी दूरी तक का सफर तय कर रही है। बांग्लादेश की अनेक

नदियों में पहली बार इतनी दूरी तक इलिश को आते देखा जा रहा है। इस प्रजाति की मछली पकड़ने

था उसके परिवहन और कारोबार पर पूरी तरह रोक लगने के तुरंत बाद सरकारी स्तर पर इसकी

निगरानी भी हो रही है।

अंडा देने के स्थानों की खास तौर पर पहचान की जा रही

 अंडा देने के स्थानों की खास तौर पर पहचान की जा रही है। इसका मकसद यह पता लगाना है कि

आखिर मादा इलिश इतनी दूरी तक का सफर क्यों तय कर रही है। पहली बार यह देखा जा रहा है कि




अधिक संख्या में इलिश मछली अनेक छोटी नदियों में भी आ गये हैं और लगातार नदी के बहाव की

उल्टी दिशा में बढ़ रहे हैं। इन मादा इलिश का मकसद नदी के खास स्थान पर अंडा देना ही है। जिस

तरीके से अभी वे नजर आ रहे हैं उससे संकेत मिलते हैं कि अगले सीजन तक बांग्लादेश में इलिश

उत्पादन का नया रिकार्ड बनने जा रहा है क्योंकि इन अंडों से बड़ा होने वाली मछली ही वहां के मुहाने

पर मछली पकड़ने वाले मछुआरों के रोजगार का मुख्य आधार है। साथ ही बांग्लादेश ही इस प्रजाति

की मछली का सबसे बड़ा निर्यातक है। इस बार की निगरानी में ड्रोन और वायुसेना की भी मदद ली

जा रही है। अगले 25 अक्टूबर तक यह अभियान जारी रहेगा। इसके लिए नौ पुलिस ने एक कंट्रोल

रुम से चौबीसों घंटे काम करने लगी है। इन तमाम प्रयासों की वजह से इलिश का समूह किधर जा

रहा है, उस पर भी निगरानी रखी जा रही है। रात के अंधेरे में भी उनका शिकार नहीं हो, इसके लिए

ही वायुसेना को जिम्मेदारी सौंपी गयी है। बांग्लादेश मत्स्य रिसर्च इंस्टिटियूट के मुख्य वैज्ञानिक डॉ

अनीसूर रहमान ने कहा कि पहली बार 72 किलोमीटर की दूरी तक मादा इलिश को सफर करते देखा

जा रहा है। यहां अपना अंडा देने के बाद मादा इलिश फिर से समुद्र में वापस चली जाएगी। लेकिन

बहाव की उल्टी दिशा में इतनी अधिक दूरी तक तैरकर आना भी इस मछली के लिए कोई आसान

काम नहीं है।



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