fbpx Press "Enter" to skip to content

झारखंड के पुलिस मेंस एसोसियेशन में गुटबाजी की पुरानी बीमारी उभरी

  • पुलिस वालों अध्यक्ष और महामंत्री का अलग अलग खेमा
  •  संगठन के अध्यक्ष पद पर काबिज हैं नरेंद्र कुमार
  •  एसोसियेशन का महामंत्री पद रमेश उरांव के पास
  •  दोनों एक दूसरे के खिलाफ पत्र जारी कर रहे हैं
संवाददाता

रांची: झारखंड के पुलिस मेंस एसोसिएशन में फिर से गुटबाजी उभर आयी है। पुलिस वालों

के इस संघ में पिछले कुछ दिनों से यह गुटबाजी नहीं थी लेकिन अब फिर से यह रोग

उभरने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं। साफ पता चल रहा है कि संगठन दो गुटों में बंट गया

है। एक गुट संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष नरेंद्र कुमार के साथ है तो दूसरा गुट महामंत्री रमेश

उरांव के साथ है। दोनों ही गुट एक-दूसरे के आदेश को काट रहे हैं। मालूम हो कि 14 जुलाई

को संगठन के महामंत्री रमेश उरांव ने एसोसिएशन की रांची शाखा के सभापति रामावतार

सिंह को छह साल के लिए संघ की प्राथमिक सदस्यता से बर्खास्त करने का आदेश जारी

किया था। उन पर एसोसिएशन के लेटर पैड का दुरुपयोग व स्पष्टीकरण का जवाब नहीं

देने का आरोप लगाया था। इसके बाद 15 जुलाई को संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष नरेंद्र

कुमार ने एक प्रेस रिलीज जारी कर सभापति रामावतार सिंह की बर्खास्तगी को नियम

विरुद्ध बताया। उनका कहना है कि बिना प्रांतीय अध्यक्ष की सहमति के किसी शाखा

अध्यक्ष की बर्खास्तगी संघीय नियमों के खिलाफ है। जिसके बाद नरेंद्र कुमार ने सभापति

रामावतार सिंह को अपने पद पर बने रहने का आदेश दिया है। इसके बाद से दोनों गुटों की

बीच का यह मतभेद जो अंदरखाने में था, उभरकर सामने आ गया है।

झारखंड के पुलिस संगठन के महामंत्री ने रांची एसएसपी को लिखा पत्र

झारखंड पुलिस मेंस एसोसिएशन के महामंत्री रमेश उरांव ने संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष

नरेंद्र कुमार के द्वारा जारी पत्र को निरस्त करने के संबंध में रांची एसएसपी को पत्र लिखा

है। रमेश उरांव ने पत्र लिखते हुए कहा है कि झारखंड पुलिस मेंस एसोसिएशन शाखा रांची

के बर्खास्त सभापति रामावतार सिंह को अपने पद पर बने रहने का आदेश नरेंद्र कुमार ने

अपने निजी स्वार्थ के चलते दिया है। पुलिस मेंस एसोसिएशन के संविधान के अनुरूप

सिर्फ महामंत्री को ही पत्राचार करने का अधिकार है।

उल्लेखनीय है कि महामंत्री रमेश उरांव ने नरेंद्र कुमार के द्वारा जारी किये गये पत्र में

असंवैधानिक बातों को बहुमत के आधार पर रद्द करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने

कहा है कि नरेंद्र कुमार के द्वारा जारी आदेश को रद्द किया जाता है। केंद्रीय एसोसिएशन

के पदाधिकारी के द्वारा नरेंद्र कुमार को हिदायत दी गयी है कि कोई भी पत्राचार बहुमत के

आधार पर ही करें।

मिली जानकारी के अनुसार यह विवाद रिवार्ड को लेकर है।

बीते दिनों रांची जिला अध्यक्ष रामअवतार सिंह ने एक आरक्षी पर ड्यूटी में अनुपस्थित

रहने के बावजूद रिवार्ड लेने का आरोप लगया था। साथ ही एसएसपी से कार्रवाई को लेकर

पत्र लिखा था। वहीं, प्रदेश महामंत्री रमेश उरांव ने कहा कि प्रांतीय अध्यक्ष की जानकारी

और सहमति के बिना किसी शाखा पदाधिकारी के द्वारा वरीय अधिकारियों को पत्र

लिखना मेंस एसोसिएशन के संघीय नियमों के विपरीत है। कौन सिपाही काम कर रहा

और कौन नहीं,यह देखना अधिकारी का काम है न कि मेंस एसोएिसशन का।

वैसे झारखंड के पुलिस मेंस एसोसियेशन में रांची में जमे रहने अथवा अन्य जिलों के

मुख्यालय में पदस्थापित रहने के ईर्दगिर्द भी राजनीति चलती है। ऐसा प्रावधान है कि

पुलिस मेंस एसोसियेशन के पदाधिकारियों का अन्यत्र तबादला नहीं किया जाएगा। इसकी

आड़ में कुछ लोग एसोसियेशन की सक्रियता की वजह से मुख्यालय में जमे रहते हैं।


 

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from झारखंडMore posts in झारखंड »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from रांचीMore posts in रांची »

5 Comments

Leave a Reply